पुणे गुरुद्वारों ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Pune LPG Crisis News: पुणे पश्चिम एशिया में जारी तनाव का व्यापक असर एलपीजी आपूर्ति (सप्लाई) पर पड़ता नजर आ रहा है। पुणे में मेस, कैंटीन, सामुदायिक रसोई और होटलों पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। शहर में गहराते एलपीजी संकट की गाज अब गुरुद्वारों और अन्य सामुदायिक लंगर सेवाओं पर भी गिरने लगी है। गैस सिलेंडरों की अनियमित आपूर्ति के कारण कई गुरुद्वारों और मंदिरों को भोजन की मात्रा कम करनी पड़ रही है, वहीं कुछ स्थानों पर सेवा पूरी तरह बंद होने का खतरा पैदा हो गया है।
विमान नगर स्थित गुरुद्वारा के प्रबंधक दलजीत सिंह ने बताया कि हर रविवार यहां 200-300 लोगों के लिए लंगर तैयार किया जाता है, जिसमें दाल, चावल, खीर और आलू-पूरी जैसे व्यंजन बनाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था के लिए हर सप्ताह कम से कम दो गैस सिलेंडरों की जरूरत होती है, लेकिन अब नियमित सप्लाई नहीं हो पा रही है। यदि स्थिति ऐसी ही रही, तो लंगर सेवा बंद करनी पड़ सकती है।
वहीं, येरवडा के गुरुद्वारा ‘दशमेश दरबार’ में भी हालात गंभीर हैं। यहां के प्रबंधक दर्शन सिंह के अनुसार, पिछले दो दिनों से गैस सिलेंडर नहीं मिल पाया है और फिलहाल किसी तरह केवल चाय-पानी की व्यवस्था चल रही है। उन्होंने कहा कि हर रविवार सैकड़ों जरूरतमंद लोग यहाँ भोजन के लिए आते हैं, लेकिन सिलेंडर न मिलने से रसोई ठप होने की कगार पर है।
यह भी पढ़ें:-पुणे जिला परिषद का 301 करोड़ का बजट: शिक्षा में AI, मॉडल स्कूल और बालिकाओं के HPV टीकाकरण पर विशेष जोर रहेगा
वानवडी स्थित झूलेलाल मंदिर में भी पुणे एलपीजी की किल्लत का असर दिखने लगा है। मंदिर प्रशासन के अनुसार, आगामी उत्सव के दौरान लंगर सेवा के लिए जितने सिलेंडरों की आवश्यकता है, उतने अब तक उपलब्ध नहीं हो पाए हैं। 19 और 20 मार्च को भगवान झूलेलाल का 1076वां जन्मोत्सव है, जिसके उपलक्ष्य में दो दिवसीय भव्य महोत्सव होगा।
मंदिर प्रशासन का कहना है कि यदि समय पर गैस की आपूर्ति नहीं हुई, तो लंगर सेवा प्रभावित हो सकती है। एलपीजी संकट के बीच कालाबाजारी रोकने के लिए प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। खाद्य एवं पुणे नागरिक आपूर्ति विभाग ने अवैध गैस बिक्री पर अंकुश लगाने के लिए तीन विशेष टीमें तैनात की है। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि अधिक कीमत पर सिलेंडर बेचने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
हमारी टीमें शहरभर में जांच कर रही हैं और अब तक करीब 150 स्थानों पर निरीक्षण किया जा चुका है। आपूर्ति में कमी का फायदा उठाकर कुछ क्षेत्रों में कालाबाजारी की शिकायते मिली थीं, जिसके बाद यह कार्रवाई शुरू की गई।