तरबूज बना मोहरा, इस जहर ने ली परिवार के 4 सदस्यों की जान, 11 दिन बाद उजागर हुआ मौत का सच

Watermelon Death News: मुंबई के पायधुनी में डोकाडिया परिवार के 4 सदस्यों की मौत का रहस्य सुलझा। FSL रिपोर्ट के अनुसार, मौत तरबूज से नहीं बल्कि चूहे मारने वाली दवा जिंक फॉस्फाइड से हुई है।
Watermelon Death Case: A cheerful nature and amiable demeanor... What did neighbors say about the Paydhuni family?
डोकाडिया परिवार की फोटो (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Pydhonie Family Death Case: दक्षिण मुंबई के पायधुनी इलाके में एक ही परिवार के चार सदस्यों की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने पूरी आर्थिक राजधानी को झकझोर कर रख दिया था। पिछले 11 दिनों से पुलिस और स्वास्थ्य विभाग इस गुत्थी को सुलझाने में लगे थे कि क्या वाकई तरबू' खाने से किसी की जान जा सकती है? अब इस मामले में कलिना स्थित फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) ने अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप दी है, जिसने पूरी जांच की दिशा ही बदल दी है। रिपोर्ट में यह स्पष्ट हो गया है कि डोकाडिया परिवार की मौत का कारण तरबूज नहीं, बल्कि चूहे मारने के लिए इस्तेमाल होने वाला घातक रसायन 'जिंक फॉस्फाइड' (Zinc Phosphide) था।

क्या है पूरा घटनाक्रम?

घटना की शुरुआत 25 अप्रैल की रात को हुई थी, जब डोकाडिया परिवार ने रात के खाने के बाद तरबूज खाया। कुछ ही घंटों के भीतर परिवार के मुखिया अब्दुल्ला डोकाडिया (44), उनकी पत्नी नसरीन (35) और दो बेटियों आयशा (16) व जैनब (13) को गंभीर उल्टियां, पेट दर्द और चक्कर आने लगे। 26 अप्रैल की सुबह तक स्थिति इतनी बिगड़ गई कि दोनों बेटियां बेहोश हो गईं। आनन-फानन में पूरे परिवार को जेजे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वहां पहुंचने पर एक बेटी को मृत घोषित कर दिया गया और देखते ही देखते कुछ ही घंटों के भीतर माता-पिता और दूसरी बेटी ने भी दम तोड़ दिया।

कलिना FSL की जांच और जिंक फॉस्फाइड का खुलासा

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए कलिना एफएसएल के निदेशक डॉ. विजय ठाकरे के नेतृत्व में विशेषज्ञों की एक विशेष टीम गठित की गई थी। जांच की शुरुआत में टीम के सामने बड़ी चुनौती थी, क्योंकि पीड़ितों को बहुत अधिक उल्टियां हुई थीं, जिससे शरीर के भीतर जहर के अवशेष (Toxin traces) मिलना अत्यंत कठिन हो गया था। हालांकि, विशेषज्ञों ने हार नहीं मानी और कई दिनों तक चले वैज्ञानिक परीक्षणों के बाद यह पाया कि मृतकों के शरीर में और उनके द्वारा खाए गए तरबूज के नमूनों में 'जिंक फॉस्फाइड' के अंश मौजूद थे। यह एक ऐसा रसायन है जिसका उपयोग आमतौर पर कीटनाशक और चूहे मारने वाली दवाओं में किया जाता है। इसकी थोड़ी सी मात्रा भी इंसानी शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को विफल (Organ failure) करने के लिए पर्याप्त होती है।

पुलिस के सामने खड़े हुए नए सवाल

फॉरेंसिक रिपोर्ट ने यह तो साफ कर दिया कि मौत का कारण तरबूज की कोई प्राकृतिक खराबी नहीं थी, लेकिन अब पायधुनी पुलिस के सामने असली चुनौती यह पता लगाना है कि यह जहर तरबूज तक पहुँचा कैसे? पुलिस अब निम्नलिखित बिंदुओं पर जांच केंद्रित कर रही है।

  • दुर्घटना या लापरवाही: क्या घर में चूहे मारने की दवा का छिड़काव किया गया था और गलती से वह फल के संपर्क में आ गई?
  • सामूहिक आत्महत्या: क्या परिवार ने किसी तनाव के चलते खुद यह घातक कदम उठाया?
  • साजिश या हत्या: क्या किसी बाहरी व्यक्ति ने जानबूझकर तरबूज में जहर मिलाया था?

समाज के लिए चेतावनी

इस रिपोर्ट के आने के बाद मुंबईकरों के मन से तरबूज को लेकर फैला डर तो कम हुआ है, लेकिन घर में रखे जाने वाले कीटनाशकों के प्रति सावधानी बरतने की चेतावनी भी मिली है। पायधुनी पुलिस अब डोकाडिया परिवार के कॉल रिकॉर्ड्स, पड़ोसियों के बयान और घर की तलाशी के आधार पर इस गुत्थी के अंतिम सिरे तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। फिलहाल, इलाके में तनावपूर्ण शांति है और हर कोई पुलिस के अगले कदम का इंतजार कर रहा है।

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