मुंबई के विद्याविहार में 23 फीट के गणपति बप्पा का दरबार, मन्नत पूरी होने पर भक्त खुद बैठाते हैं मूर्ति

Mumbai Vidya Vihar Ganpati: मुंबई के विद्याविहार में 36 साल पुराने ॐ साई मित्र मंडल के विद्याविहारचा विघ्नहर्ता की 23 फीट प्रतिमा आकर्षण है। मन्नत पूरी होने पर भक्त खुद बप्पा बैठाते हैं।
Mumbai Vidya Vihar Ganpati 36 Year Old Tradition
विद्याविहारचा गणपति(फोटो नवभारत)
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36 Year Old Tradition Of Vidya Vihar Ganpati: मुंबई के विद्याविहार स्थित किरोल विलेज में गणेशोत्सव के दौरान आस्था और श्रद्धा का एक अनोखा नजारा देखने को मिल रहा है। यहां वर्ष 1991 में स्थापित ॐ साई मित्र मंडल सार्वजनिक गणेश उत्सव मंडल के गणपति बप्पा पिछले 36 वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बने हुए हैं।

मंडल की स्थापना हरीश जावले द्वारा की गई थी।भक्तों के बीच यह गणपति ‘विद्याविहारचा विघ्नहर्ता’ के नाम से भी प्रसिद्ध हैं। यहां आने वाले श्रद्धालुओं की मान्यता है कि बप्पा के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई मन्नत पूरी होती है। इसी विश्वास के चलते हर वर्ष गणेशोत्सव के दौरान यहां दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

इस वर्ष मंडल की ओर से 23 फीट ऊंची गणपति बप्पा की भव्य और मनमोहक प्रतिमा स्थापित की गई है। प्रतिमा के दर्शन के लिए सुबह से देर रात तक श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी हुई है। गणपति की भव्यता के साथ-साथ मंडल की वर्षों पुरानी परंपरा भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।

Mumbai Vidya Vihar Ganpati 36 Year Old Tradition Of Devotees
विद्याविहारचा विघ्नहर्ता(फोटो नवभारत)

स्वामी समर्थ की थीम पर सजा भव्य पंडाल

इस वर्ष मंडल का पूरा पंडाल स्वामी समर्थ भगवान की थीम पर तैयार किया गया है।पंडाल में गणपति बप्पा की 23 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा के ऊपर स्वामी समर्थ भगवान को लेटे हुए स्वरूप में दर्शाया गया है। थीम आधारित सजावट, रोशनी और भव्य गणपति प्रतिमा श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित कर रही है। दर्शन के साथ ही श्रद्धालु पंडाल की सजावट देखने के लिए भी बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं।

प्रकाश मेहता प्रमुख मार्गदर्शक

ॐ साई मित्र मंडल के प्रमुख मार्गदर्शक पूर्व मंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता प्रकाश मेहता हैं।मंडल से जुड़े पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की ओर से गणेशोत्सव को व्यवस्थित एवं भक्तिमय वातावरण में आयोजित करने के लिए विशेष तैयारियां की गई हैं।

मन्नत पूरी होने पर भक्त खुद बैठाते हैं बप्पा

ॐ साई मित्र मंडल की सबसे खास और अनोखी परंपरा यह है कि यहां गणपति की मूर्ति मंडल द्वारा खरीदी नहीं जाती मंडल से जुड़े पदाधिकारियों के अनुसार, जिस भक्त की मनोकामना पूरी होती है, वही श्रद्धालु अगले वर्ष अपने खर्च से गणपति की मूर्ति स्थापित करता है। यह परंपरा पिछले करीब 30 वर्षों से लगातार चली आ रही है। भक्त अपनी मन्नत पूरी होने के बाद बप्पा के प्रति आभार व्यक्त करते हुए मूर्ति स्थापना का संपूर्ण खर्च स्वयं उठाते हैं।

इस परंपरा के कारण मंडल में हर वर्ष गणपति स्थापना को लेकर भक्तों में विशेष उत्साह रहता है। मंडल के पदाधिकारियों के अनुसार, इस वर्ष की गणपति प्रतिमा के मूर्तिदाता मंडल के उत्सव प्रमुख सचिन पवार हैं। उनकी ओर से बप्पा की प्रतिमा की स्थापना का खर्च उठाया गया है।

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बप्पा के दरबार में आभूषण भी चढ़ाते हैं भक्त

‘विद्याविहारचा विघ्नहर्ता’ के प्रति श्रद्धालुओं की श्रद्धा केवल दर्शन और पूजा तक सीमित नहीं है भक्त अपनी क्षमता और श्रद्धा के अनुसार सोने-चांदी के आभूषण और अन्य वस्तुएं भी बप्पा को अर्पित करते हैं।

मंडल के सदस्यों के अनुसार, वर्षों से श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए आभूषणों की संख्या काफी अधिक हो गई है। बप्पा को गणेशोत्सव के दौरान जो आभूषण पहनाए जाते हैं, वे श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित किए गए हैं इसके अलावा भक्त भगवान के लिए वस्त्र भी श्रद्धा से भेंट करते हैं।

एक धागा नवसाचा से भी जुड़ी भक्तों की आस्था

मंडल में पिछले दो वर्षों से ‘एक धागा नवसाचा’ की परंपरा भी शुरू की गई है। इसके तहत श्रद्धालु अपनी मनोकामना लेकर बप्पा के दरबार में आते हैं और धागा बांधकर मन्नत मांगते हैं।भक्तों का विश्वास है कि बप्पा के सामने सच्चे मन से मन्नत मांगकर बांधा गया यह धागा उनकी मनोकामना पूरी होने का प्रतीक बनता है। मन्नत पूरी होने के बाद कई श्रद्धालु दोबारा यहां आकर बप्पा का आभार व्यक्त करते हैं।

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दुबई से मन्नत पूरी होने पर पहुंचीं गायत्री

इस गणेशोत्सव में देश ही नहीं, बल्कि विदेश से भी श्रद्धालुओं के पहुंचने की जानकारी मंडल के सदस्यों ने दी। गायत्री नामक एक महिला दुबई से विशेष रूप से बप्पा के दर्शन के लिए पहुंचीं।गायत्री की मन्नत पूरी होने के बाद उन्होंने विद्याविहार पहुंचकर बप्पा के दर्शन किए।

उनका कहना था कि मनोकामना पूरी होने के बाद बप्पा के दरबार में आकर दर्शन करना उनके लिए श्रद्धा और कृतज्ञता का विषय है। इसी तरह अहमदनगर से भी एक महिला श्रद्धालु मन्नत पूरी होने के बाद बप्पा के दर्शन के लिए पहुंचीं दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं की ऐसी कहानियां इस गणपति के प्रति लोगों की गहरी आस्था को दर्शाती हैं।

उत्सव प्रमुख सचिन पवार का कहना है कि गणपति बप्पा के दरबार में कोई मन्नत लेकर आता है, कोई मन्नत पूरी होने के बाद आभार व्यक्त करने आता है। और कोई अपनी श्रद्धा के अनुसार आभूषण या वस्त्र अर्पित करता है। इसी विश्वास और भावना के कारण विद्याविहार के किरोल विलेज में विराजमान गणपति को भक्तों ने प्यार से नाम दिया है।

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