सतारा में आत्महत्या से कूपर अस्पताल में हमले तक, जीवनदाता की सुरक्षा पर सवाल, डॉक्टरों ने दी चेतावनी
MARD Strike: मुंबई के कूपर अस्पताल में महिला मरीज की मौत पर परिजनों ने डॉक्टरों की पिटाई की। सुरक्षा पर फिर सवाल उठे। मार्ड ने दोषियों पर कार्रवाई करते हुए हड़ताल की चेतावनी दी।
- Written By: आकाश मसने
कूपर अस्पताल में डॉक्टरों पर हमला (सोर्स: सोशल मीडिया)
Cooper Hospital Attack MARD Strike: सतारा जिले के फलटण मैं एक महिला डॉक्टर की आत्महत्या का मामला अभी शांत ही नहीं हुआ है। इस बीच विले पार्ले के आर।एन। कूपर अस्पताल में एक मरीजा के परिजनों ने जमकर हंगामा किया और रेजिडेंट डॉक्टरों की पिटाई की। इस घटना के बाद डॉक्टरों की सुरक्षा का मामला फिर गरमा गया है।
जीवनदाताओं पर बढ़ रहे हमले को लेकर रेजिडेंट डॉक्टर आक्रामक हो गए हैं। अपनी सुरक्षा और इस घटना के दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की गई है। अन्यथा राज्यव्यापी सामूहिक हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी गई है।
सेंट्रल महाराष्ट्र रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन, बीएमसी मार्ड और फेडरेशना ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशना (एफएआईएमए) ने दोषियों के खिलाफ तत्काल और सख्त कार्रवाई की मांग की है। मार्ड ने घटना को गंभीर बताते हुए स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा को लेकर आवाज मुखर की है।
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कूपर अस्पताल में डॉक्टरों पर हमला
दरअसल शुक्रवार की देर रात करीब 1 बजे मनपा के कूपर अस्पताल में एक महिला मरीज के परिजनों ने तीन डॉक्टरों की पिटाई कर दी। इस हमले में वे घायल हुए हैं और मानसिक तनाव में हैं।
इस संबंध में कूपर मार्ड ने जुहू पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है। अस्पताल के आपातकालीन विभाग मे गंभीर हालत में आई महिला मरीज का ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर इलाज कर रहे थे।
मार्ड की प्रमुख मांगें
मरीज की मौत हो इससे गुस्साए परिजनों ने हंगामा किया और सीएमओ व रेजिडेंट डॉक्टर से मारपीट की। डीन डॉ. नीलम रेडकर ने मामले की जांच के लिए एक समिति गठित करने का निर्णय लिया है। इस समिति के निर्णय के आधार पर अगला कदम उठाया जाएगा।
मार्ड की प्रमुख मांगों में ईएमएस और क्रिटिकल क्षेत्रों में 24×7 प्रशिक्षित मार्शल की तैनाती और सीसीटीवी निगरानी, स्थायी सशस्त्र सुरक्षा बल, हमलावरों की मेडिकेयर प्रोटेक्शन एक्ट के तहत तत्काल गिरफ्तारी, मार्ड के साथ मासिक सुरक्षा ऑडिट और बकाया राशि सहित 2% महंगाई भत्ते में वृद्धि की मांग शामिल है।
डॉक्टर डर के माहौल में काम नहीं कर सकते और सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं होगा। यदि सुरक्षा तंत्र ध्वस्त होता है, तो सेवाएं सामान्य रूप से जारी नहीं रह सकती।
आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज
जुहू पुलिस ने शनिवार को 35 वर्षीय समीर अब्दुल जब्बार शेख के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। एफआईआर के अनुसार शिकायतकर्ता, अंधेरी निवासी 25 वर्षीय डॉ. गौरव आनंदगावकर है, जो अस्पताल के दुर्घटना वार्ड में चिकित्सा अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं।
समीर शेख, सईदा शेख नाम की 57 वर्षीय महिला को अस्पताल लेकर आया था, उसने बताया कि उन्हें सांस लेने में तकलीफ हो रही है और वे कमजोर महसूस कर रही है।
इसके पहले भी दी थी धमकी
डॉ. प्रशांत भदाके ने मरीज की जांच शुरू की और पाया कि उसका रक्तचाप रिकॉर्ड करने लायक नहीं था। उसकी कैरोटिड नाड़ी कमजोर थी और उसका परिधीय ऑक्सीजन संतृप्ति भी रिकॉर्ड करने लायक नहीं थी।
डॉ. आनंदगांवकर ने तुरंत मेडिसिन विभाग और डॉ. करण देसाई को सूचित किया और सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) देना शुरू किया, इलाज के दौरान समीर शेख ने कथित तौर पर डॉ आनंदगांवकर और डॉ. भदाके को धमकाया और कहा कि अगर मरीज को कुछ हुआ तो वह उन्हें नहीं छोड़ेगा।
पुलिस से मांगी मदद
लगातार कोशिशों के बावजूद, मरीज को बचाया नहीं जा सका, जब डॉक्टरों ने शेख को बताया कि सईदा शेख की इलाज के दौरान मृत्यु हो गई है। तो उसने डॉक्टरों के साथ मारपीट शुरू कर दी। डॉ. रुत्विक ने पुलिस हेल्पलाइन पर कॉल करके मदद मांगी।
कूपर अस्पताल के रेजिडेंट डॉक्टरों ने सामूहिक हड़ताल शुरू कर दी। मार्ड ने चेतावनी दी थी कि अगर सोमवार शाम 5 बजे तक कड़े सुरक्षा उपाय लागू नहीं किए गए, तो केईएम, साथन, नायर और कूपर सहित सभी बीएमसी संचालित अस्पतालों के रेजिडेंट डॉक्टर सामूहिक अवकाश पर चले जाएंगे।
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मार्ड अध्यक्ष डॉ. सचिन पाटिल ने कहा कि गंभीर रूप से बीमार मरीज को बचाने की डॉक्टरों ने पूरी कोशिश की। लेकिन परिजनों ने डॉक्टरों की बेरहमी से पिटाई की। उनके चेहरे, छाती और पेट पर वार किए गए।
घटनास्थल पर मौजूद सुरक्षाकर्मी मूकदर्शक बने रहे। सुरक्षा में विफल रहने वाले लापरवाह सुरक्षा कर्मचारियों को निलंबित किया जाना चाहिए। यह सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा की नींव पर क्रूर हमला है।
एफएआईएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अक्षय डोंगरदिवे ने कहा कि डॉक्टरों ने तुरंत सीपीआर और अन्य आपातकालीन प्रक्रियाएं शुरू कीं, लेकिन मरीज को बचाया नहीं जा सका, डॉक्टरों की सराहना करने की बजाए उन्हें धमकाया और पीटा गया। बीएमसी अस्पतालों में लंबे समय से सुरक्षा खामियों रही है।
