मुंबई, ठाणे और भिवंडी में यात्रियों की सुरक्षा रामभरोसे, मेट्रो कार्यस्थलों पर दुर्घटनाओं से दहशत
Mumbai Metro Accident: मुंबई, ठाणे और भिवंडी में मेट्रो निर्माण कार्य के दौरान लगातार हो रही दुर्घटनाओं से सड़क सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
- Written By: सूर्यप्रकाश मिश्र | Edited By: आंचल लोखंडे
Metro Line 4 Mumbai (सोर्सः सोशल मीडिया)
Mumbai News: मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर) में राज्य सरकार जहां मेट्रो नेटवर्क का विस्तार कर रही है, वहीं निर्माणाधीन मेट्रो रूट के नीचे लगातार हो रही दुर्घटनाओं से वाहनचालकों में भय का माहौल है। शनिवार को मुलुंड में मेट्रो पिलर का एक कंक्रीट स्लैब (पैरापेट) नीचे से गुजर रहे रिक्शा पर गिरने की दर्दनाक घटना के बाद, जिन इलाकों में मेट्रो का कार्य चल रहा है वहां नागरिकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
इस घटना के बाद मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) ने प्रथम दृष्टया ठेकेदार और कंसल्टेंट को लापरवाही का दोषी मानते हुए 6 करोड़ रुपये की पेनाल्टी लगाई है।
ट्रैफिक के साथ अब जान पर भी आफत
मुंबई के साथ ठाणे, घोड़बंदर और भिवंडी में चल रहे मेट्रो निर्माण कार्य के कारण जहां ट्रैफिक जाम आम बात हो गई है, वहीं अब लोगों की जान पर भी खतरा मंडरा रहा है। मुलुंड हादसे के बाद ड्राइवरों और यात्रियों की सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है।
सम्बंधित ख़बरें
गोंदिया में 4 महीनों में 136 सड़क हादसे, 80 लोगों की मौत, 16 ब्लैकस्पॉट बने हादसों के केंद्र
Bullet Train Project ने पकड़ी रफ्तार, देश की पहली अंडर सी टनल के लिए मशीनों ने संभाला मोर्चा
बांद्रा पूर्व की सियासी जंग: किरीट सोमैया को दिखे बांग्लादेशी, तो जीशान को मासूम… महायुति में तालमेल की कमी?
जवाहरनगर में टायर बदलते समय तेज रफ्तार ट्रक ने कुचला, 2 चालकों की मौत, 1 युवक गंभीर घायल
ठेकेदार व कंसल्टेंट पर 6 करोड़ रुपये की पेनाल्टी
वडाला से कासरवडावली तक प्रस्तावित मेट्रो लाइन-4 के निर्माण के दौरान पहले भी कई हादसे हो चुके हैं। ठाणे, घोड़बंदर और भिवंडी में निर्माणाधीन स्थलों के नीचे से गुजरते समय वाहनचालकों को डर का सामना करना पड़ रहा है।
सुरक्षा नियमों की अनदेखी
पिछले कुछ वर्षों से ठाणे, घोड़बंदर और भिवंडी में मेट्रो लाइन एवं स्टेशन निर्माण का कार्य जारी है। वाहनचालकों का आरोप है कि निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जा रही है, जिसके कारण दुर्घटनाएं हो रही हैं। रश आवर्स के दौरान भी निर्माण कार्य जारी रहता है, जब सड़कों पर भारी ट्रैफिक होता है। इससे न केवल जाम की समस्या बढ़ रही है, बल्कि जानलेवा हादसों का खतरा भी बढ़ गया है।
पहले भी हो चुके हैं हादसे
सितंबर 2025 में घोड़बंदर रोड के कापूरबावड़ी इलाके में एक कार पर लोहे की दो रॉड गिर गई थीं। एलिवेटेड मेट्रो मार्ग पर रखी गई ये रॉड कार के शीशे पर गिरीं, हालांकि बड़ा हादसा टल गया। इससे पहले भी कापूरबावड़ी क्षेत्र में ऐसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
30 जुलाई को तत्वज्ञान विद्यापीठ इलाके में एक कार पर लोहे की रॉड गिरने से चालक बाल-बाल बच गया। 2 मई को मेट्रो निर्माण में लगी एक क्रेन का हिस्सा कार पर गिर गया था, जिसमें परिवार सुरक्षित बच गया। भिवंडी में 5 अगस्त को सोनू अली रमजान अली शेख नामक युवक को मेट्रो लाइन में प्रयुक्त धातु की रॉड से सिर में चोट लग गई थी। इन घटनाओं से स्पष्ट है कि एलिवेटेड मेट्रो लाइन के नीचे सड़क पर दुर्घटना की आशंका लगातार बनी रहती है।
दिन-रात मंडराता खतरा
एमएमआरडीए द्वारा संबंधित ठेकेदारों को सुरक्षा मानकों का पालन करने के निर्देश दिए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उनका प्रभावी पालन होता नहीं दिख रहा। कई स्थानों पर सरिया और लोहे की सामग्री खुले में लटकती दिखाई देती है।
ये भी पढ़े: अमरावती में मजदूरों और किसानों का हल्लाबोल; निजीकरण के विरोध और MSP कानून की मांग को लेकर किया प्रदर्शन
अब मोटरसाइकिल, कार और अन्य वाहन चालक मेट्रो निर्माण स्थलों के नीचे से गुजरने में घबराहट महसूस कर रहे हैं। मुख्य सड़कों के बीचोंबीच मेट्रो पिलर खड़े कर निर्माण कार्य किया जा रहा है, जिससे दिन-रात खतरे की आशंका बनी रहती है। वाहनचालकों का कहना है कि अब ट्रैफिक के साथ-साथ ऊपर चल रहे निर्माण कार्य का खतरा भी सिर पर मंडराता रहता है।
