गारगई डैम (सौ. सोशल मीडिया )
Mumbai Gargai Water Project Cost: मुंबई के जल आपूर्ति में वृद्धि करने के उद्देश्य से बीएमसी प्रशासन की तरफ से शुरू की जा रही गारगाई पानी परियोजना के कार्यों का प्रस्ताव अनुमानित दर से 8।98 प्रतिशत अधिक दर पर स्थायी समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया था।
प्रस्ताव में अधिक दर तथा पेड़ों के पुनर्रोपण से संबंधित ठोस जानकारी का अभाव होने के कारण, स्थायी समिति के सदस्यों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए इसे पुनर्विचार के लिए वापस भेज दिया गया था।
इसके बाद प्रशासन ने संबंधित पात्र कंपनी के साथ पुनः बातचीत की, जिसके बाद कंपनी ने परियोजना के कार्यों के लिए निर्धारित दर में लगभग 7 प्रतिशत कम करने का प्रयास किया है। इससे बीएमसी को लगभग 268.80 करोड़ रुपये की बचत होने की जानकारी स्थायी समिति के अध्यक्ष प्रभाकर शिंदे ने दी। जानकारी के मुताबिक, वर्तमान में बीएमसी को जल आपूर्ति और मांग के बीच प्रति दिन 2324 मिलियन लीटर पानी की कमी का सामना करना पड़ रहा है।
प्राकृतिक जल स्रोत वाले गारगाई पानी परियोजना को गति देना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से पिछले कई वर्षों से लंबित इस परियोजना को आगे बढ़ाने का प्रयास मनपा में सत्तारूढ़ भाजपा की तरफ से किया गया, जब इस प्रस्ताव को स्थायी समिति के समक्ष मंजूरी के लिए रखा गया, तब परियोजना की लागत मनपा द्वारा अनुमानित दर से बातचीत के बाद भी 8.98 प्रतिशत अधिक थी।
इस परियोजना से मुंबईकरों को 440 मिलियन लीटर पानी उपलब्ध होने वाला है, इसलिए यह परियोजना महत्वपूर्ण है। हालांकि, प्रस्ताव में अधिक दर को लेकर स्टैंडिग कमेटी के सदस्यों ने आपत्ति जताई। सभागृह नेता गणेश खणकर ने मांग की कि प्रस्ताव प्रशासन द्वारा तय किए गए अनुमानित दर के अनुरूप होना चाहिए। साथ ही प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, मुआवजा, क्षतिपूर्ति तथा पेड़ों के पुनर्रोपण जैसे मुद्दों पर प्रशासन से स्पष्ट उत्तर न मिलने के कारण प्रस्ताव को पुनर्विचार के लिए लौटाया गया।
बाद में प्रशासन ने पुनः प्रस्ताव प्रस्तुत किया, जिसमें 3006.75 करोड़ रुपये के अनुमानित खर्च के मुकाबले 3276.75 करोड़ रुपये का प्रस्ताव रखा गया था, लेकिन संशोधित प्रस्ताव में ठेकेदार ने 3006,75 करोड़ रुपये के अनुमानित खर्च के मुकाबले 3065.68 करोड़ रुपये में काम करने की तैयारी दिखाई।
यानी पहले जहां 8.98 प्रतिशत अधिक दर थी, उसे घटाकर 1.96 प्रतिशत अधिक कर दिया गया। इससे मनपा पर पड़ने वाला अतिरिक्त आर्थिक बोझ कम हुआ और लगभग 211.37 करोड़ रुपये की राहत मिली। निविदा में उद्धृत दर पर अंतिम रूप से कुल 268.80 करोड़ रुपये की छूट दी गई, जिससे महानगरपालिका के खजाने में बड़ी बचत हुई।
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प्रभाकर शिंदे ने बताया कि इस परियोजना के लिए वन क्षेत्र के 657.959 (658) हेक्टेयर भूमि के उपयोग का प्रस्ताव है। वन विभाग की 2025 की गणना के अनुसार इस क्षेत्र में 3, 10, 140 पेड़ हैं, जो इस परियोजना से प्रभावित होंगे। इन पेड़ों के पुनर्रोपण का मुद्दा भी महत्वपूर्ण था। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सभी पेड़ों का पुनर्रोपण किया जाएगा और चार प्रभावित गांवों के पुनर्वास के बाद उनके क्षेत्र में प्रस्तावित 324 हेक्टेयर निजी भूमि पर यह कार्य किया जाएगा, इसके अलावा, वैकल्पिक वनीकरण के लिए आवश्यक 658 हेक्टेयर भूमि में से 590 हेक्टेयर भूमि प्राप्त हो चुकी है, जबकि शेष 68 हेक्टेयर भूमि प्राप्त करने की प्रक्रिया प्रगति पर है।