नई बीएमसी आयुक्त अश्विनी भिड़े का बड़ा दावा, इस मानसून मुंबई नहीं होगी जलमग्न
BMC Commissioner Ashwini Bhide Statement: मुंबई महानगरपालिका की नई आयुक्त अश्विनी भिड़े ने दावा किया है कि इस मानसून शहर में जलभराव नहीं होगा। उन्होंने जल निकासी व्यवस्था सुधारने का आश्वासन दिया है।
- Written By: अपूर्वा नायक
अश्विनी भिड़े (सौ. सोशल मीडिया )
Mumbai Monsoon Flood Prevention: मुंबई महानगरपालिका आयुक्त का पदभार संभालते ही वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अश्विनी भिड़े ने मुंबईकरों से एक बड़ा वादा किया है। भिड़े ने मुंबईवासियों को विश्वास दिलाया है कि इस साल मानसून में मुंबई बरसाती बाढ़ में नहीं डूबेगी।
अश्विनी भिड़े ने मंगलवार को सेवानिवृत्त हुए भूषण गगराणी से मुंबई मनपा आयुक्त का पदभार ग्रहण किया। उन्होंने कहा कि मुंबई महानगरपालिका उनके लिए कोई नई जगह नहीं है।
कोविड महामारी के दौरान वे पालिका में अतिरिक्त आयुक्त के रूप में काम कर चुकी हैं, इसलिए आज आयुक्त पद की जिम्मेदारी संभालना उनके लिए ‘होम कमिंग’ यानी घर वापसी जैसा अनुभव है। मुंबई के लिए मानसून हमेशा से ही अग्निपरीक्षा साबित होता रहा है। 26 जुलाई 2005 की भयावह बाढ़ को मुंबईकर आज भी नहीं भूले हैं। जब पूरा शहर थम गया था।
सम्बंधित ख़बरें
NEET-UG 2026 Paper Leak में पुणे कनेक्शन का हुआ भंडाफोड़, CBI जांच में बड़े नेटवर्क का खुलासा
महाराष्ट्र में 30 जून से पहले होगी किसानों की कर्जमाफी, सीएम फडणवीस का बड़ा ऐलान
Maharashtra Weather: एक तरफ भीषण लू का प्रकोप तो दूसरी तरफ बारिश का अलर्ट, आज कैसा रहेगा महाराष्ट्र का मौसम?
संगठन सृजन अभियान के तहत कांग्रेस का बड़ा कदम, मुंबई में 7 हजार पदाधिकारी सीखेंगे राजनीति के गुर
सबसे अधिक प्रभावित इलाकों में बीएमसी के उपाय
इसके बाद भी 2017 और 2019 में हुई अतिवृष्टि ने बीएमसी के दावों की पोल खोली थी। हर साल ड्रेनेज सिस्टम का चौक होना और समुद्र में ऊंची लहरों (हाई टाइड) के दौरान बारिश के पानी का न निकल पाना, करोड़ों की संपत्ति के नुकसान और जनजीवन अस्त-व्यस्त होने का कारण बनता है।
ऐसे में नई कमिश्नर का यह आश्वासन जनता के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। मुंबई में हिंदमाता (दादर), सायन, माटुंगा, अंधेरी सबवे, मिलन सबवे, चेंबूर और कुर्ला जैसे इलाके ‘लो-लाइंग एरिया’ (निचले इलाके) होने के कारण सबसे पहले डूबते हैं।
- इन हॉटस्पॉट्स पर राहत देने के लिए बीएमसी ने अब तक करोड़ों रुपए खर्च कर भूमिगत जल भंडारण टैंक बनाए हैं। हिंदमाता और मिलन सबवे में बने टैंकों से पानी जमा कर बाद में निकाला जाता है।
- इसके अलावा, मीठी नदी का चौड़ीकरण और गहरीकरण, साथ ही ब्रिमस्टोवैड प्रोजेक्ट के तहत नए पंपिंग स्टेशन स्थापित करना बीएमसी की प्राथमिकता रही है। भिड़े ने कहा कि जल निकासी क्षमता बढ़ाने के लिए शुरू परियोजनाओं को तेजी से क्रियान्वित किया जाएगा, उन्होंने साफ किया कि उनका मुख्य उद्देश्य बिना भेदभाव शहर को सुरक्षित बनाना है।
पेश आएंगी निम्न चुनौतियां
उन्होंने कहा कि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का समन्वय ही विकास सुनिश्चित करता है। एक कुशल प्रशासक के रूप में भिड़े को कई तकनीकी चुनौतियों का सामना करना होगा। हाई टाइड और भारी बारिश का घातक संयोग ड्रेनेज सिस्टम को ठप कर देता है, ऐसे में पंपिंग स्टेशनों की निर्वाध कार्यप्रणाली सुनिश्चित करनी होगी। ब्रिटिश काल का ड्रेनेज नेटवर्क केवल 25 मिमी प्रति घंटे बारिश झेलने की क्षमता रखता है, जबकि 50 मिमी से अधिक बारिश होने पर जलभराव निश्चित है।
ये भी पढ़ें :- Maharashtra Weather Update: भिवंडी में भीषण गर्मी का कहर, तापमान 40 डिग्री पार, जनजीवन भी हुआ प्रभावित
मीठी नदी और नालों की सफाई पर निगरानी
- मीठी नदी और नालों की सफाई (डीसिल्टिंग) की प्रभावशीलता पर भी सख्त निगरानी जरूरी है, क्योंकि कचरा फेंकने की आदतों और अवैध झुग्गियों के कारण यह अभियान चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
- मेट्रो, कोस्टल रोड जैसी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के कारण कई जगह जल निकासी के रास्ते बाधित हुए हैं, जहां वैकल्पिक व्यवस्था करनी होगी। समुद्र तल से नीचे बसे हिंदमाता, सायन जैसे निचले इलाकों में जीरो फ्लडिंग’ का लक्ष्य हासिल करना उनके लिए सबसे बड़ी परीक्षा होगी।
- 31 वर्षों का प्रशासनिक अनुभव रखने वाली भिडे के पास अनुभव की कमी नहीं है, लेकिन मुंबई की बारिश और बुनियादी ढांचे की मौजूदा सीमाओं के चलते उनके वादे की असली परीक्षा मानसून की पहली भारी बारिश में ही हो जाएगी।
