Marathi Mandatory: संजय राउत का भाषा मंत्र, जब दिल्ली में हिंदी तो महाराष्ट्र में मराठी क्यों नहीं?
Sanjay Raut Marathi Statement: शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने ऑटो-टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा की अनिवार्यता का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि जो राज्य रोजगार दे, उसकी भाषा का सम्मान करना चाहिए।
- Written By: गोरक्ष पोफली
संजय राउत (सोर्स: सोशल मीडिया)
Marathi Mandatory for Taxi Drivers: महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा बोलना अनिवार्य किए जाने के मुद्दे पर चल रही बहस के बीच, शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि कोई व्यक्ति महाराष्ट्र में रहकर रोजगार प्राप्त कर रहा है, तो उसे यहाँ की भाषा और संस्कृति का सम्मान करना ही होगा। राउत का यह बयान उन समूहों को एक सीधा संदेश है जो भाषा की अनिवार्यता का विरोध कर रहे हैं।
भाषा और रोजगार का गहरा नाता
संजय राउत ने इस बात पर जोर दिया कि महाराष्ट्र में मराठी भाषा को प्राथमिकता देना कोई विवाद का विषय नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा, “इसमें गलत क्या है? क्या यह चर्चा का विषय है? अगर महाराष्ट्र में मराठी नहीं चलेगी तो क्या तमिलनाडु में चलेगी? बंगाल में बंगाली होनी चाहिए, हिंदी भाषी क्षेत्रों में हिंदी बोली जानी चाहिए, उसी प्रकार महाराष्ट्र में मराठी बोली जानी चाहिए।”
राउत ने आगे तर्क दिया कि जब महाराष्ट्र के लोग दिल्ली जाते हैं, तो वे वहां की भाषा (हिंदी) में बात करते हैं। इसी प्रकार, जो लोग दूसरे राज्यों से महाराष्ट्र आकर बसते हैं और यहाँ अपना व्यवसाय करते हैं, उन्हें मराठी का ज्ञान होना ही चाहिए। उन्होंने कहा कि जो राज्य आपको रोजगार (Employment) दे रहा है, यदि आप उसकी भाषा का सम्मान नहीं करते हैं, तो यह एक प्रकार की कृतघ्नता है।
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#WATCH | Mumbai | Shiv Sena (UBT) MP Sanjay Raut says, “What is wrong if Marathi is made mandatory in Maharashtra? Is this a matter of discussion? If a law has been made, then everyone must follow it. If you are protesting against this, then you are not respecting the language… pic.twitter.com/RstxBvcnyr — ANI (@ANI) April 24, 2026
ऑटो चालक न रखें ऐसी भूमिका
संजय राउत ने विशेष रूप से ऑटो-टैक्सी चालकों को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें भाषा अनिवार्यता के विरोध की भूमिका नहीं रखनी चाहिए। उन्होंने कहा, “यदि सरकार ने कोई कानून बनाया है, तो उसका पालन करना सभी का कर्तव्य है। विरोध का अर्थ यह है कि आप उस राज्य का सम्मान नहीं करते जिसने आपको रोजी-रोटी दी है।”
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राजनीतिक और सामाजिक संदर्भ
महाराष्ट्र में पिछले कुछ समय से स्थानीय भाषा को लेकर सक्रियता बढ़ी है। राज्य सरकार ने हाल ही में घोषणा की है कि 1 मई से ऑटो और टैक्सी चालकों के मराठी बोलने के कौशल की जांच की जाएगी। संजय राउत का बयान इस सरकारी पहल को नैतिक समर्थन देता हुआ प्रतीत होता है, साथ ही यह उनकी पार्टी की ‘मराठी मानुस’ और स्थानीय अस्मिता की राजनीति को भी धार देता है।
राउत के इस बयान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले समय में महाराष्ट्र की राजनीति में भाषा और पहचान का मुद्दा और अधिक गरमा सकता है। व्यापारियों और चालकों की यूनियनों के साथ होने वाली बैठकों में इस मुद्दे पर कड़ा रुख देखने को मिल सकता है।
