कांजूरमार्ग में मिथेन गैस और बदबू से राहत दिलाने की तैयारी, 2027 तक लागू होगी नई परियोजना
Kanjurmarg Waste Project: कांजूरमार्ग कचरा प्रसंस्करण परियोजना से फैल रही दुर्गंध और मिथेन गैस की समस्या को नियंत्रित करने के लिए बीएमसी ने सीबीजी और वेस्ट टू एनर्जी परियोजना पर काम तेज कर दिया है।
- Written By: अपूर्वा नायक
कांजुरमार्ग वेस्ट प्रोसेसिंग प्रोजेक्ट का अश्विनी भिडे ने किया निरीक्षण (सौ. सोशल मीडिया एक्स )
Kanjurmarg Waste Project Control Plan: कांजूरमार्ग स्थित कचरा प्रसंस्करण परियोजना से उत्पन्न होने वाली दुर्गंध और मिथेन गैस की समस्या का स्थायी समाधान निकालने के लिए बीएमसी ने अब कमर कस ली है।
घनकचरा विभाग के उपायुक्त किरण दिघावकर ने बताया कि इस समस्या के समाधान के लिए बीएमसी की तरफ से कॉम्प्रेस्ड बायोगैस परियोजना (सीबीजी), हरित सुरक्षा पट्टी और ‘वेस्ट टू एनर्जी’ परियोजना विकसित करने की तैयारी तेज कर दी गई है। इस संबंध में महानगर गैस लिमिटेड के साथ महत्वपूर्ण करार भी किया गया है और दिसंबर 2027 तक सीबीजी परियोजना को पूरी तरह कार्यान्वित करने का लक्ष्य रखा गया है।
बनेगा नियंत्रण कक्ष, रात में तैनात होंगे अभियंता
उन्होंने बताया कि सिर्फ गैस नियंत्रण ही नहीं, बल्कि दुर्गंध रोकने के लिए परियोजना परिसर के चारों ओर 500 मीटर चौड़ी ‘ग्रीन बफर जोन’ भी तैयार की जाएगी। इसके तहत 18 से 20 फीट ऊंचाई वाले लगभग 2,200 पेड़ तथा 8 से 12 फीट ऊंचाई वाले 15 हजार पौधों का तीन स्तरों में रोपण किया जाएगा।
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🔹बृहन्मुंबई महानगरपालिकेने देवनार क्षेपणभूमी येथे कचऱ्यापासून वीजनिर्मिती (वेस्ट टू एनर्जी) प्रकल्प हाती घेतला असून महानगरपालिका आयुक्त श्रीमती अश्विनी भिडे यांनी आज या प्रकल्पाची पाहणी केली. 🔹कचऱ्यापासून वीजनिर्मिती या प्रकल्पामध्ये प्रतिदिन सुमारे 600 मेट्रिक टन नागरी… pic.twitter.com/Z9jZb3aFm4 — माझी Mumbai, आपली BMC (@mybmc) May 13, 2026
इस ‘ग्रीन फेंसिंग’ से दुर्गंध के प्रसार को रोकने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, वर्तमान में बाहरी हिस्से में स्थित कचरा वर्गीकरण परियोजना को अंदर स्थानांतरित किया जाएगा, हालांकि मिथेन गैस में स्वयं कोई गंध नहीं होती, लेकिन कचरे में मौजूद सल्फर और अमोनिया से उत्पन्न दुर्गंध का पता लगाने के लिए परिसर में विशेष सेंसर लगाए जाएंगे।
विशेष रूप से रात के समय बढ़ने वाली समस्या पर नियंत्रण पाने के लिए नियंत्रण कक्ष और अभियंताओं की रात्रि पाली भी तैनात की जाएगी। इसके अतिरिक्त, दीवाली तक 8 मेगावाट क्षमता की ‘वेस्ट टू एनर्जी’ परियोजना शुरू करने की भी महानगरपालिका की योजना है, जिससे कचरा प्रबंधन को और गति मिलेगी।
सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची शिकायत
बता दें कि कांजूरमार्ग क्षेत्र के रहवासियों द्वारा दुर्गंध को लेकर की गई शिकायतों के बाद यह मामला सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचा था। न्यायालय द्वारा नियुक्त विशेष समिति के निर्देशानुसार मनपा ने ये तात्कालिक उपाय शुरू किए हैं।
किरण दिघावकर ने बताया कि गीले कचरे से प्राकृतिक रूप से मिथेन गैस उत्पन्न होती है और कचरा खुले में रहने पर इसका उत्सर्जन बढ़ने से दुर्गंध फैलती है। विशेषज्ञ समिति की सिफारिश के अनुसार मिथेन नियंत्रण के लिए सीबीजी परियोजना ही एकमात्र वैज्ञानिक समाधान है। इस परियोजना में कचरे से निकलने वाली मिथेन गैस को एकत्र कर पाइप गैस में परिवर्तित किया जाएगा। इसके लिए मनपा ने महानगर गैस को आठ एकड़ जमीन हस्तांतरित की है।
आयुक्त अश्विनी भिड़े ने किया निरीक्षण
प्रतिदिन लगभग 350 से 500 टन गीले कचरे पर प्रक्रिया कर उससे 16 टन गैस का उत्पादन किया जाएगा। वर्तमान में मुंबई में उत्पन्न कुल कचरे का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा गीला कचरा होने के कारण मीथेन की मात्रा अधिक है, जिस पर यह परियोजना प्रभावी साबित होगी, ऐसा विश्वास दिघावकर ने व्यक्त किया। बीएमसी आयुक्त अश्विनी भिड़े ने बुधवार तड़के परियोजना स्थल का आकस्मिक निरीक्षण किया।
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नागरिकों के लिए हेल्पलाइन
- करीब डेढ़ घंटे तक चले दौरे में उन्होंने कचरा पृथक्करण केंद्र, खाद निर्माण इकाई, गैस से बिजली उत्पादन केंद्र और बायोरिएक्टर लैंडफिल का जायजा लिया। परियोजना स्थल पर दुर्गंध रोकने के लिए बायो-एंजाइम युक्त द्रव का छिड़काव और 11 स्थानों पर मिस्टिंग कैनन प्रणाली शुरू की गई है।
- साथ ही नागरिकों की शिकायतों के लिए हेल्पलाइन सेवा भी सक्रिय की गई है। मनपा के अनुसार, कांजूर परियोजना में प्रतिदिन हजारों टन कचरे का वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण किया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान भिड़े ने अधिकारियों को कार्यक्षमता बढ़ाने और आवश्यक सुधार करने के निर्देश दिए।
