

Mumbai BEST Bus Maintenance Issue: मानसून के बीच मुंबई की बेस्ट बसों के रखरखाव और यात्रियों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। बेस्ट समिति सदस्यों ने आरोप लगाया है कि शहर में चल रही कई बसें खराब दरवाजों, बारिश में पानी रिसने और रखरखाव की खामियों से जूझ रही हैं।
उनका कहना है कि प्रस्थान से पहले निरीक्षण के दावों के बावजूद ऐसी बसें सड़कों पर उतर रही हैं, जिससे यात्रियों को असुविधा और सुरक्षा संबंधी जोखिम का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, बेस्ट प्रशासन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सभी बसों का नियमित निरीक्षण किया जाता है और हालिया अधिकांश दुर्घटनाएं तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि मानवीय त्रुटि का परिणाम थीं।
शिवसेना यूबीटी के नेता व बेस्ट समिति सदस्य नितिन नंदगांवकर ने कहा कि उन्होंने हाल ही में रूट 357 शिवाजी नगर-मुंबई सेंट्रल की एसी बस में सफर किया, जहां दरवाजा ठीक से बंद नहीं हो रहा था। उन्होंने कहा कि इससे एसी सेवा का उद्देश्य ही समाप्त हो जाता है, क्योंकि ठंडी हवा बाहर निकलती रहती है, जबकि यात्री इसके लिए न्यूनतम 12 रुपए किराया चुकाते हैं।
उनका आरोप है कि पिछले सप्ताह प्रशासन ने 27 डिपो से बसें रवाना होने से पहले जांच का भरोसा दिया था, लेकिन खराब बसें अब भी सड़कों पर हैं। नंदगांवकर ने बेस्ट के एक पत्र का हवाला देते हुए कहा कि हाल ही में 868 बसों में खराबियां पाई गईं, जिनमें से 774 बसों की मरम्मत पिछले तीन महीनों में की गई। उनके अनुसार, यह आंकड़ा बताता है कि विशेषकर मानसून में रखरखाव की और कड़ी निगरानी की जरूरत है। उन्होंने हालिया बस दुर्घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि केवल चालक की गलती बताकर तकनीकी पहलुओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
भाजपा के समिति सदस्य रमाकांत गुप्ता ने रूट ए-341 गोरेगांव-एंटॉप हिल की बस में बारिश का पानी टपकने की शिकायत उठाई। उन्होंने कहा कि समिति ने धारावी, अनिक, वडाला, कुर्ला और ओशिवारा डिपो का निरीक्षण कर मानसून से पहले सभी बसों को रिसाव-मुक्त बनाने और उनकी पूरी जांच की मांग की थी। उन्होंने ठेका बस संचालकों से भी नियमित सर्विसिंग सुनिश्चित करने की अपील की।
वहीं, बेस्ट के इंजीनियरिंग और परिवहन विभाग के अधिकारियों ने कहा कि सभी बसों की नियमित जांच और रखरखाव किया जाता है। हालिया दुर्घटनाओं की जांच में वाहन तकनीकी रूप से सुरक्षित पाए गए हैं और अधिकांश घटनाएं मानवीय भूल के कारण हुईं। अधिकारियों ने बताया कि विशेष रूप से इलेक्ट्रिक बसों के चालकों को चार सप्ताह का अनिवार्य प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।