

NCP के दोनों गुटों के बीच किसी भी प्रकार के विलय की अटकलें खारिज कर दी गई हैं।
नसीम सिद्दीकी ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी इंडिया गठबंधन में मजबूती से खड़ी है।
चुनाव आयोग द्वारा दोबारा आवेदन का मौका देना पहले की प्रक्रिया में हुई गंभीर गलतियों को स्वीकार करना है।
Naseem Siddiqui Says No Merger In NCP: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) ने एनसीपी के दोनों गुटों के संभावित विलय की अटकलों को खारिज कर दिया है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता नसीम सिद्दीकी ने स्पष्ट किया कि दोनों दलों के बीच किसी तरह का विलय नहीं होने जा रहा है।
नसीम सिद्दीकी ने कहा कि प्रफुल्ल पटेल और शरद पवार के बीच मुलाकात या बातचीत को विलय की तैयारी के तौर पर देखना सही नहीं है। उनकी पार्टी की विचारधारा धर्मनिरपेक्ष है और वह इंडिया गठबंधन के साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने यह भी साफ किया कि पार्टी एनडीए में शामिल नहीं होगी।
सिद्दीकी के मुताबिक, एनसीपी के दोनों गुटों के एक होने को लेकर चल रही चर्चाओं का वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि किसी दूसरे दल का नेता या कार्यकर्ता राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) में शामिल होना चाहता है, तो उसका स्वागत किया जाएगा। उन्होंने भाजपा का मुकाबला करने वाले प्रमुख नेताओं में राहुल गांधी और शरद पवार का नाम भी लिया।
प्रफुल्ल पटेल और शरद पवार की मुलाकात को लेकर जारी वीडियो तथा इस मुलाकात पर पवार की सहमति से जुड़े सवाल पर सिद्दीकी ने कहा कि पटेल अनुभवी राजनीतिज्ञ हैं। यदि दो वरिष्ठ नेता किसी मुद्दे पर मिलकर चर्चा करते हैं, तो इसमें असामान्य कुछ नहीं है।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक मुलाकातों में देश की प्रगति, राज्य की खुशहाली और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर भी बातचीत हो सकती है। इसलिए हर मुलाकात को दोनों गुटों के विलय से जोड़ना उचित नहीं है। सिद्दीकी ने दोहराया कि उनकी पार्टी पहले भी स्पष्ट कर चुकी है कि विलय नहीं होगा।
मतदाता सूची से हटाए गए लोगों को दोबारा आवेदन का अवसर देने के चुनाव आयोग के फैसले पर भी सिद्दीकी ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह फैसला बताता है कि पहले की प्रक्रिया में गंभीर गलतियां हुई थीं।
सिद्दीकी ने आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए और उन्हें उनके मतदान के अधिकार से वंचित किया गया। उनके मुताबिक, अब दोबारा आवेदन का मौका देना पहले की प्रक्रिया में हुई गलतियों को स्वीकार करने जैसा है। उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए चुनाव आयुक्तों से इस्तीफा देने की मांग की।
SIR के खिलाफ सीजेपी के विरोध-प्रदर्शन पर सिद्दीकी ने कहा कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित तौर पर गलत एफआईआर दर्ज किए जाने, लोगों को हाउस अरेस्ट करने और महिलाओं को प्रताड़ित किए जाने जैसी घटनाओं से असंतोष बढ़ रहा है।
उन्होंने दावा किया कि एनजीओ, किसान और मजदूर सहित समाज के अलग-अलग वर्ग सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। सिद्दीकी ने उम्मीद जताई कि यह विरोध-प्रदर्शन सफल होगा। उन्होंने इसे सरकार के खिलाफ बढ़ते जनआक्रोश का संकेत बताते हुए कहा कि सरकार की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की ओर से राहुल गांधी और परिवारवाद की राजनीति पर की गई टिप्पणियों को लेकर भी सिद्दीकी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने नितिन नवीन की राष्ट्रीय स्तर की राजनीतिक छवि पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें पहले अपनी राजनीतिक समझ और अनुभव बढ़ाना चाहिए।
सिद्दीकी ने कहा कि राहुल गांधी लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और इंडिया गठबंधन के महत्वपूर्ण नेता हैं। ऐसे में नितिन नवीन को उनके बारे में टिप्पणी करने से पहले अपनी जिम्मेदारी और राजनीतिक हैसियत को समझना चाहिए।
राहुल गांधी पर अराजकता फैलाने के लिए टूलकिट की तरह इस्तेमाल किए जाने और नक्सलवादी सोच रखने वाले लोगों से जुड़े आरोपों पर सिद्दीकी ने भाजपा और आरएसएस पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भाजपा को राजनीतिक नुकसान होता दिखाई देता है, तब विदेशी फंडिंग और अराजकता जैसे मुद्दे उठाए जाते हैं।
सिद्दीकी ने भाजपा पर पलटवार करते हुए अमेरिका और इजरायल के प्रभाव में नीतियां बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने ईरान से सस्ता तेल खरीदने के बजाय अमेरिका से महंगे दाम पर तेल खरीदने के मुद्दे पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि ऐसे में एजेंट किसे कहा जाना चाहिए?
राजीव गांधी फाउंडेशन में विदेशों से पैसा आने के नितिन नवीन के आरोपों को भी नसीम सिद्दीकी ने खारिज किया। उन्होंने कहा कि किसी भी मुद्दे पर बयान देने से पहले उसका अध्ययन करना जरूरी है। उनके मुताबिक, विदेश नीति और राजनीति जैसे विषयों पर बिना पर्याप्त जानकारी के टिप्पणी करना उचित नहीं है।
इस तरह सिद्दीकी ने एनसीपी के दोनों गुटों के विलय की संभावनाओं को नकारते हुए पार्टी की धर्मनिरपेक्ष विचारधारा और इंडिया गठबंधन के साथ बने रहने का रुख दोहराया।