अश्विनी भिड़े (सौ. सोशल मीडिया )
Mumbai Monsoon Flood Prevention: मुंबई महानगरपालिका आयुक्त का पदभार संभालते ही वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अश्विनी भिड़े ने मुंबईकरों से एक बड़ा वादा किया है। भिड़े ने मुंबईवासियों को विश्वास दिलाया है कि इस साल मानसून में मुंबई बरसाती बाढ़ में नहीं डूबेगी।
अश्विनी भिड़े ने मंगलवार को सेवानिवृत्त हुए भूषण गगराणी से मुंबई मनपा आयुक्त का पदभार ग्रहण किया। उन्होंने कहा कि मुंबई महानगरपालिका उनके लिए कोई नई जगह नहीं है।
कोविड महामारी के दौरान वे पालिका में अतिरिक्त आयुक्त के रूप में काम कर चुकी हैं, इसलिए आज आयुक्त पद की जिम्मेदारी संभालना उनके लिए ‘होम कमिंग’ यानी घर वापसी जैसा अनुभव है। मुंबई के लिए मानसून हमेशा से ही अग्निपरीक्षा साबित होता रहा है। 26 जुलाई 2005 की भयावह बाढ़ को मुंबईकर आज भी नहीं भूले हैं। जब पूरा शहर थम गया था।
इसके बाद भी 2017 और 2019 में हुई अतिवृष्टि ने बीएमसी के दावों की पोल खोली थी। हर साल ड्रेनेज सिस्टम का चौक होना और समुद्र में ऊंची लहरों (हाई टाइड) के दौरान बारिश के पानी का न निकल पाना, करोड़ों की संपत्ति के नुकसान और जनजीवन अस्त-व्यस्त होने का कारण बनता है।
ऐसे में नई कमिश्नर का यह आश्वासन जनता के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। मुंबई में हिंदमाता (दादर), सायन, माटुंगा, अंधेरी सबवे, मिलन सबवे, चेंबूर और कुर्ला जैसे इलाके ‘लो-लाइंग एरिया’ (निचले इलाके) होने के कारण सबसे पहले डूबते हैं।
उन्होंने कहा कि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का समन्वय ही विकास सुनिश्चित करता है। एक कुशल प्रशासक के रूप में भिड़े को कई तकनीकी चुनौतियों का सामना करना होगा। हाई टाइड और भारी बारिश का घातक संयोग ड्रेनेज सिस्टम को ठप कर देता है, ऐसे में पंपिंग स्टेशनों की निर्वाध कार्यप्रणाली सुनिश्चित करनी होगी। ब्रिटिश काल का ड्रेनेज नेटवर्क केवल 25 मिमी प्रति घंटे बारिश झेलने की क्षमता रखता है, जबकि 50 मिमी से अधिक बारिश होने पर जलभराव निश्चित है।
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