Drink And Drive पर सख्ती रंग लाई, मुंबई में 39% घटे शराब पीकर गाड़ी चलाने के मामले
Maharashtra News: मुंबई ट्रैफिक पुलिस की एफआईआर नीति का असर दिखने लगा है। 2025 में ड्रिंक एंड ड्राइव के मामलों में 39 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है, जिससे सड़क सुरक्षा को मजबूती मिली है।
- Written By: अपूर्वा नायक
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: AI)
Mumbai News In Hindi: नशेड़ी चालकों के खिलाफ मुंबई ट्रैफिक पुलिस की लगातार मुहिम रंग लाई है। यातायात पुलिस द्वारा ड्रिंक एंड ड्राइव पर एफआईआर दर्ज करने की वजह से वर्ष 2025 में शहर में शराब पीकर वाहन चलाने वालों के खिलाफ 5,700 से अधिक मामले दर्ज किए गए, जो 2024 में दर्ज 9,462 मामलों की तुलना में 39% की कमी दर्शाता है।
एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि एफआईआर दर्ज होने से वाहन चालक के रोजगार की संभावनाओं और पासपोर्ट आवेदन पर भी असर पड़ सकता है। इसके अलावा, पिछले साल 2,400 से अधिक अपराधियों के ड्राइविंग लाइसेंस निलंबन के लिए क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों (आरटीओ) को भेजे गए थे।
पहले पुलिस शराब पीकर गाड़ी चलाने वालों के खिलाफ केवल स्थानीय कानूनों (जैसे एमवी एक्ट की धारा 185) के तहत चालान काटती थी, लेकिन यह पर्याप्त निवारक साबित नहीं हो रहा था।
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इसलिए मध्य 2025 से एफआईआर दर्ज करने की नीति अपनाई गई, जिसका सकारात्मक असर दिख रहा है। हालांकि मुंबईकरों ने कहा कि वाहन चालकों में यातायात अनुशासन सुधारने के लिए सड़कों पर पुलिस की मौजूदगी बढ़ानी होगी। यातायात नियमों के को उल्लंघन जीवन के खतरे के आधार पर श्रेणियों में बांटा जाना चाहिए।
नशे में गाड़ी चलाने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का असर 2025 की नव वर्ष पूर्व संध्या पर भी देखा गया, जब मामलों की सख्या (211) 31 दिसंबर, 2024 को दर्ज किए गए 333 मामलों की तुलना में कम थी।
– अनिल कुंभारे, संयुक्त पुलिस आयुक्त (यातायात)
केवल चालान देकर नहीं छोड़ा जाना चाहिए
उदाहरण के लिए, गलत दिशा में वाहन चलाना और अत्यधिक तेज गति से गाड़ी चलाना, शराब पीकर गाड़ी चलाने की तरह ही उच्च जोखिम वाले अपराधों की श्रेणी में रखा जाना चाहिए और ऐसे अपराधियों को केवल चालान देकर नहीं छोड़ा जाना चाहिए।
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गौरतलब है कि वर्ष 2024 में शराब पीकर वाहन चलाने के दर्ज मामलों की संख्या बहुत अधिक थी, 2025 के मध्य में, यातायात पुलिस ने अपराधियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्णय लिया। अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच, पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता और मोटर वाहन अधिनियम के प्रावधानों के तहत 3228 संज्ञेय अपराध दर्ज किए। एफआईआर दर्ज होने के बाद, वाहन चालक का ड्राइविंग लाइसेंस जब्त कर लिया जाता है और निलंबन के लिए आरटीओ को भेज दिया जाता है। उसे अदालत में पेश होना पड़ता है।
