मुलुंड मेट्रो हादसा: 150 चेतावनियां दरकिनार, जनरल कंसल्टेंट की लापरवाही ने ली जान; MMRDA ने लिया एक्शन
Mumbai Metro-4 Accident: मेट्रो-4 हादसे ने खोली जनरल कंसल्टेंट की पोल। 150 नोटिस के बाद भी लापरवाही, MMRDA ने एजेंसियों के अनुबंध किए समाप्त और लगाया भारी जुर्माना।
- Written By: प्रिया जैस
मुलुंड मेट्रो हादसा (सौजन्य-सोशल मीडिया)
MMRDA Zero Tolerance Policy: मेट्रो-4 के निर्माणाधीन कॉरिडोर पर पैरापेट सेगमेंट गिरने की घटना ने केवल एक साइट की लापरवाही नहीं, बल्कि निगरानी व्यवस्था की कमजोरी उजागर कर दी है। एक व्यक्ति की मौत और तीन के घायल होने के बाद एमएमआरडीए ने जहां ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति लागू की है। वहीं असली सवाल जनरल कंसल्टेंट (जीसी) की भूमिका पर उठ खड़ा हुआ है, जिन्हें पिछले ढाई वर्षों में 150 से अधिक नोटिस जारी किए गए थे।
14 फरवरी को दोपहर लगभग 12.20 बजे निर्माणाधीन वायाडक्ट का पैरापेट हिस्सा नीचे सड़क पर गिरा और एक ऑटो व कार इसकी चपेट में आ गए। रामधनी यादव को मृत घोषित किया गया, जबकि तीन अन्य घायलों का उपचार जारी है। मामले में बीएनएस की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।
सब-कॉन्ट्रैक्टर मिलन बिल्डटेक, रिलायंस-अस्ताल्दी जेवी और सुपरवाइजरी एजेंसियों के इंजीनियरों के खिलाफ कार्रवाई शुरू हो चुकी है। कार्यपालक अभियंता को निलंबित किया गया है। मुख्यमंत्री ने जांच के आदेश दिए और 5 लाख रुपये की अनुग्रह राशि घोषित की।
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नोटिस को किया नजरअंदाज
प्राथमिक जांच में सामने आया कि साइट पर पैरापेट का एक हिस्सा काटा गया था। अधिकारियों के अनुसार, यह कार्य बिना पर्याप्त सुपरविजन के हुआ और जैसी का कोई प्रतिनिधि मौके पर मौजूद नहीं था। कटिंग के कई घंटे बाद तक जीसी को इसकी जानकारी नहीं थी। यही वह बिंदु है जिसने निगरानी तंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए है।
एमएमआरडीए के सूत्र बताते है कि संबंधित जनरल कंसल्टेंट्स लुईस बर्जर, हिल इंटरनेशनल और डीबी इंटरनेशनल को विभिन्न परियोजनाओं में देरी, साइट मॉनिटरिंग और अनुपालन में दिलाई के लिए बार-बार नोटिस जारी किए गए थे। 150 से अधिक चेतावनियां केवल कागजी कार्रवाई बनकर रह गई। अब प्राधिकरण ने इन एजेंसियों के अनुबंध समाप्त कर दिए हैं। प्रारंभिक स्तर पर ठेकेदार पर 5 करोड़ और जैसी पर 1 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
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सभी निर्माणाधीन मेट्रो कॉरिडोर का व्यापक निरीक्षण, संभावित दरारों की जांच
- तकनीकी जांच में यह भी सामने आया कि हाल ही में लगाया गया एक पैरापेट पर्याप्त ‘क्योरिंग’ से नहीं गुजरा था और फिक्सिंग मानको पर खरा नहीं उतरा।
- आठ में से एक नया सेगमेंट कमजोर पाया गया। जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि डिजाइन अप्रूवल से लेकर ऑन-साइट सुपरविजन तक कौन-कौन से स्तर पर चूक हुई।
- घटना के बाद एमएमआरडीए ने केवल मेट्रो-4 ही नहीं, बल्कि सभी निर्माणाधीन मेट्रो कॉरिडोर का व्यापक निरीक्षण शुरू किया है। संरचनात्मक जॉइंट्स, एक्सपेंशन गैप, फिक्सिंग सिस्टम और संभावित दरारों की जांच की जा रही है।
- एक राज्य-स्तरीय सेफ्टी ओवरसाइट सेल गठित किया गया है, जो साइट विजिट, एसओपी अनुपालन और सुरक्षा मानकों पर नजर रखेगा।
- प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि सीसीटीवी मॉनिटरिंग पर्याप्त नहीं मानी जाएगी और जनरल कंसल्टेंट की भौतिक उपस्थिति अनिवार्य होगी।
जनता में जागरूकता अभियान
जनता में जागरूकता अभियान चलाकर एक्सपेंशन जॉइंट्स और दरारो के अंतर को समझाया जाएगा, ताकि अनावश्यक दहशत न फैले। मेट्रो विस्तार की दौड़ में यह हादसा एक चेतावनी बनकर उभरा है। कई दिनों से सामान्य काम हो रहे साइट पर भी बिना पूर्ण जानकारी के भ्रामक वीडियो बनाया, जो लोगों को गलत जानकारी दे रहा था।
- नवभारत लाइव पर मुंबई से अभिषेक पाठक की रिपोर्ट
