CSMT के ऐतिहासिक गुंबद से पानी रिसने की वजह आई सामने, कमजोर हुए 100 साल पुराने पत्थरों के जोड़
Mumbai CSMT Dome Leakage: मुंबई के ऐतिहासिक सीएसएमटी गुंबद से पानी के रिसाव की वजह सामने आई है। 100 साल पुराने पत्थरों के कमजोर जोड़ों की चूने-गुड़ से पारंपरिक मरम्मत 31 अगस्त तक होगी।
- Written By: रूपम सिंह
CSMT का ऐतिहासिक गुंबद -(सोर्सः सोशल मीडिया)
Mumbai Chhatrapati Shivaji Terminus: मुंबई की पहचान और यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस के ऐतिहासिक केंद्रीय गुंबद से हो रहे पानी के रिसाव की वजह सामने आ गई है। रेल लैंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ने बताया कि सौ वर्ष से अधिक पुराने पत्थरों के जोड़ कमजोर पड़ने और समय के साथ पत्थरों के छिद्रयुक्त हो जाने के कारण वर्षा का पानी भीतर प्रवेश कर रहा है, जिससे गुंबद में रिसाव हो रहा है।
बता दें कि लगातार चार दिनों तक हुई भारी बारिश के बाद सीएसएमटी के केंद्रीय गुंबद से पानी टपकने लगा। इसके बाद गुंबद के नीचे स्थित फोयर क्षेत्र को एहतियातन अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया। रिसाव वाले स्थानों पर पानी सोखने वाली चटाइयां बिछाई गईं और सुरक्षा के मद्देनजर बैरिकेडिंग की गई। आरएलडीए के अनुसार वर्षों तक बारिश, गर्मी और मौसम के प्रभाव को झेलने के कारण पत्थरों के जोड़ कमजोर हो गए हैं।
साथ ही कुछ पत्थर प्राकृतिक रूप से छिद्रयुक्त हो चुके हैं, जिससे उनमें से पानी रिसकर गुंबद के अंदर पहुंच रहा है। सीएसएमटी एक विश्व धरोहर इमारत है, इसलिए इसकी मरम्मत में आधुनिक वॉटरप्रूफिंग सामग्री का उपयोग नहीं किया जा सकता। इमारत की मूल वास्तुकला और ऐतिहासिक स्वरूप को सुरक्षित रखते हुए पारंपरिक संरक्षण तकनीकों से मरम्मत की जा रही है।
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टपक रहा पानी
विशेषज्ञ संस्थाओं की ली जा रही मदद संरक्षण कार्य में वीरमाता जीजाबाई प्रौद्योगिकी संस्थान, भारतीय राष्ट्रीय कला व सांस्कृतिक विरासत न्यास, केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान, विरासत संरक्षण विशेषज्ञ और संरचनात्मक इंजीनियरों का मार्गदर्शन लिया जा रहा है।
पत्थरों के जोड़ों को पारंपरिक चूना और गुड़ के मिश्रण से भरा जा रहा है, जबकि ग्रैविटी ग्राउटिंग तकनीक से पत्थरों की दरारें और खाली स्थान भरे जा रहे हैं। छिद्रयुक्त पत्थरों के उपचार की अंतिम कार्यप्रणाली विशेषज्ञ तय कर रहे हैं।
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31 अगस्त तक मरम्मत का लक्ष्य
आरएलडीए के अनुसार गुंबद में रिसाव की स्थायी मरम्मत का कार्य जारी है और पूरी संरक्षण प्रक्रिया 31 अगस्त तक पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। भारी बारिश के बाद सामने आई इस समस्या के समाधान के लिए युद्धस्तर पर काम किया जा रहा है, ताकि ऐतिहासिक इमारत का मूल स्वरूप सुरक्षित रखते हुए उसका संरक्षण किया जा सके।
