मुंबई में बुलेट ट्रेन के लिए टनल का काम जारी (सोर्स: सोशल मीडिया)
Mumbai Ahmedabad Bullet Train Underwater Tunnel Project: मुंबई-अहमदाबाद के बीच चलने वाली देश की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना को लेकर नए अपडेट्स सामने आ रहे हैं। 2027 में बुलेट ट्रेन का पहला चरण गुजरात में शुरू करना है,जबकि महाराष्ट्र के हिस्से में काम तेजी से चल रहा है। महाराष्ट्र में बुलेट ट्रेन का काम जमीन के नीचे, पानी में और जमीन के ऊपर एलिवेटेड भी किया जा रहा है।
बुलेट ट्रेन के लिए मुंबई के बीकेसी से ठाणे के शीलफाटा तक लगभग 21 किमी लंबी सुरंग बनाई जा रही है। इस भूकंपरोधी सुरंग में भारत की पहली 7 किमी लंबी समुद्र के नीचे की सुरंग भी शामिल है, जो ठाणे क्रीक के नीचे से गुजरती है। बताया गया कि 21 किमी में से NATM (न्यू आस्ट्रियन मेथड) तरीकों का उपयोग कर 5 किमी सुरंग पहले ही पूरी हो चुकी है। अब बाकी 16 किमी सुरंग टनल बोरिंग मशीनों (TBM) की मदद से बनाई जाएगी।
मुंबई के विक्रोली में इस टनल बोरिंग मशीन की असेंबलिंग का काम शुरू कर दिया गया है। यह सुरंग 13.1 मीटर व्यास वाली एक सिंगल-ट्यूब सुरंग होगी, जिसमें दो ट्रैक बनाए जाएंगे। यह सुरंग जमीन के स्तर से लगभग 25 से 57 मीटर गहरी होगी, और इसका सबसे गहरा निर्माण बिंदु पारसिक पहाड़ी से 114 मीटर नीचे होगा। इस प्रक्रिया की शुरुआत मुख्य शील्ड के छह हिस्सों में से एक को नीचे उतारने से की गई, जिसका वजन लगभग 170 मीट्रिक टन था। इस हिस्से की लंबाई लगभग 8.66 मीटर और चौड़ाई लगभग 7 मीटर है। मुंबई के विक्रोली में ज़मीन के स्तर से 56 मीटर की गहराई पर नीचे उतारा गया,जो कि 20 मंज़िला इमारत की ऊंचाई के बराबर है।
बताया गया कि दो टीबीएम आ चुकी हैं। इनका संपूर्ण परीक्षण और कमीशनिंग के बाद सुरंग निर्माण कार्य शुरू होगा। TBMs को नीचे उतारने के लिए, तीन (3) शाफ़्ट बनाए गए हैं। शाफ़्ट 1: बीकेसी में रिट्रीवल शाफ़्ट, शाफ़्ट 2 विक्रोली में और शाफ़्ट 3 सावली में जो घनसोली के पास होगा। टीबीएम 1 विक्रोली में शाफ्ट 2 से शुरू होगा और बीकेसी में मुंबई बुलेट ट्रेन स्टेशन के शाफ्ट 1 की ओर बढ़ेगा जबकि टीबीएम 2 सावली में शाफ्ट 3 से शुरू होगा और विक्रोली की ओर बढ़ेगा।
इस प्रोजेक्ट के लिए दो अत्याधुनिक टीबीएम मशीनों का उपयोग किया जा रहा है। दो टनल बोरिंग मशीनें (टीबीएम), जिनका वजन क्रमशः 3080 टन और 3184 टन है। ये उन्नत टीबीएम मिक्स शील्ड / स्लरी तकनीक पर आधारित हैं। विशेष रूप से जटिल भूवैज्ञानिक परिस्थितियों में संचालन के लिए डिज़ाइन की गई हैं। टीबीएम की कुल लंबाई 95.32 मीटर है और इसमें कई जरूरी हिस्से शामिल हैं, जैसे कटर व्हील, मेन बेयरिंग, जॉ क्रशर, इरेक्टर, मेन शील्ड, टेल शील्ड, और चार खास गैंट्री जो टनल बनाने के काम में मदद करती हैं। ये मशीनें अधिकतम खुदाई दर 49 मि.मी. प्रति मिनट तक, जो उच्च सुरक्षा मानकों को बनाए रखते हुए करती हैं। बताया गया कि मुख्य रूप से टनलिंग के टीबीएम की शुरुआत जुलाई से हो जाएगी और अक्टूबर 2026 तक सुरंग आकार लेने लगेगी।
16 किलोमीटर लंबे टीबीएम हिस्से के लिए टनल लाइनिंग की कास्टिंग हेतु, 11.17 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला एक कास्टिंग यार्ड ठाणे जिले के महापे में स्थापित किया गया है। 7,700 रिंग बनाने के लिए 77,000 सेगमेंट ढाले जाएँगे। टनल की लाइनिंग के लिए खास रिंग सेगमेंट ढाले जा रहे हैं। हर रिंग में नौ घुमावदार सेगमेंट और एक ‘की सेगमेंट’ होगा, जिसमें हर सेगमेंट 2 मीटर चौड़ा और 0.5 मीटर (500 mm) मोटा होगा। यह कास्टिंग यार्ड कास्टिंग कार्यों को स्वचालित और मशीनीकृत करने के लिए विभिन्न क्रेनों, गैंट्रियों और मशीनों से सुसज्जित है।
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सुरंग और आस-पास के क्षेत्र में मौजूद सभी ढांचों की सुरक्षा देखते हुए सुरक्षित खुदाई सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न निगरानी उपकरणों का उपयोग किया जा रहा है। इनमें सरफेस सेटलमेंट पॉइंट्स (एसएसपी), ऑप्टिकल डिस्प्लेसमेंट सेंसर्स (ओडीएस) या टिल्ट मीटर्स, बीआरटी (बाय रिफ्लेक्ट टारगेट/3D टारगेट), सुरंग की सतह पर सूक्ष्म तनाव मापने के लिए स्ट्रेन गेज, और पीक पार्टिकल वेलोसिटी (पीपीवी) या कंपन और भूकंपीय तरंगों की निगरानी के लिए सीस्मोग्राफ का उपयोग शामिल हैं। बुलेट ट्रेन के रूट पर बीकेसी में एकमात्र भूमिगत स्टेशन का काम भी तेजी से चल रहा है। यह जमीन के नीचे मुंबई ही नहीं देश का सबसे बड़ा ग्रीन स्टेशन होगा।
बुलेट ट्रेन 508.17 किमी की दूरी में 384.04 किमी हिस्सा गुजरात में और 155.76 किमी हिस्सा महाराष्ट्र में होगा। वहीं 4.3 किमी हिस्सा दादरा नगर हवेली में भी है। बुलेट ट्रेन के रूट पर 12 स्टेशन होंगे, जिनमें से 8 गुजरात में, 4 स्टेशन महाराष्ट्र में बनने हैं। जबकि दादरा हवेली में कोई स्टेशन नहीं होगा।