मुलुंड मेट्रो हादसा (सौजन्य-सोशल मीडिया)
MMRDA Zero Tolerance Policy: मेट्रो-4 के निर्माणाधीन कॉरिडोर पर पैरापेट सेगमेंट गिरने की घटना ने केवल एक साइट की लापरवाही नहीं, बल्कि निगरानी व्यवस्था की कमजोरी उजागर कर दी है। एक व्यक्ति की मौत और तीन के घायल होने के बाद एमएमआरडीए ने जहां ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति लागू की है। वहीं असली सवाल जनरल कंसल्टेंट (जीसी) की भूमिका पर उठ खड़ा हुआ है, जिन्हें पिछले ढाई वर्षों में 150 से अधिक नोटिस जारी किए गए थे।
14 फरवरी को दोपहर लगभग 12.20 बजे निर्माणाधीन वायाडक्ट का पैरापेट हिस्सा नीचे सड़क पर गिरा और एक ऑटो व कार इसकी चपेट में आ गए। रामधनी यादव को मृत घोषित किया गया, जबकि तीन अन्य घायलों का उपचार जारी है। मामले में बीएनएस की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।
सब-कॉन्ट्रैक्टर मिलन बिल्डटेक, रिलायंस-अस्ताल्दी जेवी और सुपरवाइजरी एजेंसियों के इंजीनियरों के खिलाफ कार्रवाई शुरू हो चुकी है। कार्यपालक अभियंता को निलंबित किया गया है। मुख्यमंत्री ने जांच के आदेश दिए और 5 लाख रुपये की अनुग्रह राशि घोषित की।
प्राथमिक जांच में सामने आया कि साइट पर पैरापेट का एक हिस्सा काटा गया था। अधिकारियों के अनुसार, यह कार्य बिना पर्याप्त सुपरविजन के हुआ और जैसी का कोई प्रतिनिधि मौके पर मौजूद नहीं था। कटिंग के कई घंटे बाद तक जीसी को इसकी जानकारी नहीं थी। यही वह बिंदु है जिसने निगरानी तंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए है।
एमएमआरडीए के सूत्र बताते है कि संबंधित जनरल कंसल्टेंट्स लुईस बर्जर, हिल इंटरनेशनल और डीबी इंटरनेशनल को विभिन्न परियोजनाओं में देरी, साइट मॉनिटरिंग और अनुपालन में दिलाई के लिए बार-बार नोटिस जारी किए गए थे। 150 से अधिक चेतावनियां केवल कागजी कार्रवाई बनकर रह गई। अब प्राधिकरण ने इन एजेंसियों के अनुबंध समाप्त कर दिए हैं। प्रारंभिक स्तर पर ठेकेदार पर 5 करोड़ और जैसी पर 1 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
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जनता में जागरूकता अभियान चलाकर एक्सपेंशन जॉइंट्स और दरारो के अंतर को समझाया जाएगा, ताकि अनावश्यक दहशत न फैले। मेट्रो विस्तार की दौड़ में यह हादसा एक चेतावनी बनकर उभरा है। कई दिनों से सामान्य काम हो रहे साइट पर भी बिना पूर्ण जानकारी के भ्रामक वीडियो बनाया, जो लोगों को गलत जानकारी दे रहा था।