एकनाथ शिंदे, देवेंद्र फडणवीस व उद्धव ठाकरे (डिजाइन फोटो)
Mumbai Mayor Election: मुंबई महानगरपालिका (BMC) के रण में नतीजों के बाद असली ‘पावर गेम’ शुरू हो गया है। सूत्रों के मुताबिक, मेयर की कुर्सी को लेकर उद्धव ठाकरे गुट और भाजपा के बीच पर्दे के पीछे बातचीत की चर्चाएं तेज हैं। इस रणनीति का मकसद डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के बढ़ते प्रभाव को रोकना बताया जा रहा है।
बीएमसी चुनाव 2026 के जो आंकड़े सामने आए हैं, उनमें भाजपा 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। बहुमत के लिए 114 का आंकड़ा जरूरी है। इस बीच चर्चा है कि उद्धव ठाकरे अपने 65 पार्षदों को वोटिंग के दौरान गैरहाजिर (Absent) रहने का निर्देश दे सकते हैं। अगर ऐसा होता है, तो भाजपा बिना किसी कड़े विरोध के अपना मेयर चुन सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ठाकरे 2017 में भाजपा द्वारा किए गए ‘उपकार’ का कर्ज चुकाने की तैयारी में हैं।
साल 2017 के बीएमसी चुनावों में भाजपा और अविभाजित शिवसेना के बीच कांटे की टक्कर थी। तब भाजपा ने मेयर पद की दौड़ से पीछे हटते हुए उद्धव ठाकरे का समर्थन किया था और सत्ता में शामिल न होकर ‘चौकीदार’ की भूमिका चुनी थी। अब कयास लगाए जा रहे हैं कि उद्धव ठाकरे वही रणनीति दोहरा सकते हैं ताकि एकनाथ शिंदे की शिवसेना को मेयर पद की सौदेबाजी से दूर रखा जा सके।
29 पार्षदों के साथ ‘किंगमेकर’ की भूमिका में दिख रहे एकनाथ शिंदे ने अपने पार्षदों की किलेबंदी शुरू कर दी है। शिंदे गुट के पार्षदों को एक निजी होटल में रखा गया है ताकि किसी भी तरह की सेंधमारी (Poaching) को रोका जा सके। यामिनी जाधव और अमेय घोले जैसे अनुभवी चेहरों को ग्रुप लीडर बनाने की तैयारी है। शिंदे का लक्ष्य ढाई साल के लिए मेयर पद मांगना है, क्योंकि भाजपा उनके बिना बहुमत के जादुई आंकड़े तक नहीं पहुंच पा रही है।
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फिलहाल, प्रवीण दरेकर और देवेंद्र फडणवीस ने ठाकरे गुट से किसी भी बातचीत की खबरों को आधिकारिक तौर पर नकारा है, लेकिन मुंबई की राजनीति में ‘जो दिखता है, वह होता नहीं’ की कहावत चरितार्थ होती रही है।