Navi Mumbai: सानपाड़ा अंडरपास को हाई कोर्ट की मंजूरी, ट्रैफिक जाम से मिलेगी राहत
Bombay High Court ने नवी मुंबई के सानपाड़ा-सोनखार सेक्टर 19 अंडरपास को मंजूरी दे दी है। परियोजना से पाम बीच रोड के दैनिक ट्रैफिक जाम से राहत मिलेगी। मनपा और स्थानीय नेताओं की 9 साल की कोशिश सफल हुई।
- Written By: अपूर्वा नायक
बंबई उच्च न्यायालय (सोर्स: सोशल मीडिया)
Navi Mumbai News In Hindi: हाई कोर्ट ने नवी मुंबई के सानपाड़ा-सोनखार के सेक्टर 19 में केसर सॉलिटेयर से गाड़ियों के लिए अंडरपास बनाने की अनुमति दे दी है, इससे सानपाड़ा में लगने वाला ट्रैफिक जाम जल्द ही हल हो जाएगा।
सानपाड़ा विभाग की पूर्व नगरसेविका वैजयंती दशरथ भगत और रूपाली भगत ने लगातार मनपा और वन विभाग से अपनी मांगें रखीं थीं। जनहित में लिए गए इस फैसले के कारण दोनों पूर्व नगरसेविकाओं ने हाई कोर्ट और राज्य के वन मंत्री गणेश नाईक का खास आभार जताया है। इस मामले में तेजी से कार्रवाई करने वाले नवी मुंबई मनपा के आयुक्त डॉ। कैलाश शिंदे का भी आभार जताया है।
मुंबई हाई कोर्ट से मिली इजाजत से अब नवी मुंबई महानगरपालिका को बिना फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की आपत्ति के यहां अंडरपास बनाने का रास्ता साफ हो गया है। इसके लिए वैजयंती भगत और रूपाली भगत की कुल 9 सालों की अथक कोशिश।
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सानपाड़ा के लोगों से किया था वादा
पूर्व विरोधी पक्ष नेता दशरथ भगत के मार्गदर्शन में साल 2015 के चुनाव घोषणा पत्र में दोनों ने इसके लिए सानपाड़ा के लोगों से किया वादा पूरा किया था, जिसमें सफलता मिली है। इस अंडरपास के बनने पर सोनखार-पाम बीच विभाग के सेक्टर 1, 13 से 19 के निवासियों के साथ-साथ सानपाड़ा गांव के निवासियों, पूरे सानपाड़ा नोड में सेक्टर 2 से सेक्टर 11 के निवासियों के साथ-साथ जुईनगर के निवासियों को अब पाम बीच से सटे मोराज सोसायटी के सामने चौराहे पर रोजाना लगने वाले ट्रैफिक जाम से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाएगी।
नवी मुंबई मनपा ने दायर की थी याचिका
गौरतलब है कि अंडरपास उक्त प्रोजेक्ट सीआरजेड के एरिया में आता है, इसलिए इसके कंस्ट्रक्शन के लिए मुंबई हाई कोर्ट की इजाजत जरूरी थी। इस संबंध में नवी मुंबई महानगरपालिका ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।
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जिस पर चीफ जस्टिस चंद्रशेखर और जस्टिस गौतम अंखड की बेंच के सामने सुनवाई हुई। कोर्ट ने कहा कि प्रोजेक्ट के लिए कोई मैंग्रोव जंगल नहीं काटा जाएगा और सीआरजेड एक्ट का कोई उल्लंघन नहीं होगा। बता दें कि इस प्रोजेक्ट का टेंडर 2 साल पहले हुआ था। मनपा को सिर्फ कोर्ट के फैसले का इंतजार था।
