मुंबई के ऑटो-टैक्सी चालकों को बड़ी राहत, मीटर टेस्टिंग को लेकर आया बड़ा फैसला
Mumbai News: मुंबई महानगर क्षेत्र में ऑटो-रिक्शा और मीटर टैक्सी चालकों को बड़ी राहत मिलेगी। नए मीटर टेस्टिंग केंद्रों को मंजूरी से परीक्षण प्रक्रिया तेज और आसान होगी।
- Written By: आकाश मसने
ऑटो रिक्शा (सोर्स: सोशल मीडिया)
Mumbai Auto Rickshaw Meter Testing: मुंबई महानगर क्षेत्र में ऑटो-रिक्शा और मीटर टैक्सी चालकों को जल्द ही बड़ी राहत मिलने वाली है। मीटर टेस्टिंग प्रक्रिया को सरल और तेज बनाने के लिए मुंबई महानगर क्षेत्र परिवहन प्राधिकरण ने नए मीटर टेस्टिंग केंद्रों को अनुमति देने का फैसला किया है। प्राधिकरण के सचिव भरत कलसकर ने बताया कि इसके तहत सभी आरटीओ कार्यालयों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे दो माह के भीतर आवश्यक अनुमति की प्रक्रिया पूरी करें।
मुंबई महानगर क्षेत्र परिवहन प्राधिकरण के अंतर्गत मुंबई महानगर क्षेत्र में कुल 10 आरटीओ कार्यालय कार्यरत हैं। इनकी सीमा में लगभग 4.17 लाख ऑटो-रिक्शा और 44,825 मीटर टैक्सियां पंजीकृत हैं। नियमों के अनुसार, किराया बढ़ने के बाद या प्रत्येक दो वर्ष में मीटर का कैलिब्रेशन अथवा रिकैलिब्रेशन अनिवार्य होता है।
मुंबई में कितनी 4.5 लाख अधिक ऑटो-टैक्सी
हालांकि, वर्तमान में पूरे महानगर क्षेत्र में केवल 15 से 20 मीटर टेस्टिंग केंद्र ही उपलब्ध हैं। सीमित केंद्रों की वजह से 4.5 लाख से अधिक वाहनों के मीटर परीक्षण के लिए समय पर अपॉइंटमेंट नहीं मिल पा रहा था, जिसे लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही थीं। इसी पृष्ठभूमि में प्राधिकरण ने फैसला लिया है कि आरटीओ क्षेत्राधिकार में आने वाले आईटीआई संस्थानों, पॉलिटेक्निक और इंजीनियरिंग कॉलेजों को मीटर टेस्टिंग केंद्र शुरू करने की अनुमति दी जाएगी। इसके लिए आरटीओ को अधिकतम दो माह की समयसीमा दी गई है।
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कितनी टैक्सियां को कितने टेस्टिंग सेंटर
- कार्यरत आरटीओ कार्यालय: 10
- पंजीकृत ऑटो रिक्शाः 4.17 लाख
- पंजीकृत मीटर टैक्सियां: 44,825
- मौजूदा मीटर टेस्टिंग केंद्र: 15-20
- अनिवार्य मीटर परीक्षण अवधिः 2 वर्ष
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अधिकारियों का मानना है कि नए केंद्र शुरू होने से मीटर परीक्षण की क्षमता बढ़ेगी और लंबी प्रतीक्षा सूची खत्म होगी। इस निर्णय से न केवल ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों को समय पर मीटर टेस्टिंग की सुविधा मिलेगी, बल्कि पूरे सिस्टम में पारदर्शिता और सुचारू संचालन भी सुनिश्चित होगा। उम्मीद की जा रही है कि नए केंद्रों के चालू होने के बाद मीटर टेस्टिंग की प्रक्रिया पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज और सहज हो जाएगी।
