Raj Thackeray Targets Mohan Bhagwat On Marathi (डिजाइन फोटो)
Raj Thackeray Targets Mohan Bhagwat On Marathi: महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने सोशल मीडिया पर एक जापानी युवती का वीडियो साझा करते हुए मराठी भाषा के प्रति उसके प्रेम की सराहना की है। राज ठाकरे ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि सात समंदर पार से आए विदेशी मेहमान महाराष्ट्र की संस्कृति और भाषा का न केवल सम्मान करते हैं, बल्कि उसे सीखने का प्रयास भी कर रहे हैं। हालांकि, इसी बहाने उन्होंने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और मुंबई की बहुभाषी पहचान पर टिप्पणी करने वालों पर तीखा निशाना साधा है।
राज ठाकरे ने अपने संदेश में कहा कि जब विदेशी राष्ट्राध्यक्ष, दूतावास के अधिकारी और ‘कोल्डप्ले’ जैसे अंतरराष्ट्रीय कलाकार मुंबई आकर मराठी में संवाद कर सकते हैं, तो कुछ “अपने” लोगों को मराठी बोलने में हिचकिचाहट क्यों होती है? उन्होंने स्पष्ट किया कि मुंबई की प्राथमिक भाषा मराठी है और इसका सम्मान किया जाना चाहिए।
एका जपानी तरुणीचा एक व्हिडीओ समोर आला. ती सध्या महाराष्ट्रात वास्तव्याला आहे आणि ती तिच्या परीने मराठी भाषा शिकायचा प्रयत्न करत आहे. ती एक नवीन मराठी शब्द रोज शिकते आणि त्याची एक चित्रफीत तिने टाकली. ती चित्रफीत पाहिल्यावर एक विचार डोक्यात आला की हे सगळे काही हजार किलोमीटरवरून… pic.twitter.com/jFH97Ax61q — Raj Thackeray (@RajThackeray) February 24, 2026
राज ठाकरे ने उस जापानी लड़की का उदाहरण दिया जो वर्तमान में महाराष्ट्र में रह रही है और प्रतिदिन एक नया मराठी शब्द सीखकर उसका वीडियो साझा करती है। राज ने कहा, “इन विदेशी मेहमानों को मराठी के प्रति जितना कुतूहल है, उतना ही गहरा आदर भी है। वे यहाँ की खाद्य संस्कृति, नाटक और इतिहास को समझने की कोशिश करते हैं।” उन्होंने नवी मुंबई में हुए कोल्डप्ले कंसर्ट का भी जिक्र किया, जहाँ मुख्य गायक क्रिस मार्टिन ने मराठी में दर्शकों का अभिवादन किया था।
ये भी पढ़ें- सांसदों की उपेक्षा पर फूटा रक्षा खडसे का गुस्सा, जलगांव DPC बैठक में प्रोटोकॉल उल्लंघन पर दी बड़ी चेतावनी
राज ठाकरे ने आरएसएस सरसंघचालक मोहन भागवत के हालिया मुंबई दौरे पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “जब सरसंघचालक मुंबई में एक कार्यक्रम के लिए आए, तो उन्हें यह क्यों नहीं लगा कि वे महाराष्ट्र में हैं और उन्हें थोड़ा संवाद मराठी में भी करना चाहिए?” राज ने पूर्व सरसंघचालक सुदर्शन जी का उदाहरण देते हुए कहा कि रायपुर में पलने के बावजूद वे अपनी कन्नड़ भाषा को कभी नहीं भूले। उन्होंने उन लोगों की भी आलोचना की जो मुंबई को केवल ‘बहुभाषी’ शहर बताकर इसकी मराठी पहचान को कमतर आंकते हैं।
अंत में, राज ठाकरे ने मराठी भाषियों से एक महत्वपूर्ण अपील की। उन्होंने कहा कि विदेशी तो हमारी भाषा का सम्मान करेंगे ही, लेकिन अगर हमें अपने ही देश के “मूठभर स्वकीयों” (मुट्ठी भर अपनों) को मराठी बोलने पर मजबूर करना है, तो हमें इस भाषा को ‘ज्ञान और रोजगार’ (अर्थार्जन) की भाषा बनाना होगा। उन्होंने जोर दिया कि मराठी को इतना सशक्त बनाना चाहिए कि उसे सीखे बिना किसी के पास कोई विकल्प न बचे। उन्होंने उस जापानी युवती को हृदय से धन्यवाद देते हुए अपना संदेश समाप्त किया।