ED Action: 137 करोड़ की ठगी का खुलासा, सुमाया ग्रुप पर ईडी का शिकंजा
Maharashtra News: ईडी ने फर्जी सरकारी योजना के नाम पर निवेशकों से धोखाधड़ी करने वाले सुमाया समूह की 35.22 करोड़ रुपये की संपत्ति PMLA के तहत जब्त की है। जांच जारी है।
- Written By: अपूर्वा नायक
प्रवर्तन निदेशालय (pic credit; social media)
Mumbai News In Hindi: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने निवेशकों के हितों की रक्षा करते हुए सुमाया समूह और उसके सहयोगियों की 35.22 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियों को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत अस्थायी रूप से जब्त कर लिया है।
यह कार्रवाई ईडी के मुंबई क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा की गई। ईडी की जांच हरियाणा सरकार की ‘नीड टू फीड’ योजना के नाम पर किए गए एक बड़े धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग रैकेट से जुड़ी है। जांच में सामने आया कि समूह ने फर्जी सरकारी अनुबंध का हवाला देकर निवेशकों को गुमराह किया।
ईडी जांच में क्या अहम खुलासे हुए?
जांच में पाया गया कि सुमाया समूह के प्रमोटर आशिक गाला ने निवेशकों से करीब 137 करोड़ रुपये की हेराफेरी की। समूह ने फर्जी कृषि व्यापारियों, नकली चालानों और ट्रक रसीदों के जरिए धन का चक्रीय लेनदेन किया।
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फर्जी कारोबार का पैमाना कितना बड़ा था?
ईडी के अनुसार, लगभग 5,000 करोड़ रुपये के दिखावटी लेनदेन किए गए, जिनमें से केवल 10 प्रतिशत वास्तविक थे। शेष लेनदेन पूरी तरह फर्जी दस्तावेजों पर आधारित थे।
इस घोटाले से निवेशकों को कैसे नुकसान हुआ?
फर्जी लेनदेन के दम पर समूह का राजस्व महज दो वर्षों में 210 करोड़ से बढ़कर 6,700 करोड़ रुपये दिखाया गया। इससे शेयर बाजार में कृत्रिम उछाल आया और निवेशकों को गलत जानकारी देकर निवेश के लिए प्रेरित किया गया।
ईडी ने किन-किन स्थानों पर छापेमारी की?
मामले की गंभीरता को देखते हुए ईडी ने मुंबई, दिल्ली और गुरुग्राम में कुल 19 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया, जहां से कई अहम दस्तावेज और डिजिटल सबूत जब्त किए गए।
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आगे की कार्रवाई क्या हो सकती है?
ईडी अब जब्त संपत्तियों के स्रोत, धन के अंतिम उपयोग और अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका की गहन जांच कर रही है। आने वाले समय में इस मामले में और गिरफ्तारियां संभव मानी जा रही हैं।
