संजय राउत (सोर्स: सोशल मीडिया)
Sanjay Raut On Bhagat Singh Koshyari Padma Bhushan: गणतंत्र दिवस के अवसर पर मीडिया से बात करते हुए संजय राउत ने देश की आंतरिक सुरक्षा, बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति और पूर्व राज्यपाल कोश्यारी को मिले सम्मान पर तीखे सवाल दागे। उन्होंने राष्ट्रपति के शांति संदेश पर कटाक्ष करते हुए देश में बढ़ती अस्थिरता का मुद्दा भी उठाया।
संजय राउत ने पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को पद्मभूषण पुरस्कार देने के फैसले पर कड़ा विरोध जताया है। राउत ने कहा कि यह किसी व्यक्ति विशेष का विरोध नहीं है, बल्कि उस कार्यप्रणाली का विरोध है जो कोश्यारी के कार्यकाल में देखी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके कार्यकाल के दौरान राजभवन को राजनीति का केंद्र बना दिया गया था।
राउत ने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों का हवाला देते हुए कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार को गिराने और पार्टी को तोड़ने में जिस तरह की भूमिका निभाई गई, वह संविधान की हत्या के समान थी। उन्होंने मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री पर तंज कसते हुए कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री को याद दिलाना चाहिए कि कैसे कोश्यारी ने छत्रपति शिवाजी महाराज, महात्मा फुले और सावित्रीबाई फुले जैसी महान विभूतियों का अपमान किया था। ऐसे में उन्हें सम्मानित करना महाराष्ट्र को स्वीकार्य नहीं है।
राष्ट्रपति के गणतंत्र दिवस संबोधन पर प्रतिक्रिया देते हुए राउत ने कहा कि जब राष्ट्रपति शांति और प्रगति की बात करती हैं, तो उन्हें देश के जमीनी हालात भी देखने चाहिए। उन्होंने उत्तर प्रदेश में शंकराचार्य पर हुए लाठीचार्ज, मणिपुर की निरंतर हिंसा और दिल्ली में अदालतों पर बढ़ते दबाव का जिक्र किया। राउत के अनुसार, देश के भीतर और सीमाओं पर अशांति का माहौल है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
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राउत ने पड़ोसी देश बांग्लादेश का मुद्दा उठाते हुए केंद्र सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री सनातन धर्म और हिंदू हितों की बात करते हैं, लेकिन बांग्लादेश में हिंदुओं के घरों पर हमले और उनकी हत्याएं नहीं रुक रही हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या सरकार इन अत्याचारों को रोकने में पूरी तरह विफल रही है?
एआईएमआईएम नेता वारिस पठान द्वारा ‘हरा झंडा फहराने’ के बयान पर राउत ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हरा रंग किसी की निजी संपत्ति नहीं है। हर दल का अपना रंग होता है, लेकिन महाराष्ट्र की मिट्टी में केवल छत्रपति शिवाजी महाराज का ‘भगवा’ रंग ही प्रधान रहेगा। उन्होंने साफ किया कि सांप्रदायिक राजनीति के जरिए महाराष्ट्र की पहचान को चुनौती नहीं दी जा सकती।