मुंबई न्यूज (प्रतीकात्मक तस्वीर)
Mumbai Home Loan Dispute: होम लोन को लेकर एक मृतक के परिवार को न्याय दिलाने की मांग ने तूल पकड़ लिया है. भाजपा के पूर्व नगरसेवक विनोद मिश्रा पीड़ित परिवार के समर्थन में सामने आए हैं और बैंक प्रबंधन की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं.
मालाड के कुरार विलेज स्थित फेर्सिया रीबेलो में रहने वाली रितु देवी नरेश मिश्रा के पति नरेश मिश्रा ने 2 सितंबर, 2019 को आईडीएफसी फर्स्ट बैंक से 82 लाख रुपये का होम लोन लिया था. 2 जून, 2025 तक उन्होंने लगभग 65 लाख रुपये की किश्तें जमा कर दी थीं.
पीड़िता का आरोप है कि कुछ वर्ष पूर्व उनके पति लीवर की गंभीर बीमारी से ग्रसित थे, जिस कारण वे कुछ समय तक ईएमआई भरने में असमर्थ रहे. इसी दौरान बैंक के रिकवरी एजेंट कथित रूप से सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक उनके घर के बाहर बैठते थे और मानसिक दबाव बनाते थे. पीड़िता का यह भी आरोप है कि एजेंट कई बार घर में घुसकर मारपीट करते थे. इस संबंध में उनके पति ने पुलिस हेल्पलाइन पर शिकायत भी दर्ज कराई थी.
परिवार का कहना है कि लगातार मानसिक प्रताड़ना के चलते 28 सितंबर, 2025 को नरेश मिश्रा की मौत हो गई. मामले में एक और बड़ा सवाल तब खड़ा हुआ जब परिवार ने बैंक से लोन इंश्योरेंस के तहत शेष राशि समायोजित करने की मांग की, तब उन्हें जानकारी मिली कि 82 लाख के लोन के बदले बैंक ने केवल 10 लाख रुपये का ही बीमा कवर कराया था.
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भाजपा के पूर्व नगरसेवक विनोद मिश्रा ने आरोप लगाया है कि इतनी बड़ी राशि के लोन पर मात्र 10 लाख का बीमा कराना गंभीर अनियमितता को दर्शाता है. उनका कहना है कि यदि रिकवरी एजेंटों की धमकी और दबाव के कारण मौत हुई है तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए. उन्होंने बैंक से पूरा लोन माफ करने की मांग भी की है।