Lenskart विवाद पर भड़के नितेश राणे, बोले- कॉर्पोरेट में हिजाब-बुर्का मंजूर तो तिलक-बिंदी पर रोक क्यों?
Nitesh Rane Statement: लेंसकार्ट के तिलक-बिंदी विवाद पर मंत्री नितेश राणे ने जमकर हमला बोला है। कॉर्पोरेट जगत में धार्मिक भेदभाव के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए हिजाब-बुर्का पर बैन की मांग की है।
- Written By: आकाश मसने
नितेश राणे (सोर्स: सोशल मीडिया)
Nitesh Rane On Lenskart Controversy: महाराष्ट्र की राजनीति में अपने बयानों के लिए जाने जाने वाले भाजपा नेता और मंत्री नितेश राणे ने अब कॉर्पोरेट जगत के ‘ड्रेस कोड’ पर बड़ा हमला बोला है। हाल ही में आईवियर ब्रांड ‘लेंसकार्ट’ (Lenskart) के स्टोर पर काम करने वाले कर्मचारियों को बिंदी, तिलक और अन्य धार्मिक पहचान वाले प्रतीकों को धारण करने से मना करने की बात सामने आई थी। इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए नितेश राणे ने समानता और धार्मिक स्वतंत्रता का मुद्दा उठाया है।
क्या बोले नितेश राणे?
मीडिया से बात करते हुए नितेश राणे ने तीखे स्वर में कहा कि हम भी ईश्वर में विश्वास रखते हैं, लेकिन कॉर्पोरेट सेक्टर का यह दोहरा रवैया समझ से परे है। एक तरफ कॉर्पोरेट दफ्तरों में हिजाब और बुर्का पहनने की अनुमति दी जाती है, वहीं दूसरी तरफ तिलक लगाकर आने वाले हिंदुओं को टोका जाता है। यह भेदभाव क्यों?
#WATCH | Mumbai: On corporate dress code row, Maharashtra Minister Nitesh Rane says, “… We too believe in God. But why should corporate sectors permit the hijab and burqa, while the tilak is not allowed? If one religion’s practices are restricted, then others should be treated… pic.twitter.com/LNK3mWDLvZ — ANI (@ANI) April 22, 2026
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उन्होंने आगे कहा कि यदि किसी एक धर्म की प्रथाओं पर पाबंदी लगाई जा रही है, तो सभी धर्मों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए। राणे ने शिक्षण संस्थानों का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह स्कूलों और कॉलेजों में हिजाब और बुर्के की अनुमति को लेकर लंबी बहस हुई और कई जगह नियम बनाए गए, ठीक वैसे ही कॉर्पोरेट जगत में भी अनुशासन और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए इन पर प्रतिबंध लगना चाहिए।
समानता का अधिकार या सेलेक्टिव टारगेट?
नितेश राणे ने स्पष्ट किया कि नियमों का पालन सिलेक्टिव नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर कॉर्पोरेट कंपनियां चाहती हैं कि वहां केवल पेशेवर पहनावा ही रहे, तो यह नियम हर धर्म के व्यक्ति पर समान रूप से लागू होना चाहिए। केवल तिलक को निशाना बनाना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
यह भी पढ़ें:- तिलक विवाद के बाद बैकफुट पर लेंसकार्ट, ड्रेस कोड नियमों में बदलाव, सभी धर्मों के प्रतीकों को किया शामिल
क्या है पूरा विवाद?
दरअसल, बीते कुछ दिनों में Lenskart से जुड़ा एक पुराना आंतरिक दस्तावेज़ सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है। इस कथित पॉलिसी गाइड में कर्मचारियों की ग्रूमिंग से जुड़े कुछ ऐसे निर्देश बताए गए हैं, जिन पर लोगों ने कड़ी आपत्ति जताई है। आरोप है कि कंपनी ने अपने स्टोर कर्मचारियों को बिंदी, तिलक जैसे धार्मिक प्रतीकों के इस्तेमाल से रोकने की बात कही थी। जैसे ही यह दस्तावेज़ वायरल हुआ, लेंसकार्ट के खिलाफ बॉयकॉट की मांग उठने लगी। कई लोगों का मानना है कि भारत जैसे विविधता भरे देश में व्यक्तिगत धार्मिक पहचान पर इस तरह की रोक सही नहीं है। हालांकि विरोध और विवाद के बाद कंपनी ने माफी मांगते हुए अपनी इस कथित पॉलिसी को बदला।
