MLC चुनाव में ‘अड़ी बीजेपी, चिढ़े शिंदे’; सीट बंटवारे के सवाल पर आपा खो बैठे उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे
Eknath Shinde On Mahayuti Seat Sharing: विधान परिषद चुनाव से पहले महायुति में सीट बंटवारे पर फंसा पेंच, देवेंद्र फडणवीस से बैठक के बाद पत्रकारों पर भड़के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे।
- Written By: अनिल सिंह
पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए एकनाथ शिंदे (फोटो क्रेडिट-X)
Eknath Shinde Angry On Journalists: महाराष्ट्र की राजनीति में ‘ऑल इज वेल’ का दावा करने वाले महायुति गठबंधन के भीतर विधान परिषद टिकटों के आवंटन को लेकर असली ‘महाभारत’ शुरू हो चुकी है। आगामी 18 जून को होने वाले विधान परिषद चुनाव के लिए नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन बीजेपी, शिवसेना और राकांपा (अजित पवार गुट) के बीच जारी गतिरोध खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार को राज्य मंत्रिमंडल की आधिकारिक बैठक के बाद उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बीच करीब 20 मिनट तक गहन वन-टू-वन चर्चा हुई। उम्मीद थी कि इस बैठक में कोई बीच का रास्ता निकलेगा, लेकिन नतीजा सिफर रहा।
बैठक के तुरंत बाद जब उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे मीडिया के कैमरों के सामने आए, तो उनके चेहरे का तनाव साफ बयां हो रहा था। पत्रकारों ने जैसे ही उनके दिल्ली दौरे और विधान परिषद की सीटों पर भाजपा के साथ चल रहे विवाद को लेकर पहला सवाल पूछा, शिंदे अपना आपा खो बैठे। उन्होंने आक्रामक हाव-भाव दिखाते हुए पत्रकारों से ही उलटा सवाल पूछ लिया और वहां से आगे बढ़ गए। उपमुख्यमंत्री के इस तीखे व्यवहार से मंत्रालय का गलियारा सियासी कयासों से गरमा गया है।
कोंकण और संभाजीनगर में साख की लड़ाई
सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे विवाद की मुख्य वजह कोंकण की रायगढ़-रत्नागिरी-सिंधुदुर्ग सीट और मराठवाड़ा की छत्रपति संभाजीनगर सीट है। कोंकण क्षेत्र को शिवसेना का पारंपरिक गढ़ माना जाता है और यहां शिंदे गुट की अच्छी-खासी सांगठनिक ताकत है। इसके बावजूद, अजीत पवार की एनसीपी इस सीट को किसी भी कीमत पर छोड़ने को तैयार नहीं है। दूसरी तरफ, छत्रपति संभाजीनगर की प्रतिष्ठित सीट पर भाजपा ने अपना दावा ठोक दिया है, जबकि शिवसेना का तर्क है कि इस क्षेत्र पर अंबादास दानवे (शिवसेना) का कब्जा था, इसलिए यह सीट उनके कोटे में आनी चाहिए।
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बीजेपी के चक्रव्यूह में फंसी शिंदे की शिवसेना?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शिवसेना खुद को भाजपा और एनसीपी के संयुक्त दबाव के चक्रव्यूह में फंसा हुआ महसूस कर रही है। हालांकि, दिल्ली में भाजपा के शीर्ष केंद्रीय नेतृत्व से मुलाकात के बाद शिंदे को आश्वासन मिला था, लेकिन राज्य स्तर पर देवेंद्र फडणवीस और भाजपा की प्रदेश इकाई अपनी जीती हुई या मजबूत सीटों पर रत्ती भर भी समझौता करने के मूड में नहीं है। शिवसेना फिलहाल नासिक, ठाणे, यवतमाल और परभणी की सीटों को अपने खाते में सुरक्षित मानकर चल रही है, लेकिन वह संभाजीनगर या रायगढ़ में से कम से कम एक और सीट चाहती है।
22 जून को आएंगे नतीजे, समय कम और तनाव ज्यादा
चुनाव आयोग के तय शेड्यूल के अनुसार, 17 सीटों के लिए 1 जून तक नामांकन पत्र दाखिल किए जाने हैं। मतदान 18 जून को होगा और वोटों की गिनती 22 जून को की जाएगी। चूंकि मतदाता स्थानीय निकायों (नगर निगमों, जिला परिषदों) के निर्वाचित सदस्य हैं, इसलिए हर एक सीट पर जीत-हार का गणित बेहद सूक्ष्म है। यदि अगले 48 घंटों के भीतर महायुति के तीनों शीर्ष नेता आपसी समन्वय से विवाद नहीं सुलझाते हैं, तो ऐन चुनाव से पहले गठबंधन के भीतर बगावत और दोस्ताना मुकाबले (Friendly Fight) की नौबत आ सकती है, जिसका सीधा फायदा महाविकास अघाड़ी (MVA) को मिलेगा।
