नागपुर बस सेवा आर्थिक संकट में, आमदनी कम, खर्च ज्यादा; परिवहन विभाग पर दबाव

Nagpur Aapli Bus Deficit: नागपुर की आपली बस सेवा बढ़ते बेड़े के बावजूद घाटे में है। 2026-27 बजट में 640 करोड़ का प्रस्ताव और अतिरिक्त फंड की मांग की गई है।
Nagpur Bus Service Faces Financial Crisis: Low Revenue, High Expenses; Pressure Mounts on Transport Department
नागपुर आपली बस घाटा( सोर्स: सोशल मीडिया )
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Nagpur Public Transport Budget: नागपुर आपली बस परिवहन को सक्षम बनाने की दृष्टि से भले ही केंद्र और राज्य सरकार की ओर से अनुदान या आर्थिक मदद उपलब्ध कराई जा रही हो किंतु बसों का बेड़ा लगातार बढ़ने के बावजूद घाटे से उभर नहीं रही है।

आलम यह है कि परिवहन समिति की ओर से बुधवार को प्रस्तुत किए जा रहे वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में प्रशासन से अधिक निधि की डिमांड की जा रही है।

परिवहन विभाग में भले ही आय सीमित हो किंतु खर्च में किसी तरह की कटौती नहीं हो रही है जिससे 'आमदनी अठन्नी, खर्चा रुपैया' की कहावत चरितार्थ होती दिखाई दे रही है।

उल्लेखनीय है कि हाल ही में परिवहन विभाग की ओर से समिति के सभापति को 524 करोड़ का बजट पेश किया गया जिसके बाद अब समिति की सभापति की ओर से बुधवार को बजट पेश किया जा रहा है।

बताया जाता है कि इस वित्तीय वर्ष में मनपा से 240 करोड़ के करीब वित्तीय मदद मिलने की मांग के साथ 640 करोड़ तक का बजट पेश होने की संभावना है।

बस स्टॉप पर होर्डिंग्स से आय का लक्ष्य

परिवहन समिति सभापति की ओर से उनके बजट में आय बढ़ाने पर भी जोर दिया जाएगा जिसके लिए बस स्टाप पर होर्डिंग्स लगाने के नए विकल्प पर मंथन किया जा रहा है।

बताया जाता है कि इस संदर्भ में अंतिम निर्णय लगभग हो चुका है। सिटी में सैकड़ों बस स्टाप हैं जहां होर्डिंग्स का विकल्प दिया जा सकता है जिससे परिवहन विभाग को अच्छी आय होने की उम्मीद है।

मोरभवन डिपो का कायाकल्प, 10 करोड़ खर्च की तैयारी

बताया जाता है कि मोरभवन से बसों के संचालन के दौरान कई तरह की परेशानियां होती हैं। यहां तक कि लोगों को खड़े रहने के लिए अच्छे शेड, पेयजल की कोई व्यवस्था नहीं है।

यहां तक कि दिनभर बसों की आवाजाही से धूल के गुब्बारे उड़ते रहते हैं। इसे देखते हुए मोरभवन बस डिपो का कायाकल्प करने के लिए बजट में 10 करोड़ का प्रावधान होने की उम्मीद जताई जा रही है।

आयुक्त ने घटाया, स्थायी से डिमांड

सिटी बसों के परिवहन की व्यवस्था अपने हाथों में लेने के बाद से परिवहन विभाग द्वारा हमेशा ही घाटे का बजट पेश किया गया। आय और खर्च में आने वाले इस अंतर को पाटने के लिए हमेशा से मनपा द्वारा अनुदान मांगा गया जिसके बलबूते बसों का संचालन होता रहा

गत वर्ष भनपा की ओर से परिवहन विभाग को 170 करोड़ का अनुदान दिया गया था किंतु इस वर्ष मनपा आयुक्त ने परिवहन विभाग को केवल 150 करोड़ आवंटित किए है।

पहले ही नुकसान में चल रहे परिवहन विभाग के अनुदान में कटौती करने से विभाग के अधिकारियों के माथे पर बल पड़ने लगे हैं।

सूत्रों के अनुसार भले ही आयुक्त ने अनुदान घटाया हो लेकिन स्थायी समिति की और से प्रस्तुत होने वाले आम बजट से पहले परिवहन सभापति द्वारा दिए जाने वाले बजट में अनुदान बढ़ाने की डिमांड की जाएगी।

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