6 सांसदों के बाद 20 पार्षद, ठाकरे गुट में होगी एक और टूट, ऑपरेशन टाइगर के अगले चरण पर शिंदे गुट का बड़ा इशारा
Shinde Camp Targets 20 UBT BMC Corporators Kiran Landge: 6 सांसदों की बगावत के बाद शिंदे गुट के किरण लांडगे का दावा- ठाकरे गुट के 20 से ज्यादा पार्षद संपर्क में।
- Written By: अनिल सिंह
ठाकरे गुट के 20 पार्षदों पर शिंदे सेना की नजर; किरण लांडगे का बड़ा खुलासा (फोटो क्रेडिट-X)
Kiran Landge Operation Tiger BMC: महाराष्ट्र की सियासत में ‘ऑपरेशन टाइगर’ के जरिए लोकसभा के 6 सांसदों को अपने पाले में करने के बाद, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने अब उद्धव ठाकरे के सबसे मजबूत और ऐतिहासिक गढ़ यानी मुंबई नगर निगम (BMC) को पूरी तरह से ध्वस्त करने की तैयारी कर ली है। दिल्ली में सांसदों की बगावत की औपचारिकताएं पूरी होने के ठीक बाद, शिंदे गुट के पूर्व पार्षद और वरिष्ठ नेता किरण लांडगे ने एक बेहद सनसनीखेज दावा किया है। लांडगे के मुताबिक, उद्धव ठाकरे गुट के 20 से अधिक मौजूदा और पूर्व पार्षद इस समय शिंदे समूह के शीर्ष नेतृत्व के सीधे संपर्क में हैं और जल्द ही पाला बदलने वाले हैं।
इस बड़े खुलासे के बाद देश के सबसे अमीर नगर निगम (बीएमसी) और मुंबई की स्थानीय राजनीति में एक नया और जबरदस्त भूचाल आना तय माना जा रहा है। लाडंगे के दावे के बाद से शिवसेना यूबीटी के अस्तित्व पर संकट के बादल मंडराते दिख रहे हैं।
65 पार्षदों में से 20 से अधिक टूटने की कगार पर
शिंदे गुट के नेता किरण लांडगे ने मीडिया से बातचीत में जमीनी स्तर पर चल रही राजनीतिक हलचलों को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा, “ठाकरे की शिवसेना के कई महत्वपूर्ण पार्षद हमारे काम और विचारधारा से प्रभावित होकर हमारे संपर्क में हैं। वर्तमान में 20 से अधिक ऐसे पार्षद हैं जो बहुत जल्द शिंदे समूह में शामिल होने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं और उनकी बातचीत अंतिम चरण में है।” गौरतलब है कि मुंबई नगर निगम में ठाकरे समूह के कुल 65 पार्षद हैं। यदि किरण लांडगे का यह दावा सच साबित होता है और 20 से अधिक पार्षद बगावत करते हैं, तो बीएमसी पर पिछले तीन दशकों से चला आ रहा ठाकरे परिवार का एकाधिकार और राजनीतिक ताकत पूरी तरह से समाप्त हो जाएगी।
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अगले चरण में पहुंचा ऑपरेशन टाइगर
साल 2022 में महाविकास अघाड़ी सरकार गिरने और शिवसेना में हुए ऐतिहासिक विभाजन के बाद से ही दोनों गुटों के बीच विधायकों, सांसदों और स्थानीय पदाधिकारियों को अपनी ओर खींचने की रस्साकशी लगातार जारी है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सांसदों के सफल दलबदल के बाद अब ‘ऑपरेशन टाइगर’ के अगले चरण के तहत मुंबई, ठाणे और कल्याण-डोंबिवली नगर निगमों के बचे हुए ठाकरे समर्थकों को निशाना बनाया जा रहा है। किरण लांडगे के इस बयान ने उन चर्चाओं को और भी मजबूत कर दिया है कि आगामी बीएमसी चुनावों की घोषणा से पहले महायुति (बीजेपी-शिंदे-अजित पवार) ठाकरे गुट को पूरी तरह से पंगु बना देना चाहती है।
देश के सबसे बड़े नगर निगम पर पड़ेगा सीधा असर
मुंबई नगर निगम न केवल भारत का सबसे अमीर और बड़ा स्थानीय निकाय है, बल्कि यह शिवसेना यूबीटी की रीढ़ की हड्डी माना जाता है। यहाँ के राजनीतिक समीकरणों में होने वाले किसी भी मामूली बदलाव का सीधा असर न केवल शिवसेना के दोनों गुटों के अस्तित्व पर पड़ेगा, बल्कि आगामी महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2026 की पूरी दिशा और दशा को भी बदल देगा। बीएमसी में सत्ता हासिल करने या सरकार बनाने के मौजूदा गुप्त प्रयासों में यह संभावित विभाजन बेहद निर्णायक और गेम-चेंजर साबित होने वाला है, जिसने उद्धव ठाकरे के रणनीतिकारों की रातों की नींद उड़ा दी है।
