कॉन्सेप्ट फोटो (सोर्स: सोशल मीडिया)
Govandi BEST Bus Accident Case 2014: न्याय मिलने में देरी हो सकती है, लेकिन जब तथ्यों और सबूतों की बारी आती है, तो कानून की कसौटी पर सच्चाई की ही जीत होती है। मुंबई की एक सेशंस कोर्ट ने बृहन्मुंबई इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई एंड ट्रांसपोर्ट (BEST) के एक बस ड्राइवर सकाराम चिमाजी बांगर को बड़ी राहत देते हुए उसे 2014 के एक सड़क दुर्घटना मामले में बरी कर दिया है।
यह घटना 5 नवंबर, 2014 की है। सकाराम चिमाजी बांगर उस समय बस रूट नंबर 357 पर ड्यूटी पर तैनात थे। गोवंडी के शिवाजी नगर जंक्शन के पास बस की चपेट में आने से कुलसुम बानो नामक महिला घायल हो गई थी। अभियोजन पक्ष का आरोप था कि बांगर लापरवाही और तेज रफ़्तार से बस चला रहे थे, जिसके कारण यह हादसा हुआ।
इस मामले में 23 अक्टूबर, 2021 को कुर्ला मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट ने पीड़ित महिला और एक चश्मदीद गवाह के बयानों को आधार मानते हुए बेस्ट बस ड्राइवर सकाराम चिमाजी बांगर को दोषी करार दिया था। तब उन्हें एक महीने की जेल और 1,500 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई थी। इस फैसले के खिलाफ बांगर ने सेशंस कोर्ट में अपील की थी।
अपील पर सुनवाई करते हुए सेशंस कोर्ट ने पाया कि मामले में गवाहों के बयानों में काफी विरोधाभास है। कोर्ट ने इस बात पर गौर किया कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में विफल रहा कि ड्राइवर ने ट्रैफिक सिग्नल तोड़ा था या वह वास्तव में लापरवाही से गाड़ी चला रहा था।
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अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट रूप से कहा कि “किसी भी व्यक्ति को केवल अनुमान या संभावनाओं के आधार पर अपराधी नहीं ठहराया जा सकता। फौजदारी मामलों में दोष सिद्ध करने के लिए ठोस और पुख्ता सबूतों की आवश्यकता होती है।”
मुंबई की सेशंस कोर्ट ने आगे कहा कि गवाहों के बयान आपस में मेल नहीं खा रहे हैं, जिससे आरोपी को ‘संदेह का लाभ’ (Benefit of Doubt) मिलना चाहिए। इसी के साथ अदालत ने निचली अदालत के आदेश को रद्द करते हुए ड्राइवर को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया।