शरद पवार की एक चाल, मोदी-शाह चारों खाने चित, NDA को भी खुश किया और पार्टी को टूट से भी बचाया
Sharad Pawar Delimitation Bill Support: परिसीमन बिल पर एनसीपी (SP) के समर्थन के संकेतों ने महाविकास अघाड़ी को झटका और एनडीए को बड़ी राहत दी है। टूट से भी बची शरद पवार की पार्टी।
- Written By: अनिल सिंह
शरद पवार और अमित शाह (फोटो क्रेडिट-X)
Sharad Pawar Delimitation Bill Support: महाराष्ट्र की सियासत के सबसे बड़े चाणक्य कहे जाने वाले शरद पवार ने एक बार फिर अपने एक अप्रत्याशित फैसले से देश और राज्य के राजनीतिक विश्लेषकों को चौंका दिया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की कार्यकारी अध्यक्ष और सांसद सुप्रिया सुले ने आगामी मॉनसून सत्र में केंद्र सरकार द्वारा पेश किए जाने वाले ऐतिहासिक 131वें संविधान संशोधन बिल (परिसीमन विधेयक) का समर्थन करने के मजबूत संकेत दिए हैं।
इस बेहद कूटनीतिक कदम के जरिए शरद पवार ने बिना राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में आधिकारिक रूप से शामिल हुए ही एक तीर से कई बड़े सियासी निशाने साधे हैं। इस फैसले से जहां एक ओर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की राह आसान होती दिख रही है, वहीं दूसरी ओर दिल्ली से लेकर महाराष्ट्र तक पवार गुट के सांसदों और विधायकों का राजनीतिक वजन काफी बढ़ गया है।
शरद पवार का कूटनीतिक दांव; पोचिंग से बची पार्टी
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह शरद पवार का एक अत्यंत सोचा-समझा और दूरगामी कूटनीतिक निर्णय है। उन्होंने तकनीकी रूप से न तो ‘इंडिया’ (I.N.D.I.A.) गठबंधन का साथ छोड़ा है और न ही वे एनडीए के खेमे में शामिल हुए हैं, लेकिन लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने वाले इस महत्वपूर्ण बिल पर समर्थन का रुख अपनाकर उन्होंने अपने बड़े सियासी हित सुरक्षित कर लिए हैं।
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विश्लेषकों का मानना है कि ऐसा चतुर कदम केवल शरद पवार जैसा अनुभवी नेता ही उठा सकता है, उद्धव ठाकरे नहीं। मुश्किल वक्त में केंद्र सरकार को राहत देकर पवार ने अपनी पार्टी को भविष्य में होने वाली किसी भी संभावित तोड़फोड़ (पोचिंग) के खतरे से पूरी तरह सुरक्षित कर लिया है। इसके साथ ही, एनडीए के करीब जाने के इस संकेत ने अजित पवार के नेतृत्व वाले NCP गुट पर भी भारी राजनीतिक दबाव बना दिया है। हालांकि सुप्रिया सुले ने कहा है कि वे बिल के अंतिम प्रारूप को देखने के बाद ही औपचारिक समर्थन देंगी, लेकिन सूत्रों का दावा है कि अंदरखाने भाजपा और शरद पवार के बीच सहमति बन चुकी है।
इंडिया गठबंधन बैकफुट पर, एनडीए के लिए राह हुई आसान
इस 131वें संविधान संशोधन (लोकसभा परिसीमन 2026) विधेयक के कानून बनने के बाद देश में लोकसभा की कुल सीटों की संख्या वर्तमान 543 से बढ़कर लगभग 850 हो जाएगी। इसके साथ ही, साल 2023 के ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के प्रावधानों के तहत निचले सदन में महिलाओं के लिए एक-तिहाई (33%) सीटें आरक्षित करने का रास्ता भी साफ हो जाएगा। गौरतलब है कि पिछले सत्रों में मजबूत विपक्षी एकजुटता के कारण मोदी सरकार इस दिशा में आगे नहीं बढ़ सकी थी।
अब शरद पवार के इस बदले हुए स्टैंड ने जहां विपक्षी ‘इंडिया’ ब्लॉक को एक बड़ा झटका दिया है, वहीं बहुमत के करीब खड़ी एनडीए सरकार को बड़ी राहत प्रदान की है। मौजूदा आंकड़ों के लिहाज से लोकसभा में एनडीए के पास 319 सांसदों का स्पष्ट समर्थन हासिल है। राजनीतिक गलियारों में चल रही चर्चाओं की मानें तो आने वाले दिनों में तमिलनाडु की डीएमके (DMK) भी इस बिल पर सरकार के पक्ष में अपना रुख नरम कर सकती है। यदि डीएमके और शरद पवार गुट के सांसदों को जोड़ लिया जाए, तो यह आंकड़ा 349 तक पहुंच जाता है, जिससे सरकार बिल को पास कराने के लिए जरूरी 360 के जादुई आंकड़े के बेहद करीब पहुंच जाएगी।
