

25 Year Urban Development Plan: ऑरिक और शेंद्रा-बिडकिन औद्योगिक क्षेत्र में बड़े निवेश की संभावनाओं के बीच छत्रपति संभाजीनगर तेजी से औद्योगिक केंद्र के रूप में उभर रहा है। नई कंपनियों के साथ रोजगार, आबादी और वाहनों की संख्या बढ़ेगी।
इसका सीधा असर आवास, यातायात, पानी, सार्वजनिक परिवहन और अन्य नागरिक सुविधाओं पर पड़ेगा। ऐसे में शहर के विस्तार को केवल सड़कों और इमारतों तक सीमित रखने के बजाय अगले 20 से 25 वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखकर समग्र विकास योजना तैयार करने की जरूरत है।
शेंद्रा-बिडकिन में उद्योगों के विस्तार के साथ कामगारों, अधिकारियों, उद्यमियों और सेवा क्षेत्र से जुड़े लोगों की आवाजाही बढ़ेगी। औद्योगिक क्षेत्र और शहर के बीच आवागमन बढ़ने से प्रमुख मार्गों पर दबाव आना स्वाभाविक है। इसलिए अभी से यातायात का वैज्ञानिक अध्ययन कर रिंग रोड, प्रमुख मार्गों, पार्किंग और सार्वजनिक परिवहन का एकीकृत ढांचा तैयार करना होगा।
भविष्य की यात्री संख्या को ध्यान में रखते हुए मेट्रो, बस आधारित तेज परिवहन व्यवस्था अथवा अन्य उच्च क्षमता वाली सार्वजनिक परिवहन प्रणाली की संभावनाओं का भी अध्ययन जरूरी है। यातायात जाम गंभीर होने के बाद समाधान खोजने के बजाय औद्योगिक विस्तार के साथ परिवहन ढांचा तैयार करना अधिक प्रभावी होगा।
औद्योगिक विस्तार के साथ शहर का ढांचा किस तरह बदल सकता है, इसका अनुभव पिंपरी-चिंचवड़ से लिया जा सकता है। बड़े मार्गों के साथ सार्वजनिक परिवहन, पैदल यात्रियों के लिए सुविधाएं, साइकिल मार्ग और सार्वजनिक स्थानों का विकास वहां शहरी व्यवस्था का हिस्सा बना। छत्रपति संभाजीनगर की भौगोलिक और ऐतिहासिक परिस्थितियां अलग हैं, इसलिए यहां स्थानीय जरूरतों के अनुरूप विकास मॉडल तैयार करना होगा।
शहर में बढ़ते निर्माण के साथ धूल की समस्या भी बढ़ रही है। सड़क निर्माण, खाली भूखंडों और भवन निर्माण से उड़ने वाली धूल पर नियंत्रण के लिए निर्माण स्थलों पर नियमों का पालन, नियमित सफाई, सड़क किनारे हरियाली और उचित जल निकासी जरूरी है।
फुटपाथ अतिक्रमण और अनियोजित पार्किंग से मुक्त होने चाहिए। लगातार और सुरक्षित पैदल मार्ग के साथ बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों और दिव्यांगों की जरूरतों को ध्यान में रखना होगा। साइकिल मार्गों को भी भविष्य की परिवहन व्यवस्था का हिस्सा बनाया जा सकता है।
शहर के बढ़ते आकार के साथ महानगरपालिका की आर्थिक क्षमता बढ़ाना भी आवश्यक होगा। संपत्तियों का डिजिटल अभिलेख, नियमित पुनर्मूल्यांकन, कर आधार का विस्तार और प्रभावी राजस्व व्यवस्था से विकास कार्यों के लिए स्थायी संसाधन जुटाए जा सकते हैं। साथ ही करदाताओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना जरूरी होगा, ताकि कर व्यवस्था के प्रति नागरिकों का विश्वास बढ़े।
छत्रपति संभाजीनगर के पास उद्योग, पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य और ऐतिहासिक विरासत की मजबूत संभावनाएं हैं। ऑरिक और शेंद्रा-बिडकिन इन संभावनाओं को नई गति दे सकते हैं।
इसलिए अगले 20 से 25 वर्षों का ऐसा शहरी खाका जरूरी है, जिसमें उद्योग के साथ आवास, पानी, सीवेज, कचरा प्रबंधन, सार्वजनिक परिवहन, विद्यालय, अस्पताल, उद्यान और नागरिक सुविधाओं का संतुलित विकास हो।
अब चुनौती शहर को केवल बड़ा बनाने की नहीं, बल्कि औद्योगिक विकास के साथ उसे सुव्यवस्थित, सुगम, स्वच्छ और रहने योग्य बनाए रखने की है।