मीठी नदी घोटाला: पुलिस ने दाखिल की 7 हजार पन्नों की चार्जशीट, जानें पूरा मामला

Mumbai police : मीठी नदी घोटाले में मुम्बई पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पहले शहर में 9 ठिकानों की छानबीन की, 3 बीएमसी अधिकारी व 5 ठेकेदारों को रडार पर लिया और अब 7000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है।
मुम्बई पुलिस ने मीठी नदी घोटाले में 7 हजार पन्नों की दाखिल की चार्जशीट
मुम्बई नदी घोटाला
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Mithi River Scam: मुंबई में लगातार मीठी नदी सफाई घोटाला मामला सुर्खियों में बना हुआ है। पुलिस लगातार इस मामले में छानबीन कर रही है। सबसे पहले पुलिस की ईडी टीम ने शहर के नौ ठिकानों पर छापेमारी की, उसके बाद तीन बीएमसी अधिकारियों के साथ-साथ 5 ठेकेदारों को रडार पर लिया। अब सख्त निर्णय लेते हुए 7000 पन्नों की चार्जशीट भी दाखिल की है। हालांकि अदालत ने अभी तक मामले पर संज्ञान नहीं लिया है। पहले से गिरफ्तार दो आरोपी केतन कदम और जय जोशी के खिलाफ यह चार्जशीट दाखिल की गई है। साथ ही मामले में 11 अन्य लोगों को वांटेड बताया गया है। मामले में 15 गवाहों के बयान भी दर्ज किए गए हैं।

आरोप पत्र में कही गई यह बात

इस घोटाले में 65 करोड़ रूपए की हेराफेरी की जानकारी मिली है। आरोपियों पर इस योजना में 9 करोड़ रुपए कमीशन लेने का आरोप है। आरोप पत्र में ऐसा कहा गया है कि दोनों आरोपियों ने ठेकेदार भूपेंद्र पुरोहित के लिए वार्षिक सफाई टेंडर हासिल करने में बिचौलिए की भूमिका निभाई है। बीएमसी अधिकारियों के साथ मिलकर पुरोहित को टेंडर दिलाने की साजिश रची। मुम्बई पुलिस का यह भी दावा है कि कदम और जोशी घोटाले के तहत ये बिचौलिए फर्जी समझौता बनाने में शामिल भी थे।

'SIT रिपोर्ट के आधार पर दर्ज FIR'

जानकारी के मुताबिक पुलिस ने एसआईटी रिपोर्ट की जांच के आधार पर इस घोटाले में आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। मामले में SIT की टीम पिछले साल अगस्त में महाराष्ट्र विधानसभा मानसून सत्र के दौरान इससे संबंधित उठे सवालों के बाद गठित की गई। बीजेपी के विधान परिषद सदस्य प्रवीण दारकेकर और प्रसाद लाड ने मीठी नदी सफाई मामले में अनियमितता पर सवाल खड़े किए थे।

मामले में बड़े स्तर पर भष्ट्राचार

अधिकारियों के अनुसार मीठी नदी कार्रवाई में बड़े स्तर पर भष्ट्राचार किया गया है। जांच में पता चला है कि कुछ ठेकेदारों ने बीएमसी को झूठे कागज दिखाए। भरोसे में लेकर निकाली गई गाद को तय स्थानों पर डंप कर दिया है, जबकि असल में ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। मामले में पुलिस और एसआईटी की टीमें लगातार आरोपियों से जुड़े जगहों पर तलाशी अभियान चला रही हैं और इसकी गहन जांच जारी है। बीएमसी और मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MMRDA) ने इस 17.8 किमी लंबी परियोजना पर साल 2005 से अब तक कुल 1,300 करोड़ रुपये कैसे खर्च किए? इसकी जांच एसआईटी की टीम कर रही है।

(एजेंसी इनपुट)

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