Mumbai Mill Workers Housing (सोर्सः सोशल मीडिया)
Mumbai Mill Workers Housing: दशकों से अपने हक के आवास की प्रतीक्षा कर रहे मिल कामगारों का सब्र अब टूटता नजर आ रहा है। मुंबई में बंद पड़ी कपड़ा मिलों की जमीन पर श्रमिकों को घर देने का निर्णय सरकारों ने पहले ही लिया था, लेकिन अब तक उस पर अमल नहीं हो सका। मिल कामगार मुंबई में ही घर की मांग कर रहे हैं, जबकि सरकार ने उन्हें मुंबई के बाहर ठाणे और रायगढ़ जिलों में आवास उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। इसके विरोध में मिल कामगारों ने 10 मार्च को विधानसभा पर ‘निर्धार मोर्चा’ निकालने का फैसला किया है।
सिंधुदुर्ग के सावंतवाड़ी में आयोजित बैठक में राष्ट्रीय मिल मजदूर संघ के उपाध्यक्ष बजरंग चव्हाण ने कहा कि मुंबई में हक का घर दिलाने के लिए 16 मजदूर संगठनों ने एकजुट होकर आंदोलन तेज कर दिया है। उन्होंने बताया कि विधानसभा सत्र के दौरान 10 मार्च को विशाल ‘निर्धार मोर्चा’ निकाला जाएगा। चव्हाण ने स्पष्ट कहा कि मिल मजदूरों को शेलू या वंगानी जैसे मुंबई के बाहर के क्षेत्रों में नहीं, बल्कि मुंबई में ही घर दिए जाएं।
एक समय मुंबई की धड़कन कही जाने वाली कपड़ा मिलें 1980 और 1990 के दशक से बंद होनी शुरू हो गई थीं। एनटीसी और सेंचुरी सहित मुंबई की 58 बंद मिलों में लाखों कामगार कार्यरत थे। बेरोजगार हुए कामगारों और उनके वारिसों को मिलों की जमीन बेचकर घर देने का निर्णय लिया गया था।
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करीब 1 लाख 70 हजार मजदूरों ने घरों के लिए आवेदन किया है, जिनमें से लगभग 1 लाख 25 हजार आवेदनों के पात्र होने की उम्मीद जताई जा रही है। मजदूर संगठनों का कहना है कि 1 अक्टूबर 1981 के बाद हड़ताल पर गए मजदूरों को न्याय दिलाने की लड़ाई भी जारी रहेगी।
संघ के कोषाध्यक्ष निवृत्ति देसाई ने कहा कि मुंबई को आर्थिक राजधानी बनाने में मिल मजदूरों का बड़ा योगदान रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मांग की कि मजदूरों के आवास का मुद्दा तत्काल हल किया जाए। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि विधानसभा में कई बार मिल मजदूरों के हक का मुद्दा उठ चुका है।