मुंबई न्यूज (प्रतीकात्मक तस्वीर)
Mumbai Groundwater Management Workshop: मुंबई के सतत और संतुलित विकास के लिए भूजल प्रबंधन और दीर्घकालीन योजना को अत्यंत आवश्यक बताया गया है। बीएमसी मुख्यालय में आयोजित एक महत्वपूर्ण कार्यशाला में विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों ने इस विषय पर विस्तृत चर्चा की।
यह कार्यशाला ‘केंद्रीय भूजल विभाग के भूजल सूचना भंडार तथा जलधर मानचित्रण अध्ययन परियोजनाओं के उपयोग’ विषय पर आयोजित की गई थी। इसमें केंद्रीय भूजल बोर्ड के वरिष्ठ वैज्ञानिक उपेंद्र धोंडे ने भूजल की स्थिति, उपयोग और संरक्षण के विभिन्न पहलुओं पर प्रस्तुति दी।
उन्होंने बताया कि देशभर में भूमिगत जल के भंडार की सटीक जानकारी और उसका वैज्ञानिक उपयोग भविष्य की जल सुरक्षा के लिए जरूरी है। कार्यक्रम बीएमसी आयुक्त भूषण गगराणी के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया।
इसमें विभिन्न विभागों और निजी संस्थाओं के कुल 56 प्रतिनिधियों ने प्रत्यक्ष और ऑनलाइन भाग लिया। विशेषज्ञों ने बताया कि मुंबई जैसे तटीय शहर में भूजल के अंधाधुंध दोहन से जल स्तर गिरने के साथ-साथ खारापन बढ़ने का खतरा भी है। इसलिए भूजल के उपयोग पर नियंत्रण, प्रदूषण में कमी और कृत्रिम पुनर्भरण संरचनाओं को बढ़ावा देना समय की मांग है।
कार्यशाला में अटल भूजल योजना, जल शक्ति अभियान और मिशन अमृत सरोवर जैसी योजनाओं की भी जानकारी दी गई। साथ ही यह भी बताया गया कि भूजल डेटा के व्यापक प्रसार से नीति निर्माण और स्थानीय स्तर पर निर्णय प्रक्रिया को मजबूती मिलती है।
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इस अवसर पर ‘कृत्रिम पुनर्भरण संरचनाओं की सफल कहानियां’ पुस्तक का विमोचन भी किया गया। विशेषज्ञों ने प्रभावी भूजल प्रबंधन के लिए कानूनों को सरल बनाने और विभागों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर चल दिया, कार्यशाला ने स्पष्ट किया कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में जल संकट और गंभीर हो सकता है।