‘हाथ मिलाया पर साथ का पता नहीं’, राहुल गांधी और विजय थलपति के तालमेल पर रामदास आठवले ने कसा तंज
Ramdas Athawale Statement: मुंबई में रामदास आठवले ने राहुल गांधी और विजय थलपति के बीच हाथ मिलाने और अखिलेश यादव के संविधान वाले बयान पर अपनी प्रतिक्रिया दी। जानें क्या है पूरा मामला।
- Written By: गोरक्ष पोफली
रामदास आठवले (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Ramdas Athawale On Rahul Gandhi: केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास आठवले ने मुंबई में मीडिया से मुखातिब होते हुए विपक्षी गठबंधन की रणनीतियों और हालिया सियासी मुलाकातों पर खुलकर अपनी राय रखी। उन्होंने राहुल गांधी के नए राजनीतिक संपर्कों और समाजवादी पार्टी के रुख पर तीखा प्रहार किया।
विजय थलपति और राहुल गांधी का हाथ मिलाना
हाल ही में राजनीति के गलियारों में राहुल गांधी और दक्षिण भारतीय सुपरस्टार व तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के प्रमुख विजय थलपति के बीच बढ़ती नजदीकियों की चर्चा तेज रही है। इस पर टिप्पणी करते हुए रामदास आठवले ने कहा, मुझे लगता है कि राहुल गांधी ने विजय साथ हाथ तो मिला लिया है, लेकिन यह अभी तक साफ नहीं है कि वे पूरी तरह से एक-दूसरे के साथ गठबंधन कब करेंगे।
हाथ तो मिलाया पर साथ?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दक्षिण भारत में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए कांग्रेस विजय जैसे प्रभावशाली व्यक्तित्व का साथ चाहती है। हालांकि, आठवले ने इस पर तंज कसते हुए कहा कि हाथ मिला लेना एक बात है, लेकिन वैचारिक रूप से एक साथ आना अलग। उन्होंने याद दिलाया कि अब तक जो उनकी पांच सीटें आई हैं, वे चुनावी प्रणाली (सिस्टम) के जरिए आई हैं और उन्हें स्वीकार किया गया है। लोकतंत्र में सबको अपनी पसंद के साथ चलने का अधिकार है।
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अखिलेश यादव पर कटाक्ष
उत्तर प्रदेश की राजनीति और संविधान के मुद्दे पर समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव को आड़े हाथों लेते हुए आठवले ने कहा, अखिलेश यादव को संविधान के बारे में बहुत ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं है; उन्हें अपनी समाजवादी पार्टी पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
आठवले ने स्पष्ट किया कि विपक्ष द्वारा संविधान खतरे में है का नैरेटिव केवल राजनीतिक लाभ के लिए गढ़ा गया है। उन्होंने जोर देकर कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संविधान का न केवल सम्मान किया जा रहा है, बल्कि उसे पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है। सरकार के सभी अंग और देश का हर नागरिक उसी संवैधानिक ढांचे के भीतर काम कर रहा है।
