

Mumbai Hutatma Smarak Issue: मुंबई की शान और अस्मिता माने जाने वाले हुतात्मा स्मारक की बदहाल स्थिति का मुद्दा शुक्रवार को मुंबई मनपा की सभा में जोरदार तरीके से उठा।
इस मुद्दे को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई और दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर जमकर आरोप लगाए। सभा की शुरुआत में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नगरसेवक अंकित प्रभू ने आपत्ति का मुद्दा उठाते हुए स्मारक की वर्तमान खराब हालत की ओर सभागृह का ध्यान आकर्षित किया। उनका समर्थन करते हुए विपक्ष की नेता किशोरी पेडणेकर ने प्रशासन पर कड़े शब्दों में निशाना साधा।
उन्होंने सवाल किया कि पिछले चार वर्षों से मुंबई में प्रशासक राज होने के बावजूद स्मारक का सुंदरीकरण क्यों नहीं किया गया। किशोरी पेडणेकर ने यह भी आरोप लगाया कि विकास निधि के वितरण में विपक्ष के साथ भेदभाव किया जा रहा है और उन्हें केवल 25 लाख रुपये का निधि दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि हम अपना 25 लाख रुपये का निधि भी हुतात्मा स्मारक के लिए देने को तैयार हैं, लेकिन प्रशासन को स्मारक की हालत सुधारनी चाहिए, कांग्रेस के गटनेता अशरफ आजमी ने भी सत्ता पक्ष पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि "106 हुतात्माओं के बलिदान की वजह से मुंबई महाराष्ट्र को मिली, लेकिन आज सत्ता में बैठे लोग उनका सम्मान बनाए रखने में असफल रहे हैं।
शिवसेना के गटनेता अमेय धोले ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि नेहरू के समय से कांग्रेस की सोच मुंबई को महाराष्ट्र से अलग करने की रही है, मराठी लोगों के आंदोलन का कांग्रेस ने हमेशा विरोष किया और हुतात्माओं पर गोली चलाने का काम भी कांग्रेस ने ही किया था।
बीजेपी नगरसेवक योगेश वर्मा ने कहा कि 107 लोग शहीद हुए थे लेकिन शिवसेना व कांग्रेस को को शर्म नहीं है, उन्होंने कहा कि कांग्रेस को उठाकर बाहर भेज देना चाहिए, दोनों मिलकर इस मुद्दे पर बोल रहे थे। इस पर वर्मा ने कहा कि इसका असली खलनायक कांग्रेस है। कांग्रेस हमेशा से महाराष्ट्र और मराठी विरोधी रही है और लगातार विरोध करती रहती है।