Pune Zilla Parishad से पहले पुणे में ऑपरेशन लोटस 2.0 सफल, एनसीपी के पूर्व जिलाध्यक्ष भाजपा की ओर

Maharashtra News: पुणे जिला परिषद चुनाव की घोषणा के साथ ही भाजपा का ऑपरेशन लोटस 2.0 सफल होता दिख रहा है। अजीत पवार गुट के करीबी और पूर्व जिलाध्यक्ष प्रदीप गारटकर जल्द भाजपा में शामिल होंगे।
Operation Lotus 2.0
ऑपरेशन लोटस 2.0 (AI Generated)
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Pune News In Hindi: जिला परिषद चुनाव की घोषणा होते ही पुणे की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। भाजपा का ऑपरेशन लोटस 2.0 एक बार फिर सफल होता नजर आ रहा है। अजीत पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकां) के पूर्व जिलाध्यक्ष प्रदीप गारटकर भाजपा में शामिल होने जा रहे हैं।

प्रदीप गारटकर कौन हैं और उनका राजनीतिक महत्व क्या है?

प्रदीप गारटकर को अजीत पवार का बेहद करीबी और विश्वासपात्र नेता माना जाता रहा है। उन्होंने नगर परिषद चुनाव से पहले राकां के जिलाध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद से उनके भाजपा में जाने की चर्चाएं तेज हो गई थीं।

भाजपा में औपचारिक प्रवेश कब होगा?

सूत्रों के अनुसार, आने वाले कुछ दिनों में वरिष्ठ भाजपा नेताओं की मौजूदगी में प्रदीप गारटकर का पार्टी में औपचारिक प्रवेश कराया जाएगा। इसे भाजपा की रणनीतिक सफलता के रूप में देखा जा रहा है।

अजीत पवार गुट में मतभेद कैसे बढ़े?

इंदापुर नगर परिषद चुनाव के दौरान अजीत पवार गुट ने पूर्व उपनगराध्यक्ष भरत शहा को पार्टी में शामिल कर राष्ट्रवादी के चुनाव चिन्ह पर उम्मीदवार बनाया था। इस फैसले का प्रदीप गारटकर के समर्थकों ने जोरदार विरोध किया, जिससे पार्टी के भीतर मतभेद और खींचतान खुलकर सामने आ गई।

इस घटनाक्रम को अजीत पवार गुट के लिए झटका क्यों माना जा रहा है?

प्रदीप गारटकर जैसे वरिष्ठ और प्रभावशाली नेता का पार्टी छोड़ना अजीत पवार गुट के लिए चुनावी झटका माना जा रहा है। खासकर जिला परिषद चुनाव से ठीक पहले यह घटनाक्रम संगठनात्मक मजबूती पर सवाल खड़े कर रहा है।

भाजपा को इससे क्या राजनीतिक फायदा हो सकता है?

भाजपा के लिए यह कदम पुणे जिले में संगठन विस्तार और चुनावी बढ़त के रूप में देखा जा रहा है। स्थानीय स्तर पर मजबूत पकड़ रखने वाले नेताओं के शामिल होने से भाजपा को जिला परिषद चुनाव में सीधा लाभ मिल सकता है।

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