Mumbai में वायु गुणवत्ता पर सटीक नजर, बीएमसी ने शुरू किया एआई आधारित मानस सिस्टम
Mumbai AQI News: BMC ने आईआईटी-कानपुर द्वारा विकसित एआई आधारित ‘मानस’ पोर्टल लॉन्च किया है, जो 75 लो-कॉस्ट सेंसरों से मुंबई के विभिन्न इलाकों का अधिक सटीक व स्थानीय स्तर पर AQI डेटा प्रदान करेगा।
- Written By: अपूर्वा नायक
एक्यूआई मॉनिटर (सौ. सोशल मीडिया )
Mumbai News In Hindi: बीएमसी ने ‘मुंबई एयर नेटवर्क फॉर एडवांस्ड साइंसेज’ मानस (जो एक स्वतंत्र प्लेटफॉर्म जो एआई से संचालित है) की शुरुआत की है। इसका उद्देश्य शहर के समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) पर निगरानी रखना और लगातार बिगड़ती वासु गुणवत्ता से निपटना है।
यह प्रणाली (जिसे आईआईटी-कानपुर ने डिजाइन और लागू किया गया है) कम लागत वाले एक्यूआई मॉनिटरिंग सेंसरों का उपयोग करेगी, जिससे शहर के एक्यूआई डेटा को और अधिक सूक्ष्म स्तर पर प्राप्त किया जा सकेगा।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोडों द्वारा संचालित मौजूदा प्लेटफॉम्र्स के विपरीत, मानस पोर्टल पारंपरिक ‘सतत परिवेशी वायु गुणवत्ता मॉनिटरिंग प्रणाली’ का उपयोग नहीं करेगा।
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वर्तमान में, मुंबई का एक्यूआई स्टेटस देश के अन्य प्रमुख शहरों के साथ सीपीसीबी के सामान्य प्लेटफॉर्म ‘समीर’ में एकीकृत है। मुंबई में कुल 28 वायु गुणवत्ता मापने वाली मशीनें विभिन्न स्थानों पर स्थापित हैं, जो प्रत्येक क्षेत्र की वायु गुणवत्ता की निगरानी करती हैं। ये मशीनें हवा में मौजूद कणों व अन्य सूक्ष्म तत्वों का विश्लेषण करती हैं और डेशबोर्ड पर डेटा प्रदर्शित करती हैं। प्रत्येक मशीन 2 किलोमीटर के दायरे में क्षेत्र की वायु-गुणवत्ता को कवर करती है।
सूक्ष्म स्तर पर करेगा रिकॉर्ड प्रस्तावित
मानस पोर्टल में 75 सेंसरों का नेटवर्क शामिल होगा, जो एक्यूआई को और अधिक सूक्ष्म स्तर पर रिकॉर्ड करेगा। परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन अंधेरी या बांद्रा जैसे बड़े क्षेत्रों का एक्यूआई बताता है, जबकि मानस सेंसर इन बड़े क्षेत्रों के भीतर स्थित कार्टर रोड, पाली हिल, चाकला या साकी नाका जैसे स्थानों का स्थानीय स्तर पर एक्यूआई डेटा प्रदान करेंगे।
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लागत भी है कम
- बीएमसी प्रशासन और आईआईटी-कानपुर के वैज्ञानिक मिलकर मुंबई का एक ग्रिड मैप तैयार करेंगे, जिसमें उन हॉटस्पॉट्स को चिन्हित किया जाएगा जहां लगातार एक्यूआई खराब रहता है। साथ ही उन बड़े भौगोलिक क्षेत्रों की पहवान की जाएगी जहां व्यापक निगरानी की आवश्यकता होगी, इसके अनुसार सेंसर लगाए जाएंगे और उनकी रीडिंग्स एक एकीकृत प्लेटफॉर्म पर रिकॉर्ड की जाएगी।
- प्रशासन के अनुसार ये सेंसर सतत परिवेशी वायु गुणवता निगरानी स्टेशन की तुलना में काफी सस्ते हैं। जहां एक सतत परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन मशीन की स्थापना और पांच साल के रखरखाव की लागत 1।6 करोड़ रुपये है, वहीं ये सेंसर छोटे, कॉम्पेक्ट और रेडियो के आकार के होते हैं अधिकारियों के अनुसार, पोर्टल छह महीनों में तैयार हो जाएगा, लेकिन इसे तुरंत सार्वजनिक नहीं किया जाएगा।
- शुरुआती महीनों में सैसरों की रोहिग्स को आसपास की सतत परिवेशी वायु गुणवता निगरानी स्टेशन मशीनी से मिलान किया जाएगा। समस्याएं मिलने पर उन्हें ठीक किया जाएगा, सभी खामियों के दूर हो जाने के बाद, वर्ष 2026 की दूसरी छमाही में यह पोर्टल जनता के लिए लॉन्च किया जाएगा।
