Sanjay Raut Offered Ganesh Naik: महाराष्ट्र की राजनीति में ठाणे और नवी मुंबई का सियासी अखाड़ा इस समय सबसे ज्यादा गर्म है। भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कद्दावर नेता गणेश नाईक और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बीच ठन गई है। अब इस लड़ाई में शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने एंट्री ली है। दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राउत ने गणेश नाईक को ‘प्रेमाचा सल्ला’ (प्रेमपूर्ण सलाह) देते हुए सीधे शिवसेना (UBT) में लौटने का निमंत्रण दे दिया है। राउत का तर्क है कि यदि नाईक को वास्तव में शिंदे गुट की ‘अरेरावी’ (तानाशाही) और भ्रष्टाचार को खत्म करना है, तो उन्हें महायुति का साथ छोड़ना होगा।
गणेश नाईक और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बीच का विवाद तब और गहरा गया जब सांसद श्रीकांत शिंदे ने नाईक को चुनावी मैदान में सीधे मुकाबले की चुनौती दी। नाईक ने नवी मुंबई के भूखंडों को बिल्डरों के हवाले करने और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर शिंदे सरकार को घेरा था। संजय राउत ने इसी मौके का फायदा उठाते हुए कहा कि बीजेपी में रहते हुए नाईक कभी भी शिंदे के खिलाफ निर्णायक जंग नहीं जीत पाएंगे, क्योंकि मुख्यमंत्री को अंततः देवेंद्र फडणवीस और अमित शाह का ही संरक्षण प्राप्त है।
संजय राउत ने स्पष्ट रूप से कहा कि गणेश नाईक जिस भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं, वह कोई छोटा मामला नहीं है। नवी मुंबई और ठाणे के महत्वपूर्ण भूखंड, जो उद्यानों और सार्वजनिक सुविधाओं के लिए आरक्षित थे, उन्हें नियमों को ताक पर रखकर बिल्डरों को दिया गया है। राउत के अनुसार, गणेश नाईक खुद कह चुके हैं कि यदि यह भ्रष्टाचार जारी रहा तो एकनाथ शिंदे को एक दिन जेल जाना होगा। लेकिन सवाल यह है कि क्या सरकार में शामिल दल के नेता के रूप में उन्हें न्याय मिलेगा? राउत ने दावा किया कि सत्ता की मलाई और जांच एजेंसियों के डर के बीच यह लड़ाई मुकाम तक नहीं पहुँच सकती।
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संजय राउत ने गणेश नाईक को याद दिलाया कि उनकी राजनीतिक जड़ें शिवसेना में ही हैं। उन्होंने कहा, “नाईक साहब, स्वगृही (घर) वापस आ जाइए। शिवसेना में शामिल होकर इस लड़ाई का रणशिंग फूँकें, विजय आपकी ही होगी।” राउत का मानना है कि शिवसेना (UBT) का मंच नाईक को वह आक्रामकता और स्वतंत्रता प्रदान करेगा जिसकी उन्हें इस समय जरूरत है। महायुति के भीतर जारी इस खींचतान ने विपक्षी गठबंधन ‘महाविकास अघाड़ी’ को एक बड़ा मुद्दा दे दिया है, जिससे यह साफ है कि आगामी चुनावों में नवी मुंबई और ठाणे की राह शिंदे गुट के लिए आसान नहीं होने वाली।
संजय राउत के इस ऑफर ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। राउत ने सीधे तौर पर अमित शाह और फडणवीस पर आरोप लगाया कि वे शिंदे की गलतियों को नजरअंदाज कर रहे हैं। ऐसे में गणेश नाईक जैसे वरिष्ठ नेता का अपमान और उनकी अनदेखी बीजेपी के लिए भारी पड़ सकती है। यदि नाईक राउत के सुझाव पर विचार करते हैं, तो ठाणे बेल्ट में समीकरण पूरी तरह बदल जाएंगे। फिलहाल, नाईक की ओर से इस ऑफर पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन इस बयान ने यह साफ कर दिया है कि शिंदे और नाईक के बीच की खाई अब भरने वाली नहीं है।