मुंबई एयरपोर्ट पर नमाज के लिए शेड बनेगा या नहीं? कोर्ट ने सरकार के पाले में डाली गेंद
Mumbai Airport Namaz Shed Dispute: मुंबई एयरपोर्ट पर नमाज शेड की मांग पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने सरकार को विकल्प तलाशने के निर्देश दिए। सरकार ने सुरक्षा के आधार पर विरोध किया है।
- Written By: अनिल सिंह
Mumbai Airport Namaz Shed Dispute (फोटो क्रेडिट-X)
Bombay High Court On Namaz Shed: मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (CSMIA) पर टैक्सी और ऑटो चालकों के लिए नमाज के वास्ते अस्थायी शेड बनाने की मांग अब एक बड़े कानूनी और प्रशासनिक विवाद में बदल गई है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस संवेदनशील मामले में हस्तक्षेप करते हुए गेंद अब राज्य सरकार और एमएमआरडीए (MMRDA) के पाले में डाल दी है।
नमाज के शेड के लिए अदालत ने सरकार को सुरक्षा और धार्मिक आस्था के बीच संतुलन बनाने का रास्ता खोजने का निर्देश दिया है। यह मामला न केवल हजारों ड्राइवरों की सुविधा से जुड़ा है, बल्कि देश के सबसे व्यस्त हवाई अड्डे की सुरक्षा से भी सीधा ताल्लुक रखता है।
सुरक्षा बनाम आस्था: सरकार का कड़ा रुख
राज्य सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट में हलफनामा दायर कर इस मांग का पुरजोर विरोध किया है। अतिरिक्त लोक अभियोजक ज्योति चव्हाण ने अदालत को बताया कि हवाई अड्डा एक ‘अत्यधिक संवेदनशील’ क्षेत्र (High-Security Zone) है। सरकार का तर्क है कि यदि प्रार्थना के लिए शेड की अनुमति दी जाती है, तो एक समय में लगभग 2,000 लोग वहां एकत्रित हो सकते हैं। दिन में पांच बार इतनी बड़ी भीड़ का जमा होना सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है, जिससे मुंबई एयरपोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था में सेंध लगने का खतरा बढ़ सकता है।
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ड्राइवरों की दलील और ‘अदानी समूह’ का विकल्प
‘ऑटो-टैक्सी, ओला-उबर पुरुष संघ’ का कहना है कि ड्राइवर घंटों एयरपोर्ट पर फंसे रहते हैं और नमाज के लिए दूर जाना उनके व्यवसाय को प्रभावित करता है। इसके उलट, हवाई अड्डे का प्रबंधन संभाल रहे अदानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स ने अदालत में नक्शा पेश करते हुए बताया कि हवाई अड्डे के 4 किलोमीटर के दायरे में तीन मस्जिदें पहले से मौजूद हैं। इनमें से सबसे नजदीकी मस्जिद पैदल मात्र 15 मिनट की दूरी पर है। प्रबंधन का मानना है कि ड्राइवरों के पास वाहन उपलब्ध होने के कारण उनके लिए इन मस्जिदों तक पहुँचना कठिन नहीं है, इसलिए अलग से शेड की कोई तकनीकी आवश्यकता नहीं है।
हाई कोर्ट का ‘मानवीय दृष्टिकोण’ और भविष्य का फैसला
न्यायमूर्ति बी.पी. कुलाबवाला की पीठ ने इस मामले में ‘मध्यमार्ग’ अपनाने का सुझाव दिया है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने सरकार और एमएमआरडीए को निर्देश दिया है कि वे सुरक्षा प्रोटोकॉल से समझौता किए बिना किसी वैकल्पिक स्थान की तलाश करें। कोर्ट ने विशेष रूप से रमजान के महीने को ध्यान में रखते हुए अस्थायी अनुमति की संभावना तलाशने को कहा है। अब सबकी नजरें सरकार की अगली रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि हवाई अड्डे पर प्रार्थना के लिए जगह मिलेगी या ड्राइवरों को नजदीकी मस्जिदों का ही रुख करना होगा।
