जलयुक्त शिवार अभियान में सामाजिक संगठनों की भागीदारी। (सौजन्यः सोशल मीडिया)
मुंबई: राज्य में ‘जलयुक्त शिवार योजना-2’ के अंतर्गत ‘मिट्टी मुक्त बांध, मिट्टी मुक्त शिवार’ योजना क्रियान्वित की जा रही है। इस योजना से न केवल बांधों में जल भंडारण बढ़ रहा है, बल्कि कृषि उर्वरता को भी काफी हद तक बढ़ाने में मदद मिल रही है। इस योजना में भागीदारी और प्रभावी कार्यान्वयन के संबंध में एटीई चंद्रा फाउंडेशन और मृदा एवं जल संरक्षण विभाग के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
मिट्टी मुक्त बांध, मिट्टी युक्त शिवार मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की महत्वाकांक्षी योजना है। सामाजिक संगठन इसमें काम करने के लिए उत्सुक हैं। एटीई चंद्रा फाउंडेशन की सक्रिय भागीदारी से न केवल राज्य में जल उपलब्धता बढ़ेगी, बल्कि मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने और किसानों की उत्पादकता बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री फडणवीस ने मृदा एवं जल संरक्षण विभाग को भी इस योजना के क्रियान्वयन में फाउंडेशन को सहयोग करने का निर्देश दिया है।
अवनि ग्रामीण ऐप के माध्यम से ऑनलाइन डेटा का संग्रह और नियंत्रण
इस समझौता ज्ञापन के अनुसार, एटीई इस परियोजना के लिए जिम्मेदार होगा। चंद्रा फाउंडेशन तकनीकी सहायता प्रदान करेगा, जबकि परियोजना प्रबंधन इकाई मानव संसाधन सहायता प्रदान करेगी। योजना के तहत किए जा रहे कार्यों का डेटा फाउंडेशन द्वारा विकसित अवनि ग्रामीण ऐप के माध्यम से एकत्रित और नियंत्रित किया जाएगा। साथ ही, फाउंडेशन द्वारा गैर सरकारी संगठनों में नियुक्त कर्मचारियों को अवनि ग्रामीण ऐप पर प्रशिक्षण दिया जाएगा।
‘तलछट मुक्त बांध, तलछट युक्त शिवार’ योजना राज्य की एक महत्वाकांक्षी परियोजना है। इसमें बांधों और झीलों से गाद निकाली जाती है और कीचड़ को कृषि भूमि में डाल दिया जाता है। इससे जल भंडारण बढ़ता है और मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है। पिछले दो वर्षों में राज्य के 1,500 से अधिक जल निकायों से लगभग 45 मिलियन क्यूबिक मीटर मिट्टी निकाली गई है और लगभग 40,000 किसानों ने इस गाद का उपयोग कृषि के लिए किया है।
राज्य के 34 जिलों में लगभग 90 मिलियन क्यूबिक मीटर मिट्टी निकालने की क्षमता है, और 1.8 लाख से अधिक किसान गाद का परिवहन करेंगे। यह कार्य वर्तमान में तेजी से चल रहा है। ‘तलछट मुक्त बांध, तलछट युक्त शिवार’ एक अभिनव योजना है जो परोपकारी संगठनों, सरकारी विभागों और स्थानीय समुदायों को एक साथ लाती है, जिससे यह एक बड़े पैमाने पर भागीदारी वाली पहल बन जाती है।
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जलयुक्त शिवार अभियान महाराष्ट्र सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल है, जिसे राज्य के सूखा प्रभावित क्षेत्रों में जल संरक्षण और जल प्रबंधन में सुधार के लिए क्रियान्वित किया गया है। 2015 में शुरू किए गए इस अभियान का मुख्य उद्देश्य भूजल स्तर को बढ़ाना, टिकाऊ सिंचाई सुविधाएं बनाना और वर्षा जल को प्रभावी ढंग से पुनर्भरण करना था। इस अभियान के अंतर्गत विभिन्न जल संरक्षण उपायों जैसे छोटे बांध, नहर गहरीकरण, जल टैंक, मिट्टी कार्य, वृक्षारोपण और खेत तालाबों को शामिल किया गया।
“पानी रोको, पानी बचाओ” के सिद्धांत पर आधारित यह अभियान स्थानीय लोगों की भागीदारी से क्रियान्वित किया गया। महाराष्ट्र के कई गांवों में इससे जल भंडारण बढ़ा, कृषि के लिए जल उपलब्धता में सुधार हुआ और सूखे पर काबू पाने में मदद मिली।
भारत में जल संसाधनों (आरडब्ल्यूबी) को पुनर्जीवित करने के लिए समुदाय-नेतृत्व वाली, प्रौद्योगिकी-सक्षम मॉडल, ग्रामीण जल सुरक्षा को बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप है। संयुक्त भूमि-उपयोग बहाली और मूल्यांकन उपकरण (सीएलएआरटी जीआईएस) और अवनि ग्रामीण ऐप भूजल पुनर्भरण की क्षमता वाले जल स्रोतों की पहचान कर सकते हैं और किसान स्तर पर भू-टैग छवियों और सत्यापन के माध्यम से जल स्रोत बहाली के लिए ऐसे हस्तक्षेपों की निगरानी को सक्षम कर सकते हैं। इसलिए, आरडब्ल्यूबी भारत की जल चुनौतियों के लिए एक लागत प्रभावी समाधान है।
अमृत सरोवर पहल काफी हद तक “तलछट मुक्त बांध, तलछट युक्त शिवार” पहल पर आधारित है। अमृत सरोवर मॉडल जल संरक्षण और जलाशय पुनरुद्धार के लिए भारत सरकार की एक पहल है, जिसे “आजादी का अमृत महोत्सव” के तहत शुरू किया गया है। इस मॉडल का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करके भूजल स्तर को बढ़ाना और पर्यावरण में सुधार करना है। इसके लिए स्थानीय प्रशासन, ग्राम पंचायतों और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी ली जाती है। इसका उद्देश्य मनरेगा और अन्य सरकारी योजनाओं की मदद से जिले में कम से कम 75 अमृत सरोवर विकसित करना है। इससे कृषि एवं पशुपालन को बढ़ावा मिलेगा, साथ ही जल संरक्षण होगा तथा ग्रामीण क्षेत्रों में जल आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।