Mumbai MTP Report 2025-26: मुंबई में एक साल में 20,552 गर्भसमापन, हर दिन औसतन 56 महिलाओं ने कराया MTP
Mumbai MTP Report 2025-26: मुंबई में वर्ष 2025-26 के दौरान 20,552 गर्भसमापन दर्ज किए गए। बीएमसी के आंकड़ों के अनुसार अधिकांश मामलों में गर्भनिरोधक साधनों की विफलता या गलत उपयोग जिम्मेदार रहा।
- Written By: अपूर्वा नायक
मुंबई MTP रिपोर्ट 2025 (सौ. सोशल मीडिया )
Mumbai MTP Report 2025-26 News: मुंबई में एमटीपी के आंकड़ों ने महानगर में परिवार नियोजन और प्रजनन स्वास्थ्य की जमीनी तस्वीर सामने रख दी है। बीएमसी के हेल्थ डिपार्टमेंट की से सूचना अधिकार के तहत दी गई जानकारी में बताया गया है कि वर्ष 2025-26 में एक साल के दौरान शहर में 20552 बार गर्भावस्था रोकी गई।
इस तरह औसतन हर घंटे 2 से अधिक और रोजाना 56 गर्भपात कराया गया। इनमें 18,966 मामलों में गर्भनिरोधक साधनों के असफल होने या उनके अनुचित उपयोग को प्रमुख कारण बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार 30 से 34 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं में सबसे अधिक 6416 गर्भ समापन दर्ज हुए, जबकि कुल मामलों में इस आयु वर्ग की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा रही।
मुंबई में परिवार नियोजन और प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियां अब भी बरकरार हैं। आरटीआई एक्टिविस्ट चेतन कोठारी द्वारा सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी में बीएमसी के स्वास्थ्य विभाग की मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी रिपोर्ट 2025- 26 के अनुसार महानगर में अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच कुल 20,552 एमटीपी दर्ज किए गए।
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इसी तरह करीब 92 प्रतिशत एमटीपी गर्भनिरोधक साधनों के असफल होने या उनके अनुचित उपयोग के कारण किए गए, रिपोर्ट के अनुसार 30 से 34 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं में सबसे अधिक 6,416 गर्भ समापन दर्ज हुए।
इसके बाद 25 से 29 वर्ष आयु वर्ग में 5,763 और 35 से 39 वर्ष आयु वर्ग में 3,946 मामले सामने आए, 20 से 24 वर्ष आयु वर्ग में 2,818 मामले दर्ज किए गए, जबकि 19 वर्ष से कम आयु की 365 किशोरियों ने भी गर्भसमापन कराया। 45 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में 135 मामले दर्ज हुए।
स्वाभाविक गर्भपात के मामलों में कमी
- रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025-26 में स्वाभाविक गर्भपात के 3,371 मामले दर्ज हुए। यह संख्या पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 में दर्ज 4,226 मामलों की तुलना में 855 कम है। वहीं कुल एमटीपी मामलों में भी 398 की कमी दर्ज की गई है।
- वर्ष 2024-25 में 20,950 एमटीपी हुए थे, जो 2025-26 में घटकर 20,552 रह गए। धर्म के आधार पर देखें तो कुल 20,552 मामलों में से 14,342 मामले हिंदू समुदाय से जुड़े थे। मुस्लिम समुदाय में 4,966, सिख समुदाय में 382, ईसाई समुदाय में 262 और अन्य समुदायों में 600 मामले दर्ज किए गए।
परिवार नियोजन की चुनौतियां बनीं प्रमुख कारण
- एमटीपी के कारणों का विश्लेषण बताता है कि अधिकांश मामलों में अनचाही गर्भावस्था परिवार नियोजन साधनों के प्रभावी उपयोग की कमी या उनकी विफलता के कारण हुई। इसके अलावा 358 मामलों में भ्रूण में गंभीर शारीरिक या मानसिक विकार की आशंका के चलते एमटीपी किया गया।
- 297 मामलों में महिला के मानसिक स्वास्थ्य, 254 मामलों में शारीरिक स्वास्थ्य और 219 मामलों में महिला के जीवन को खतरा होने के कारण एमटीपी कराया गया। बलात्कार के कारण गर्भधारण के 31 मामलों में भी एमटीपी किया गया, वार्डवार आंकडों पर नजर डाले तो के/ई वार्ड में सर्वाधिक 1,588 एमटीपी दर्ज किए गए।
- इसके बाद एन वार्ड में 1,460, एम/डब्ल्यू वार्ड में 1,426, आर/एस वार्ड में 1।415 और के/डब्ल्यू वार्ड में 1,390 मामले सामने आए। दूसरी ओर बी वार्ड में सबसे कम 118 और एवार्ड में 212 मामले दर्ज किए गए।
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मातृ मृत्यु के 2 मामले दर्ज
- एमटीपी के दौरान अथवा उसके बाद मातृ मृत्यु के वर्ष 2023-24 के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार कुल 2 महिलाओं को मृत्यु दर्ज की गई। इनमें एक महिला की आयु 19 से 25 वर्ष के बीच और दूसरी की आयु 36 वर्ष से अधिक थी।
- दोनों मृतक हिंदू समुदाय से थीं। बीएमसी के अनुसार इन आंकड़ों में मुंबई के अलावा अन्य स्थानों से रेफर होकर आए मामलों को भी शामिल किया गया है।
मुंबई से नवभारत लाइव के लिए धीरेंद्र उपाध्याय की रिपोर्ट
