कॉर्पोरेट जिहाद को लेकर मंत्री नितेश राणे का विवादित बयान, बोले- मुस्लिमों नौकरी करने की अनुमति नहीं…
Nitesh Rane Statement: बीजेपी नेता नितेश राणे ने 'कॉर्पोरेट जिहाद' का मुद्दा उठाते हुए मुस्लिमों के आर्थिक बहिष्कार और जिहाद पीड़ितों के लिए विशेष सरकारी टोल-फ्री नंबर जारी करने की विवादित मांग की है।
- Written By: आकाश मसने
मंत्री नितेश राणे (सोर्स: सोशल मीडिया)
Nitesh Rane On Corporate Jihad: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी का तूफान खड़ा हो गया है। बीजेपी नेता और राज्य सरकार में मंत्री नितेश राणे ने नासिक TCS से सामने आए कथित सेक्स स्कैंडल और धर्मांतरण रैकेट के बाद बेहद तीखे और विवादास्पद बयान दिए हैं। राणे ने अब ‘कॉर्पोरेट जिहाद’ का मुद्दा उठाते हुए मुस्लिम समुदाय के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की वकालत की है।
कॉर्पोरेट नौकरियों पर प्रतिबंध की मांग
नितेश राणे ने सीधे तौर पर कहा कि अब वह समय आ गया है जब मुस्लिम समुदाय के लोगों को कॉर्पोरेट जगत में काम करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि ऐसा करने से ‘कॉर्पोरेट जिहाद’ जैसी संदिग्ध गतिविधियों पर लगाम लगाई जा सकेगी। राणे ने दावा किया कि कई हिंदू कर्मचारियों ने शिकायत की है कि कंपनियों के भीतर उनका शोषण किया जा रहा है और नौकरियों का इस्तेमाल एक खास एजेंडे के तहत ‘जिहाद’ के लिए हो रहा है।
आ रहा है ‘जिहाद पीड़ित’ टोल-फ्री नंबर
धर्मांतरण और शोषण के मामलों को रोकने के लिए राणे ने एक बड़ी घोषणा की। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र सरकार एक टोल-फ्री नंबर जारी करने की योजना बना रही है। इस नंबर के जरिए वे लोग अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे जो किसी भी प्रकार के ‘जिहाद’ (लव जिहाद, लैंड जिहाद या कॉर्पोरेट जिहाद) का शिकार हुए हैं। मंत्री ने भरोसा दिलाया कि शिकायत करने वालों की पहचान पूरी तरह से गोपनीय रखी जाएगी ताकि उन्हें किसी भी प्रकार के प्रतिशोध का डर न रहे।
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हिंदू राष्ट्र और आर्थिक बहिष्कार का आह्वान
नितेश राणे ने आर्थिक बहिष्कार के पुराने उदाहरणों का जिक्र करते हुए कहा कि पहले भी कुछ दुकानदारों ने मुस्लिमों से लेनदेन न करने का फैसला किया था। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर कंपनियां हिंदुओं को प्राथमिकता देंगी और उन्हें नौकरी देंगी, तो इससे ‘हिंदू राष्ट्र’ की नींव और अधिक मजबूत होगी।
राणे ने आगे कहा कि उनके पास विभिन्न माध्यमों से लोग पहुंच रहे हैं और कंपनियों में हो रहे शोषण की दास्तान सुना रहे हैं। उन्होंने साफ किया कि सरकार अब चुप नहीं बैठेगी और पीड़ितों को सीधे सहायता पहुंचाने के लिए तंत्र तैयार कर रही है। विपक्ष ने राणे के इस बयान पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि क्या यह बयान आने वाले चुनावों की ध्रुवीकरण की रणनीति का हिस्सा है।
