पत्रकारों के सवालों का जवाब देना नहीं आता तो आपकी क्या उपयोगिता?: राज ठाकरे
Raj Thackeray: मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने चुनाव आयोग की पत्रकार परिषद पर सवाल उठाते हुए कहा कि पत्रकारों के प्रश्नों का उत्तर नहीं देना मतदाताओं का अपमान है।
- Written By: आंचल लोखंडे
“पत्रकारों के सवालों का जवाब देना नहीं आता तो आपकी क्या उपयोगिता (सौजन्यः सोशल मीडिया)
Mumbai News: आज के चुनाव आयोग की पत्रकार परिषद का एक क्लिप किसी ने मुझे भेजा। उसे देखकर बहुत खीज हुई, और अब मुझे 100% भरोसा हो गया कि चुनाव आयोग केवल संविधान में स्वतंत्र है, किन्तु व्यवहार में सत्ता-प्रचारकों का हाथ-पुतला बन गया है। यह शब्द मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे ने अपने सोशल पोस्ट में चुनाव आयोग के लिए कहे। आज चुनाव आयोग ने स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं के चुनावों की घोषणा करने के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलायी थी।
राज ठाकरे ने अपने एक्स (पूर्व ट्विटर) पोस्ट में आगे लिखा कि दोबारा मतदाता नोंदणी से लेकर मतदाता सूची में अनेक गड़बड़ियों तक जब इन सब विषयों पर किसी भी एक प्रश्न का चुनाव आयोग संतोषजनक उत्तर देने में असमर्थ है या उत्तर देने का इच्छुक नहीं दिखता, तो ऐसे आयोग का क्या उपयोग? आपने अपनी जिम्मेदारियां पहले ही टाल दी हैं, अब उत्तरदायित्व से भी मुंह मोड़ रहे हैं; तो फिर आपके पदों का क्या मतलब रह गया? उन्होंने यह तीखा सवाल उठाया।
आजच्या निवडणुका आयोगाच्या पत्रकार परिषदेची क्लिप मला कोणीतरी पाठवली. ती पाहून तळपायाची आग मस्तकात गेली ! आणि आता १००% खात्री पटली की निवडणूक आयोग स्वायत्त आहे हे फक्त संविधानात आहे.. हे सत्ताधाऱ्यांच्या हातचं बाहुलं आहे… दुबार मतदार नोंदणीपासून, ते मतदार यादीतील अनेक घोळ या… pic.twitter.com/DizmmWTOkH — Raj Thackeray (@RajThackeray) November 4, 2025
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“मतदाताओं का अपमान”
राज ठाकरे ने लोगों से कहा कि महाराष्ट्र की जनता इस क्लिप को अवश्य देखे। इससे आपको पता चल जाएगा कि आपके मत का किस तरह अपमान हो रहा है। उन्होंने यह क्लिप साझा भी की। साथ ही, उन्होंने उन पत्रकारों की भी सराहना की जिन्होंने उस प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्वतंत्र और कठोर प्रश्न पूछकर आयोग की पोल खोलने का काम किया।
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क्या चुनाव पहले से तय हैं?
पिछले कुछ दिनों में, सत्याचा मोर्चा के एक आयोजन में महाविकास आघाडी ने भी सरकार के विरुद्ध गम्भीर आरोप लगाए थे। उनका कहना था कि जब तक मतदाता सूचियों में सुधार नहीं होता, चुनाव नहीं होने चाहिए। इसी दौरान मनसे के नेताओं ने भी आयोग पर निशाना साधा। आरोप है कि ईवीएम के जरिये परिणाम पहले से तय किए जा सकते हैं। इसे प्रोग्रामिंग के जरिए सच में “फिक्स” किया जा रहा है। इसके अलावा मतदाता सूची में गड़बड़ियों को छिपाकर और झूठी प्रविष्टियाँ बनाए रखकर चुनाव कराने को भी “मैच फिक्सिंग” कहा गया।
