

ऑरेंज गेट-मरीन ड्राइव सुरंग की खुदाई का 1 किलोमीटर काम पूरा।
7 किमी से लंबी दो समानांतर सुरंगें 52 मीटर गहराई तक बनेंगी।
परियोजना पूरी होने पर ऑरेंज गेट से मरीन ड्राइव का सफर 5 मिनट में होगा।
Orange Gate Marine Drive Underground Tunnel Project: मुंबई में यातायात को सुगम बनाने के उद्देश्य से बनाई जा रही ऑरेंज गेट-मरीन ड्राइव भूमिगत सड़क सुरंग परियोजना ने अहम उपलब्धि हासिल की है। परियोजना के तहत निर्माणाधीन सुरंग की खुदाई का एक किलोमीटर का काम पूरा हो गया है।
मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MMRDA) की इस परियोजना के पूरा होने के बाद ऑरेंज गेट से मरीन ड्राइव तक का सफर महज पांच मिनट में पूरा किया जा सकेगा।
इस परियोजना के तहत सात किलोमीटर से अधिक लंबाई की दो समानांतर भूमिगत सुरंगों का निर्माण किया जा रहा है। फिलहाल निर्माणाधीन सुरंग का संबंधित हिस्सा 3.45 किलोमीटर लंबा है। सुरंग जमीन के नीचे अधिकतम 52 मीटर की गहराई से गुजरेगी। इससे मुंबई के व्यस्त इलाकों के बीच यातायात का दबाव कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
इस परियोजना का निर्माण तकनीकी रूप से काफी चुनौतीपूर्ण है। सुरंग के रास्ते में मध्य रेलवे और पश्चिम रेलवे के रेल मार्गों के साथ मुंबई मेट्रो की लाइन-3 भी आती है।
ऐसे में खुदाई के दौरान मौजूदा परिवहन ढांचे की सुरक्षा सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है। निर्माण एजेंसियों को भूमिगत रेल मार्गों और आसपास के बुनियादी ढांचे पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों को ध्यान में रखकर काम करना पड़ रहा है।
मुंबई शहर के व्यस्त हिस्से से गुजरने वाली इस सुरंग के आसपास ऊंची इमारतें, मौजूदा सड़कें और बिजली-पानी जैसी आवश्यक सेवाओं का व्यापक नेटवर्क मौजूद है। खुदाई के दौरान इन संरचनाओं और सुविधाओं को नुकसान से बचाना बड़ी चुनौती है। इसके साथ ही निर्माण कार्य के दौरान सड़क यातायात और शहर की रोजमर्रा की गतिविधियों को सामान्य बनाए रखना भी जरूरी है।
सुरंग निर्माण के लिए विशेष टनल बोरिंग मशीन (TBM) का इस्तेमाल किया जा रहा है। मुंबई की तटीय जमीन की भूगर्भीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इस तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। मशीन की मदद से जमीन के नीचे नियंत्रित तरीके से खुदाई की जाती है, जिससे सतह पर होने वाली गतिविधियों और आसपास के ढांचे पर प्रभाव को कम करने में मदद मिलती है।
ऑरेंज गेट-मरीन ड्राइव सुरंग परियोजना पूरी होने के बाद दक्षिण मुंबई में सड़क संपर्क बेहतर होने और यात्रा समय घटने की उम्मीद है। इससे वाहन चालकों को व्यस्त सड़कों पर लगने वाले जाम से राहत मिल सकती है। हालांकि, परियोजना के वास्तविक लाभ निर्माण पूरा होने और सड़क शुरू होने के बाद सामने आएंगे।