पूर्व राज्यपाल और शिक्षाविद पद्मश्री डॉ. डीवाई पाटिल का निधन, कोल्हापुर में होगा अंतिम संस्कार
DY Patil Passed Away: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, पूर्व राज्यपाल और शिक्षाविद पद्मश्री डॉ. डी. वाय. पाटिल का कोल्हापुर में 90 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन से राजनीतिक व शैक्षणिक जगत में शोक है।
- Written By: आकाश मसने
डॉ. डी. वाई. पाटिल (सोर्स: सोशल मीडिया)
Former Governor DY Patil Passed Away: महाराष्ट्र के राजनीतिक, सामाजिक और शैक्षणिक जगत के पुरोधा, पूर्व राज्यपाल और पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित डॉ. ज्ञानदेव यशवंतराव पाटिल उर्फ डॉ. डी. वाई. पाटिल का 90 वर्ष की आयु में कोल्हापुर में निधन हो गया। वे पिछले कुछ महीनों से अस्वस्थ चल रहे थे। डॉ. डी. वाई. पाटिल के निधन की खबर से पूरे महाराष्ट्र सहित देश के शैक्षणिक और राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है।
डॉ. डी. वाई. पाटिल एक ऐसी शख्सियत थे, जिन्होंने एक साधारण किसान परिवार से निकलकर राजभवन तक का सफर तय किया और देश में उच्च शिक्षा का एक विशाल साम्राज्य स्थापित किया। उनके द्वारा स्थापित ‘डी. वाई. पाटिल ग्रुप’ ने देश-विदेश के लाखों विद्यार्थियों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के द्वार खोले।
अंतिम दर्शन और अंतिम संस्कार का कार्यक्रम
डॉ. डी. वाई. पाटिल का पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए बुधवार, 5 अगस्त को सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक कोल्हापुर के कसबा बावड़ा स्थित उनके आवास यशवंत निवास में रखा जाएगा। इसके बाद उनकी अंतिम यात्रा निकाली जाएगी। उनका अंतिम संस्कार कसबा बावड़ा स्थित डी. वाई. पाटिल मेडिकल कॉलेज के प्रांगण में संपन्न किया जाएगा।
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किसान परिवार से राजभवन तक का प्रेरणादायी सफर
22 अक्टूबर 1935 को कोल्हापुर जिले के एक छोटे से गांव ‘अंबाप’ में जन्मे डॉ. डी. वाई. पाटिल का शुरुआती जीवन बेहद संघर्षपूर्ण रहा। एक साधारण कृषक परिवार में जन्म लेने के बावजूद उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत, दूरदर्शिता और प्रशासनिक क्षमता के बल पर देश में अपनी अलग पहचान बनाई।
उन्होंने पूर्वोत्तर राज्य त्रिपुरा और बिहार के राज्यपाल के रूप में सफलतापूर्वक कार्यभार संभाला। इसके अलावा, उन्होंने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल पद का अतिरिक्त प्रभार भी पूरी निष्ठा के साथ संभाला। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने हमेशा शिक्षा, प्रशासनिक सुधार और सामाजिक कल्याणकारी उपक्रमों को प्राथमिकता दी।
कोल्हापुर के महापौर से दो बार के विधायक तक
राजनीतिक सफर की बात करें तो डॉ. डी. वाई. पाटिल ने बेहद कम उम्र में सार्वजनिक जीवन में कदम रखा था। वे 1957 से 1962 तक कोल्हापुर शहर के महापौर रहे। इसके बाद उन्होंने प्रत्यक्ष चुनावी राजनीति में प्रवेश किया और 1967 तथा 1972 के विधानसभा चुनावों में पन्हाला विधानसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में विधायक चुने गए।
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‘डी. वाई. पाटिल ग्रुप’ की स्थापना की
डॉ. डी. वाई. पाटिल का मानना था कि मजबूत शैक्षणिक संस्थाओं के निर्माण से ही श्रेष्ठ नागरिकों और विकसित समाज का निर्माण संभव है। इसी सोच के साथ उन्होंने 1983 में नवी मुंबई में ‘रामराव आदिक इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी’ (RAIT) नाम से अपने पहले इंजीनियरिंग कॉलेज की नींव रखी।
आज डी. वाई. पाटिल ग्रुप के अंतर्गत 7 से अधिक डिम्ड व प्राइवेट यूनिवर्सिटीज और 150 से अधिक शैक्षणिक संस्थान (मेडिकल, इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट और स्कूल) संचालित हो रहे हैं। शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान पद्मश्री से अलंकृत किया था।
