Watermelon Death Case: डॉ. पालवे का खुलासा, जिंक फॉस्फाइड की दुर्गंध इसकी पहचान, फिर कैसे हुआ हादसा?

Mumbai News: डॉ. तुषार पालवे ने मुंबई के पायधुनी मौत मामले में जिंक फॉस्फाइड के जहरीले प्रभाव पर जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि तरबूज जैसे खाद्य पदार्थ के बिना इस जहर का सेवन करना बेहद कठिन है।
Watermelon Death Case: Dr. Palve Reveals—The Pungent Odor of Zinc Phosphide Is Its Signature; How, Then, Did the Tragedy Occur?
वॉटरमेलोन डेथ केस (सोर्स: डिजाइन फोटो)
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Watermelon Death Case Update: दक्षिण मुंबई के पायधुनी इलाके में एक ही परिवार के चार लोगों की संदिग्ध मौत के मामले में मेडिकल विशेषज्ञों ने चौंकाने वाले तथ्य सामने रखे हैं। कामा एंड अल्बलेस अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक और ग्रांट मेडिकल कॉलेज (GMC) के वाइस डीन डॉ. तुषार पालवे ने इस घटना के पीछे जिंक फॉस्फाइड (Zinc Phosphide) की भूमिका पर प्रकाश डाला है।

जिंक फॉस्फाइड, एक घातक जहर

डॉ. तुषार पालवे ने स्पष्ट किया कि यदि तरबूज में जिंक फॉस्फाइड की बड़ी मात्रा मौजूद थी, तो यह स्पष्ट रूप से पॉइजनिंग का मामला है। जिंक फॉस्फाइड आमतौर पर चूहों को मारने के लिए कीटनाशक के रूप में उपयोग किया जाता है और यह मानव शरीर के लिए अत्यंत घातक है।

तरबूज के साथ सेवन का कारण

डॉ. पालवे ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण तकनीकी बात बताई। उन्होंने कहा, जिंक फॉस्फाइड की अपनी एक बहुत तेज और खराब गंध (Foul Smell) होती है। इसलिए, किसी भी व्यक्ति के लिए इसे सीधे या बिना किसी खाद्य पदार्थ में मिलाए सेवन करना बहुत मुश्किल है।

उनके अनुसार, तरबूज जैसे मीठे और पानी वाले फल में इसे मिला देने से शायद इसकी गंध छिप गई होगी या परिवार को इसका एहसास नहीं हुआ होगा। यह दर्शाता है कि जहर अनजाने में या किसी विशेष परिस्थिति में भोजन के माध्यम से ही शरीर में पहुँचा है।

जांच की दिशा

डॉ. पालवे के इस बयान के बाद अब जांच इस दिशा में मुड़ गई है कि क्या घर में चूहों को मारने के लिए रखे गए जहर का तरबूज से संपर्क हुआ था, या यह कोई अन्य मानवीय चूक थी। पुलिस अब विसरा रिपोर्ट और डॉ. पालवे के इन चिकित्सकीय इनपुट्स के आधार पर मामले की कड़ियाँ जोड़ रही है।

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