ग्लोबल अस्पताल व राज्यमंत्री माधुरी मिसाल (सोर्स: सोशल मीडिया)
Mumbai Global Hospital Action: मुंबई के पॉश इलाके परेल स्थित ग्लोबल अस्पताल ने पिछले 15 वर्षों से गरीब मरीजों के लिए आरक्षित 15 प्रतिशत बेड उपलब्ध नहीं कराए और अब इस लापरवाही की कीमत अस्पताल को चुकानी होगी। महाराष्ट्र सरकार ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई करने और उसे दी गई अतिरिक्त एफएसआई (फ्लोर स्पेस इंडेक्स) छूट वापस लेने का ऐलान किया है।
यह मामला विधानसभा में विधायक अजय चौधरी की ध्यानाकर्षण सूचना के जरिए सामने आया। उन्होंने आरोप लगाया कि ग्लोबल अस्पताल ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के निर्माण नियमों का उल्लंघन किया है और डेढ़ दशक से गरीब मरीजों को उनके हक से वंचित रखा है। इस चर्चा में विधायक योगेश सागर और अनंत (बाला) नर ने भी भाग लिया।
राज्यमंत्री माधुरी मिसाल ने विधानसभा में बोलते हुए स्पष्ट किया कि ग्लोबल अस्पताल को मंजूरी देते समय बीएमसी दरों पर 15 प्रतिशत बेड गरीब मरीजों को देने की शर्त रखी गई थी। इस शर्त का पालन न होने पर पहले ही अस्पताल का नवीनीकरण रोका गया था, लेकिन न्यायालीन प्रक्रिया के चलते अस्पताल को राहत मिलती रही।
मंत्री माधुरी मिसाल ने विधानसभा में कहा कि इस पूरे प्रकरण में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जांच कर उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। सरकार का यह कदम मुंबई के निजी अस्पतालों को स्पष्ट संदेश देता है कि सरकारी शर्तों की अनदेखी अब बर्दाश्त नहीं होगी।
यह भी पढ़ें:- तीसरी मुंबई का रास्ता साफ! अटल सेतु के पास बसेगा नया शहर, जमीन मालिकों को मिलेगा 22.5% प्लॉट; जानें पूरी नीति
राज्यमंत्री ने बताया कि अस्पताल की तीसरी विंग के निर्माण की अनुमति पहले ही अस्वीकार की जा चुकी है। कुछ मंजिलों को ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (ओसी) नहीं दिया गया है और बाकी निर्माण को भी मंजूरी नहीं दी जाएगी। जरूरत पड़ने पर संबंधित मंजिलें जब्त भी की जाएगी।