स्कूल बस संचालकों ने मांगी सरकारी सब्सिडी, सिंगल शिफ्ट सिस्टम लागू करने की अपील
School Bus Operators Diesel Price Hike: डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों से स्कूल बस ऑपरेटर्स आर्थिक दबाव में हैं। संगठन ने सरकार से राहत पैकेज और स्कूलों से सिंगल शिफ्ट सिस्टम लागू करने की मांग की है।
- Written By: अपूर्वा नायक
स्कूल बस डीज़ल संकट (सौ. सोशल मीडिया )
School Bus Operators Diesel Price Hike Update: स्कूलों के नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत से पहले लगातार बढ़ती डीजल कीमतों ने स्कूल बस संचालकों की चिंता बढ़ा दी है। बढ़ते ईंधन खर्च, वाहन रखरखाव समेत अन्य कारणों से स्कूल बस ऑपरेटर्स आर्थिक दबाव में आ गए हैं।
ऐसे हालात में स्कूल बस ओनर्स एसोसिएशन ने सरकार से राहत पैकेज और सब्सिडी देने की मांग की है। कहा गया है कि यदि जल्द राहत नहीं मिली, तो स्कूल बस परिवहन शुल्क बढ़ाना मजबूरी बन सकता है।
सिंगल शिफ्ट सिस्टम अपनाने की अपील
वहीं, परिवहन खर्च कम करने और अभिभावकों पर अतिरिक्त बोझ टालने के लिए स्कूलों से सिंगल शिफ्ट सिस्टम अपनाने की अपील भी की गई है। स्कूल बस ओनर्स एसोसिएशन के अनुसार स्कूल बस ऑपरेटर्स पहले से ही वाहन रखरखाव, बीमा प्रीमियम, परमिट शुल्क, कर्मचारियों के वेतन और अन्य प्रशासनिक खर्चों का भारी बोझ उठा रहे हैं। अब डीजल की बढ़ती कीमतों ने उनकी आर्थिक परेशानी और बढ़ा दी है।
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स्कूलों से सिंगल शिफ्ट सिस्टम अपनाने की अपील
हालांकि, एसबीओए ने साफ किया है कि वह अभिभावकों और विद्यार्थियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं डालना चाहता। इसी कारण संगठन ने स्कूलों और सरकार के सामने कुछ व्यावहारिक सुझाव रखे हैं, ताकि बिना बस शुल्क बढ़ाए खर्च को नियंत्रित किया जा सके।
एसोसिएशन ने स्कूलों से हाइब्रिड शिक्षण प्रणाली अपनाने की अपील की है। इसके तहत सप्ताह में तीन दिन फिजिकल क्लास और दो दिन ऑनलाइन क्लास आयोजित करने का सुझाव दिया गया है। संगठन का कहना है कि इससे स्कूल बसों का रोजाना संचालन कम होगा और ईंधन की बचत के साथ परिचालन खर्च भी घटेगा, इसके अलावा एसबीओए ने स्कूलों से सिंगल शिफ्ट ट्रांसपोर्ट सिस्टम लागू करने का आग्रह किया है।
स्कूल बस ऑपरेटर्स राज्यभर में लाखों विद्यार्थियों की सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में सरकार, स्कूल प्रबंधन और परिवहन संचालकों को मिलकर ऐसा समाधान निकालना चाहिए, जिससे अभिभावकों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े और स्कूल बस सेवाएं भी प्रभावित न हो।
– अनिल गर्ग, अध्यक्ष, महाराष्ट्र, एसबीओए
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संगठन का कहना है कि अलग-अलग समय पर कई शिफ्ट चलने से बसों को कई बार चक्कर लगाने पड़ते हैं, जिससे ईंधन और खर्च दोनों बढ़ते हैं। यदि एक समान पिकअप और ड्रॉप समय तय किया जाए, तो बसों के फेरे कम होंगे और खर्च में बड़ी कमी आएगी, एसोसिएशन का मानना है कि इन उपायों से तत्काल किराया वृद्धि टाली जा सकती है और स्कूल परिवहन सेवाएं भी सुचारु रूप से जारी रखी जा सकती है।
