राजस्व-भूमि अभिलेख विभाग में रिश्वत का बोलबाला, 1 जनवरी से 155 गिरफ्तार
ACB की रिपोर्ट में खुलासा बड़ा खुलासा हुआ है। राजस्व, भूमि अभिलेख और पुलिस विभाग में सबसे अधिक रिश्वतखोरी की खबर सामने आयी है। 1 जनवरी से 11 नवंबर तक 155 अधिकारी रंगे हाथों पकड़े गए है।
- Written By: अपूर्वा नायक
रिश्वतखोरी (सौ. सोशल मीडिया )
Revenue Department Bribe News: महाराष्ट्र भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने इस सप्ताह की शुरुआत में, एक खास मामले में एक न्यायाधीश को रिश्वतखोरी के आरोप में नामजद किया है।
लेकिन एसीबी के नवीनतम आंकड़ों से पता चलता है कि राजस्व, भूमि अभिलेख, पंजीकरण और पुलिस विभाग रिश्वत लेते पकड़े गए अधिकारियों की सबसे बड़ी संख्या के साथ सूची में शीर्ष पर हैं।
पुलिस विभाग दूसरे स्थान पर रहा है। जहां 105 अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें से 99 तृतीय श्रेणी के अधिकारी हैं, जबकि चार प्रथम श्रेणी के अधिकारी हैं।
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राजस्व, भूमि अभिलेख और पुलिस से सीधा संपर्क
पंचायत समिति तीसरे स्थान पर रही, जिसके 60 अधिकारी इस अवधि में रिश्वत लेते पकड़े गए है। इसके बाद महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण कंपनी चौथे स्थान पर सही, जिसके 41 अधिकारी कथित तौर पर रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़े गए है।
एसीबी के एक अधिकारी ने बताया कि आमतौर पर राजस्व, भूमि अभिलेख और पुलिस जैसे विभागों का बड़ी संख्या में लोगों के साथ लगातार संपर्क रहता है। इसलिए वे सूची में शीर्ष पर है, जबकि अन्य विभागों का संपर्क ठेकेदारों जैसे सीमित लोगों तक ही रहता है।
राजस्व, भूमि अभिलेख और पुलिस ये आम जनता से जुड़े विभाग है, और यहां अक्सर आम जनता का आना-जाना लगा रहता है। जिससे भ्रष्ट अधिकारियों को अपना काम करवाने के लिए पैसे मांगने का मौका मिल जाता है। लोगों में सतर्कता बढ़ गई है और वे दबाव में आने की बजाय, एसीबी से संपर्क करते हैं, जिसके बाद जाल बिछाए जाते है।
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1 जनवरी से 11 नवंबर तक का आंकड़ा पेश
गौरतलब है कि 1 जनवरी से 11 नवंबर तक के आंकड़ों के अनुसार, राजस्व, भूमि अभिलेख और पंजीकरण विभागों के 155 अधिकारी एसीबी द्वारा बिछाए गए विभिन्न जाल बामें कथित तौर पर रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़े गए हैं। इनमें से अधिकांश (136) अराजपत्रित मध्य-स्तरीय को सरकारी कर्मचारी हैं। जो तृतीय श्रेणी न के अधिकारी हैं, जबकि सात राजपत्रित प्रथम श्रेणी के अधिकारी हैं।
