Prakash Ambedkar Warning SC Sub-categorization (फोटो क्रेडिट-X)
Prakash Ambedkar Warning SC Sub-categorization: अनुसूचित जाति (SC) श्रेणी के भीतर उप-वर्गीकरण को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में तनाव बढ़ता जा रहा है। वंचित बहुजन अघाड़ी के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रकाश अंबेडकर ने इस मुद्दे पर राज्य सरकार को कड़ी चेतावनी दी है।
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए अंबेडकर ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले की आड़ में महाराष्ट्र सरकार समाज को विभाजित करने की कोशिश कर रही है, जिससे जनता में भारी असंतोष व्याप्त है।
प्रकाश अंबेडकर ने सबसे पहले जस्टिस बदर समिति की पारदर्शिता पर सवाल उठाए। उन्होंने मांग की कि महाराष्ट्र सरकार इस समिति की रिपोर्ट को तुरंत सार्वजनिक करे। अंबेडकर ने हमला बोलते हुए कहा, “सरकार ने बिना जांच के विभाजन की घोषणा कर दी है। किस आधार पर जातियों का विभाजन किया गया? किस जनजाति को प्रतिनिधित्व नहीं मिला? इसकी कोई वैज्ञानिक जांच नहीं हुई है। अगर यह बिना किसी विशेषज्ञ संस्था की मदद के किया गया है, तो यह पूरी तरह अवैज्ञानिक है।”
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अंबेडकर ने संवैधानिक प्रक्रिया का जिक्र करते हुए कहा कि अनुसूचित जाति और जनजाति की सूची में किसी भी प्रकार का परिवर्तन करने का अधिकार केवल संसद के पास है। उन्होंने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट ने संसद का यह अधिकार छीनकर राज्य सरकारों को सौंप दिया है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। उनके अनुसार, जस्टिस बदर समिति ने अपनी जांच में टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) जैसी किसी विशेषज्ञ संस्था या सांख्यिकीय अध्ययन केंद्र को शामिल नहीं किया, जो इसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है।
प्रकाश अंबेडकर ने सरकार को आगाह किया कि वर्तमान में लोग डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर की जयंती मनाने में व्यस्त हैं, लेकिन इसके तुरंत बाद राज्य भर में आक्रोश फैल सकता है। उन्होंने इसे एक विशिष्ट समूह को आरक्षण के लाभ से निष्कासित करने की साजिश करार दिया। उन्होंने कहा कि कर्नाटक सरकार ने वैज्ञानिक फार्मूला अपनाया है, जबकि महाराष्ट्र में प्रगतिशील समूहों को दरकिनार करने की कोशिश हो रही है। अंबेडकर ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने बिना वैज्ञानिक अध्ययन के इस रिपोर्ट को लागू किया, तो राज्य में सामाजिक तनाव पैदा होगा जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।