सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में NCP ने पास किया एकजुटता का प्रस्ताव, पार्थ पवार की नाराजगी पर दी सफाई
Sanjay Bansode NCP Core Meeting Updates: राकांपा नेता संजय बनसोडे ने सुनील तटकरे और छगन भुजबल के बीच हुई बहस की खबरों को झूठा बताते हुए कहा कि एनसीपी सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में पूरी तरह एकजुट है।
- Written By: अनिल सिंह
बनसोडे ने तटकरे-भुजबल विवाद पर तोड़ी चुप्पी, बोले- सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में एकजुट है एनसीपी (फोटो क्रेडिट-X)
Sanjay Bansode NCP Core Meeting Updates: मुंबई के देवगिरी बंगले पर हुई राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की इस कोर कमेटी की बैठक को आगामी विधान परिषद की 17 सीटों और राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों के चयन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा था। लेकिन बैठक संपन्न होते ही मीडिया में यह खबरें तेजी से फैल गई कि पार्टी के शीर्ष नेताओं के बीच गुटबाजी चरम पर है। इन खबरों पर डैमेज कंट्रोल करते हुए कैबिनेट मंत्री संजय बनसोडे ने कहा, “कल की बैठक का एकमात्र एजेंडा सुनेत्रा वाहिनी के नेतृत्व में संगठन को चुनावी मोड में लाना था। सभी नेताओं ने एक सुर में पार्टी को मजबूत करने का संकल्प लिया है, विवाद की अफवाहें केवल पार्टी को बदनाम करने की साजिश हैं।”
भले ही संगठन स्तर पर एकजुटता का दावा किया जा रहा हो, लेकिन सूत्रों के मुताबिक बैठक के भीतर का माहौल काफी अशांत था। प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे ने खुलकर अपना दर्द साझा करते हुए वरिष्ठ नेतृत्व के सामने सवाल उठाया कि जब भी महायुति में पार्टी के फैसलों की आलोचना होती है, तो केवल उन्हें और प्रफुल्ल पटेल को ही निशाना क्यों बनाया जाता है? तटकरे ने नाराजगी जताते हुए पूछा कि मुश्किल समय में पार्टी के अन्य विधायक और मंत्री उनके समर्थन में आकर अपना रुख स्पष्ट क्यों नहीं करते?
छगन भुजबल और सुनील तटकरे के बीच मंच पर ही तीखी नोकझोंक
तटकरे द्वारा उठाए गए इस बगावती सवाल पर पार्टी के वरिष्ठ ओबीसी चेहरे और कैबिनेट मंत्री छगन भुजबल ने कड़ी आपत्ति जताई। भुजबल ने तटकरे को बीच में टोकते हुए कहा कि चुनावी माहौल में ऐसे आंतरिक और व्यक्तिगत मुद्दों को कोर बैठक के एजेंडे में शामिल करने की कोई आवश्यकता नहीं थी। हालांकि, सूत्रों के अनुसार तटकरे ने भुजबल को कड़े शब्दों में जवाब देते हुए कहा कि वे स्थिति स्पष्ट करने के लिए अपनी बात पूरी रखेंगे। जिसके बाद कथित तौर पर पार्थ पवार मीटिंग बीच में ही छोड़कर चले गए थे। इस विवाद के बाद छगन भुजबल ने बाहर आकर भले ही मीडिया से कहा हो कि उनके बीच कोई मतभेद नहीं है, लेकिन अंदरूनी दरार पूरी तरह उजागर हो चुकी है।
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तटकरे के भाषण से पहले पार्थ पवार का बाहर जाना
इस पूरी बैठक के दौरान दो बड़े घटनाक्रमों ने बनसोडे के दावों पर सवालिया निशान खड़े कर दिए। पहला यह कि दिग्गज नेता प्रफुल्ल पटेल मुंबई में मौजूद होने के बावजूद देवगिरी की इस महत्वपूर्ण बैठक में शामिल नहीं हुए और दांडी मार दी। दूसरा बड़ा झटका तब लगा जब सुनील तटकरे अपनी बात रखने के लिए पोडियम पर आ रहे थे, तभी अजित पवार के बेटे पार्थ पवार अचानक अपनी सीट से उठे और बैठक छोड़कर बाहर चले गए। युवा नेतृत्व के इस आक्रामक रवैये से हॉल में मौजूद अन्य विधायक और पदाधिकारी सन्न रह गए।
10 जून के स्थापना दिवस और वित्त मंत्रालय की बहाली को लेकर गहराया सस्पेंस
पार्टी के भीतर केवल टिकटों को लेकर ही नहीं, बल्कि आगामी 10 जून को होने वाले राकांपा के स्थापना दिवस समारोह के आयोजन स्थल को लेकर भी दो फाड़ की स्थिति है; एक गुट इसे मुंबई में तो दूसरा गुट शरद पवार के गढ़ पुणे में आयोजित करना चाहता है। इसके अलावा, बैठक में उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार की व्यक्तिगत निराशा भी सामने आई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के समक्ष लगातार मांग उठाने के बावजूद राकांपा को अभी तक महत्वपूर्ण वित्त मंत्रालय (Finance Ministry) वापस नहीं सौंपा गया है, जिससे पार्टी के भीतर यह धारणा मजबूत हो रही है कि महायुति गठबंधन में अजीत पवार गुट को हाशिए पर धकेला जा रहा है।
